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Hardoi News: कोषागार घोटाले के आरोपी के बेटे की जमानत अर्जी खारिज
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हरदोई। जिले के चर्चित कोषागार पेंशन घोटाले के आरोपी के बेटे की जमानत अर्जी अपर जिला जज (कोर्ट संख्या दो) ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने खारिज कर दी है। उस पर धोखाधड़ी, जातिसूचक गालियां देने और पिटाई करने का आरोप है।
बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के तौकलपुर मजरा मूसेपुर निवासी शंकरलाल ने न्यायालय में वाद दायर किया था। बताया कि वह अनपढ़ हैं। इसका फायदा उठाकर उसके भांजे देवेंद्र उर्फ शैलेंद्र और उसके दोस्त ब्रजेश उर्फ वीरेश ने धोखाधड़ी की। आरोपियों ने उसे झांसा दिया कि वह लोनार कोतवाली क्षेत्र के ऐजा में बिजली विभाग में ठेकेदारी करते हैं। सरकारी विभाग में रुपये फंसे होने और इसकी वापसी के लिए बैंक खाते की जरूरत बताई थी।
इस पर शंकरलाल ने बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता खुलवा दिया था। इसके बाद आरोपियों ने उसके खाते में 5,51,000 रुपये मंगवाकर निकलवा लिए थे। ब्रजेश के अधिवक्ता ने न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की। निर्दोष बताते हुए जमानत पर रिहा किए जाने का तर्क दिया। विशेष लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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साढ़े पांच करोड़ के ‘ट्रेजरी व पेंशन घोटाले’ से जुड़े तार...
आरोपी ब्रजेश उर्फ वीरेश के पिता मुंशीलाल कोषागार में दफ्तरी के पद पर तैनात थे। वर्ष 2009 से 2016 के दौरान कोषागार में लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मुंशीलाल ने ही अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी धन (पेंशन घोटाले का पैसा) अवैध रूप से पीड़ित के खाते में भिजवाया और बाद में इन लोगों ने उसे पार कर दिया था। इसके बाद शंकरलाल को कोषागार से रिकवरी नोटिस जारी किया गया था तब शंकरलाल को धोखाधड़ी के बारे में पता चला था। आपत्ति और नाराजगी जताने पर आरोपियों ने लात-घूसों से पिटाई कर जातिसूचक गालियां भी दी थीं।
बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के तौकलपुर मजरा मूसेपुर निवासी शंकरलाल ने न्यायालय में वाद दायर किया था। बताया कि वह अनपढ़ हैं। इसका फायदा उठाकर उसके भांजे देवेंद्र उर्फ शैलेंद्र और उसके दोस्त ब्रजेश उर्फ वीरेश ने धोखाधड़ी की। आरोपियों ने उसे झांसा दिया कि वह लोनार कोतवाली क्षेत्र के ऐजा में बिजली विभाग में ठेकेदारी करते हैं। सरकारी विभाग में रुपये फंसे होने और इसकी वापसी के लिए बैंक खाते की जरूरत बताई थी।
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इस पर शंकरलाल ने बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता खुलवा दिया था। इसके बाद आरोपियों ने उसके खाते में 5,51,000 रुपये मंगवाकर निकलवा लिए थे। ब्रजेश के अधिवक्ता ने न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की। निर्दोष बताते हुए जमानत पर रिहा किए जाने का तर्क दिया। विशेष लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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आरोपी ब्रजेश उर्फ वीरेश के पिता मुंशीलाल कोषागार में दफ्तरी के पद पर तैनात थे। वर्ष 2009 से 2016 के दौरान कोषागार में लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मुंशीलाल ने ही अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी धन (पेंशन घोटाले का पैसा) अवैध रूप से पीड़ित के खाते में भिजवाया और बाद में इन लोगों ने उसे पार कर दिया था। इसके बाद शंकरलाल को कोषागार से रिकवरी नोटिस जारी किया गया था तब शंकरलाल को धोखाधड़ी के बारे में पता चला था। आपत्ति और नाराजगी जताने पर आरोपियों ने लात-घूसों से पिटाई कर जातिसूचक गालियां भी दी थीं।