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Hardoi News: पुलिस पर गोली चलाने की लचर विवेचना से आरोपी काे मिली डिफॉल्ट जमानत
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हरदोई। हद हो गई। पुलिस टीम पर हुए हमले की विवेचना भी पुलिस सही ढंग से नहीं कर पाई। व्यापारी की हत्या के आरोपी के पुलिस टीम पर फायरिंग करने के मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है। हत्या के मामले में वांछित और पुलिस मुठभेड़ के आरोपी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋचा वर्मा ने ‘डिफॉल्ट जमानत’ पर रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायालय के इस निर्णय ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल लगा दिए हैं। खास बात यह भी है कि विवेचक तय समयसीमा के भीतर अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल नहीं कर सके। हालांकि हत्या के मामले में आरोपी अभी जेल में ही रहेगा।
लोनार कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार यादव ने पुरौरी निवासी सत्यम उर्फ निरहुआ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि निरहुआ ने 12 फरवरी 2026 को पुरौरी निवासी कारोबारी अनिल सिंह भदौरिया उर्फ नीशू की हत्या कर दी थी। इसके बाद भाग गया था। गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस टीम पर निरहुआ ने फायरिंग कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली पैर में लगने से निरहुआ घायल हो गया था। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया था। न्यायालय से उसे जेल भेज दिया था।
इसके बाद की विवेचना में पुलिस सुस्त हो गई। कानून के मुताबिक हत्या के प्रयास के मामले में 90 दिन के अंदर आरोप पत्र दाखिल करना होता है। पुलिस ने तय समयसीमा में आरोप पत्र ही दाखिल नहीं किया। आरोपी की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल ने पुलिस की इस गंभीर चूक को न्यायालय में ढाल बनाया। न्यायालय में दलील दी कि पुलिस की विफलता के कारण आरोपी को अब सलाखों के पीछे रखना उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन है। सीजेएम ऋचा वर्मा ने पुलिस की लापरवाही पर सख्त रुख दिखाते हुए आरोपी की जमानत मंजूर कर दी। हालांकि हत्या के मामले में जमानत न मिलने के कारण आरोपी फिलहाल जेल में ही रहेगा।
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लोनार कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार यादव ने पुरौरी निवासी सत्यम उर्फ निरहुआ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि निरहुआ ने 12 फरवरी 2026 को पुरौरी निवासी कारोबारी अनिल सिंह भदौरिया उर्फ नीशू की हत्या कर दी थी। इसके बाद भाग गया था। गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस टीम पर निरहुआ ने फायरिंग कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली पैर में लगने से निरहुआ घायल हो गया था। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया था। न्यायालय से उसे जेल भेज दिया था।
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इसके बाद की विवेचना में पुलिस सुस्त हो गई। कानून के मुताबिक हत्या के प्रयास के मामले में 90 दिन के अंदर आरोप पत्र दाखिल करना होता है। पुलिस ने तय समयसीमा में आरोप पत्र ही दाखिल नहीं किया। आरोपी की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल ने पुलिस की इस गंभीर चूक को न्यायालय में ढाल बनाया। न्यायालय में दलील दी कि पुलिस की विफलता के कारण आरोपी को अब सलाखों के पीछे रखना उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन है। सीजेएम ऋचा वर्मा ने पुलिस की लापरवाही पर सख्त रुख दिखाते हुए आरोपी की जमानत मंजूर कर दी। हालांकि हत्या के मामले में जमानत न मिलने के कारण आरोपी फिलहाल जेल में ही रहेगा।