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Hardoi News: 10 साल पहले दान में मिली अल्ट्रासाउंड मशीन का सात साल से इस्तेमाल नहीं
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फोटो-18- कछौना सामुदायिक स्वास्थ केंद्र पर घूल खा रही अल्टा साउंड मशीन। संवाद
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कछौना। कछौना सीएचसी को 10 साल पहले दान में मिली अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले छह साल से शो पीस बनकर रह गई है। सीएचसी में कवर से ढकी रखी अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती पिछले सात साल में नहीं हो सकी। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जिम्मेदारों की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कछौना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को वर्ष 2016 में एचसीएल फाउंडेशन ने अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई थी। इसके पीछे मंशा यह थी कि अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों को खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट सेंटरों में न जाना पड़े। निशुल्क सुविधा का लाभ भी मरीजों को मिलने लगा था।
वर्ष 2019 तक यहां तैनात रहीं डॉ. पूनम गुप्ता मरीजों के अल्ट्रासाउंड करती थीं। वर्ष 2019 में उनका तबादला हो गया। तब से यहां रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई। ऐसे में अल्ट्रासाउंड मशीन को ढककर सीएचसी के एक कमरे के कोने में रख दिया गया। सात साल होने को हैं लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड मशीन का इस्तेमाल फिर से शुरू नहीं हो सका।
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प्राइवेट संस्थान को हर माह औसतन 250 अल्ट्रासाउंड का भुगतान
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस के रूप में माह में चार बार अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को बुलाया जाता है। इस दौरान लगभग 250 महिलाओं का अल्ट्रासाउंड होता है। राहत भरी बात यह है कि अल्ट्रासाउंड मशीन का संचालन न होने पर भी इसकी सुविधा मुफ्त ही मरीजों को मिल रही है। सीएचसी ने प्राइवेट क्षेत्र के एक अल्ट्रासाउंड सेंटर से इसके लिए अनुबंध किया है। हर माह 250 अल्ट्रासाउंड का भुगतान संबंधित सेंटर को कर दिया जाता है। महत्वपूर्ण यह है कि जितना भुगतान किया जाता है उससे कम में ही रडियोलॉजिस्ट की तैनाती भी हो सकती है।
एमएलसी भी न करा पाए व्यवस्था में सुधार
विधान परिषद की याचिका समिति के सभापति अशोक अग्रवाल ने कई बार सीएचसी का निरीक्षण किया। हर बार अल्ट्रासाउंड मशीन होने और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने की बात उनके संज्ञान में लाई गई। उन्होंने इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों से पत्राचार भी किया लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। हालांकि अब भी उनका दावा है कि व्यवस्था में सुधार की कोशिश हो रही है।
अल्ट्रासाउंड मशीन को सुरक्षित रखवा दिया गया है। रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है लेकिन तैनाती नहीं हो सकी है। पूरा मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी है। -डॉ. शैलेंद्र शुक्ला,
सीएचसी अधीक्षक, कछौना
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कछौना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को वर्ष 2016 में एचसीएल फाउंडेशन ने अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई थी। इसके पीछे मंशा यह थी कि अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों को खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट सेंटरों में न जाना पड़े। निशुल्क सुविधा का लाभ भी मरीजों को मिलने लगा था।
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वर्ष 2019 तक यहां तैनात रहीं डॉ. पूनम गुप्ता मरीजों के अल्ट्रासाउंड करती थीं। वर्ष 2019 में उनका तबादला हो गया। तब से यहां रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई। ऐसे में अल्ट्रासाउंड मशीन को ढककर सीएचसी के एक कमरे के कोने में रख दिया गया। सात साल होने को हैं लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड मशीन का इस्तेमाल फिर से शुरू नहीं हो सका।
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प्राइवेट संस्थान को हर माह औसतन 250 अल्ट्रासाउंड का भुगतान
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस के रूप में माह में चार बार अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को बुलाया जाता है। इस दौरान लगभग 250 महिलाओं का अल्ट्रासाउंड होता है। राहत भरी बात यह है कि अल्ट्रासाउंड मशीन का संचालन न होने पर भी इसकी सुविधा मुफ्त ही मरीजों को मिल रही है। सीएचसी ने प्राइवेट क्षेत्र के एक अल्ट्रासाउंड सेंटर से इसके लिए अनुबंध किया है। हर माह 250 अल्ट्रासाउंड का भुगतान संबंधित सेंटर को कर दिया जाता है। महत्वपूर्ण यह है कि जितना भुगतान किया जाता है उससे कम में ही रडियोलॉजिस्ट की तैनाती भी हो सकती है।
एमएलसी भी न करा पाए व्यवस्था में सुधार
विधान परिषद की याचिका समिति के सभापति अशोक अग्रवाल ने कई बार सीएचसी का निरीक्षण किया। हर बार अल्ट्रासाउंड मशीन होने और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने की बात उनके संज्ञान में लाई गई। उन्होंने इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों से पत्राचार भी किया लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। हालांकि अब भी उनका दावा है कि व्यवस्था में सुधार की कोशिश हो रही है।
अल्ट्रासाउंड मशीन को सुरक्षित रखवा दिया गया है। रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है लेकिन तैनाती नहीं हो सकी है। पूरा मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी है। -डॉ. शैलेंद्र शुक्ला,
सीएचसी अधीक्षक, कछौना