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Hardoi News: बाढ़ में बहे विद्यालय को आठ साल में भी नहीं मिल सका भवन, पूर्व प्रधान के घर में स्कूल
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फोटो-10- ग्राम गौरिया के प्रधान के घर के कक्ष में
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हरदोई। सूबे में बीते नौ साल में हुए विकास कार्यों की गाथा इन दिनों खूब गाई जा रही थी। विकास हुआ भी है लेकिन कई मामले विकास गाथा को खूब चिढ़ाते हैं। हरपालपुर विकास खंड के गौरिया स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन बाढ़ में बह गया था। सात साल में इस गांव में विद्यालय का नया भवन नहीं बन सका। इतना जरूर है कि पढ़ाई बाधित न हो इसलिए पूर्व ग्राम प्रधान के घर में स्कूल संचालित हो रहा है।
हरपालपुर विकास खंड का गौरिया गांव रामगंगा नदी के पास है। यहां प्राथमिक विद्यालय का अपना भवन था। वर्ष 2017-18 में आई बाढ़ के दौरान विद्यालय के भवन का कुछ हिस्सा बाढ़ में कट गया और बाकी हिस्सा भी बाढ़ के पानी में बह गया। इसके बाद यहां के विद्यार्थियों को पड़ोसी गांव स्थित विद्यालय में समायोजित किया गया लेकिन बच्चे वहां पढ़ने ही नहीं गए। इस पर विद्यालय का संचालन गांव में ही कराने का निर्णय लिया गया।
विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए पूर्व प्रधान गामा सिंह ने अपना मकान विद्यालय संचालन के लिए दे दिया था। पिछले आठ साल से यह विद्यालय पूर्व प्रधान के घर के दो कक्षों में संचालित हो रहा है। यहां 55 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनमें 30 छात्राएं भी शामिल हैं। विद्यालय में इंचार्ज अध्यापक मोहन कटियार, सहायक अध्यापिका राज शीला, शिक्षामित्र वीरपाल के अलावा एक रसोइया हंसा देवी तैनात हैं।
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आपदा मद से भवन बनवाने को लिखा गया था पत्र
पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह की ओर से परियोजना से भवन के लिए बजट न मिलने पर आठ मई को राहत आयुक्त को पत्र लिखा गया था। आपदा मद से भवन का निर्माण कराने की मांग की गई थी। इससे पूर्व जनवरी में भी पत्र लिखा गया था जिसमें भवन निर्माण के लिए 21,52,150 रुपये की लागत का भी जिक्र किया गया था।
विद्यालय भवन बाढ़ में बह गया था, उसके विषय में समग्र शिक्षा अभियान की कार्ययोजना में प्रस्ताव भेजा जा रहा है। बजट न मिलने के कारण भवन का निर्माण नहीं हो सका। बजट मिलने पर भवन का निर्माण करा दिया जाएगा। -प्रभाष कुंवर श्रीवास्तव, बीईओ मुख्यालय
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हरपालपुर विकास खंड का गौरिया गांव रामगंगा नदी के पास है। यहां प्राथमिक विद्यालय का अपना भवन था। वर्ष 2017-18 में आई बाढ़ के दौरान विद्यालय के भवन का कुछ हिस्सा बाढ़ में कट गया और बाकी हिस्सा भी बाढ़ के पानी में बह गया। इसके बाद यहां के विद्यार्थियों को पड़ोसी गांव स्थित विद्यालय में समायोजित किया गया लेकिन बच्चे वहां पढ़ने ही नहीं गए। इस पर विद्यालय का संचालन गांव में ही कराने का निर्णय लिया गया।
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विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए पूर्व प्रधान गामा सिंह ने अपना मकान विद्यालय संचालन के लिए दे दिया था। पिछले आठ साल से यह विद्यालय पूर्व प्रधान के घर के दो कक्षों में संचालित हो रहा है। यहां 55 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनमें 30 छात्राएं भी शामिल हैं। विद्यालय में इंचार्ज अध्यापक मोहन कटियार, सहायक अध्यापिका राज शीला, शिक्षामित्र वीरपाल के अलावा एक रसोइया हंसा देवी तैनात हैं।
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आपदा मद से भवन बनवाने को लिखा गया था पत्र
पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह की ओर से परियोजना से भवन के लिए बजट न मिलने पर आठ मई को राहत आयुक्त को पत्र लिखा गया था। आपदा मद से भवन का निर्माण कराने की मांग की गई थी। इससे पूर्व जनवरी में भी पत्र लिखा गया था जिसमें भवन निर्माण के लिए 21,52,150 रुपये की लागत का भी जिक्र किया गया था।
विद्यालय भवन बाढ़ में बह गया था, उसके विषय में समग्र शिक्षा अभियान की कार्ययोजना में प्रस्ताव भेजा जा रहा है। बजट न मिलने के कारण भवन का निर्माण नहीं हो सका। बजट मिलने पर भवन का निर्माण करा दिया जाएगा। -प्रभाष कुंवर श्रीवास्तव, बीईओ मुख्यालय

फोटो-10- ग्राम गौरिया के प्रधान के घर के कक्ष में