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Hathras News: खूनी संघर्ष मामले में चारों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
Tue, 18 Aug 2026 01:45 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 18 Aug 2026 01:45 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
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सादाबाद कोतवाली के गांव कुकटई में भूमि विवाद और पुलिया निर्माण पर हुए खूनी संघर्ष और फायरिंग के मामले में सत्र न्यायालय ने चार अभियुक्तों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
30 मार्च 2026 को हुए विवाद के बाद कुकटई निवासी बंटी कुमार ने सचिन, मुकेश, अजय व पंकज सहित सात के खिलाफ जानलेवा हमले, मारपीट व धमकाने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बंटी का आरोप था कि हमले में उनके पक्ष से 10 से अधिक लोग घायल हो गए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार चिकित्सकीय परीक्षण और एक्स-रे रिपोर्ट में कई घायलों के शरीर में छर्रे और गंभीर चोटें पाई गईं।
डॉक्टरों के अनुसार यदि छर्रे और अंदर तक जाते, तो चोटें जानलेवा साबित हो सकती थीं। इसके अलावा, आरोपी अजय के खिलाफ पहले से भी अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं। जमानत के लिए आरोरी सचिन व मुकेश तथा अजय व पंकज दो अलग-अलग प्रार्थना पत्र दाखिल किए गए थे। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली का बारीकी से अवलोकन करने के बाद पाया कि अपराध की प्रकृति बेहद गंभीर है और अभियुक्तों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पुख्ता साक्ष्य मौजूद हैं। इन सभी परिस्थितियों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए सत्र न्यायाधीश ने चारों के जमानत प्रार्थना पत्रों को खारिज कर दिया है।
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30 मार्च 2026 को हुए विवाद के बाद कुकटई निवासी बंटी कुमार ने सचिन, मुकेश, अजय व पंकज सहित सात के खिलाफ जानलेवा हमले, मारपीट व धमकाने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बंटी का आरोप था कि हमले में उनके पक्ष से 10 से अधिक लोग घायल हो गए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार चिकित्सकीय परीक्षण और एक्स-रे रिपोर्ट में कई घायलों के शरीर में छर्रे और गंभीर चोटें पाई गईं।
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डॉक्टरों के अनुसार यदि छर्रे और अंदर तक जाते, तो चोटें जानलेवा साबित हो सकती थीं। इसके अलावा, आरोपी अजय के खिलाफ पहले से भी अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं। जमानत के लिए आरोरी सचिन व मुकेश तथा अजय व पंकज दो अलग-अलग प्रार्थना पत्र दाखिल किए गए थे। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली का बारीकी से अवलोकन करने के बाद पाया कि अपराध की प्रकृति बेहद गंभीर है और अभियुक्तों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पुख्ता साक्ष्य मौजूद हैं। इन सभी परिस्थितियों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए सत्र न्यायाधीश ने चारों के जमानत प्रार्थना पत्रों को खारिज कर दिया है।
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