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Hathras News: गैंगवार में शामिल दो अभियुक्तों की जमानत याचिका खारिज
Wed, 05 Aug 2026 02:30 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Wed, 05 Aug 2026 02:30 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
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सत्र न्यायाधीश विनय कुमार तृतीय के न्यायालय ने गैंगवार को दो आरोपी हेमू ठाकुर व शानू की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया है। हेमू ने पुलिस को चकमा देते हुए न्यायालय में सरेंडर किया था, जबकि शानू को पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया था।
18 जून 2026 की शाम हाथरस बाईपास रोड पर कैलाश ढाबा और हतीसा पुल के पास दो गुटों में जमकर फायरिंग हुई थी। घटना के बाद शातिर फरार हो गए थे। सड़क पर सरेआम गोलियों की तड़तड़ाहट से वाहन चालकों और राहगीरों में अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। तीन जुलाई को मोना ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने चार जुलाई की रात को शानू निवासी गंगचौली को दयानतपुर नहर के पास से मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था।
दोनों पैरों में गोली लगने से वह घायल हो गया था। पुलिस एनकाउंटर के डर से हेमू ठाकुर ने आगरा न्यायालय में सरेंडर कर दिया था। पुलिस ने 16 जुलाई को हेमू को रिमांड पर लिया था और उससे घटना में प्रयुक्त तमंचा बरामद किया था। तब से दोनों जेल में बंद हैं। रिहा होने के लिए दोनों की ओर से सेशन न्यायालय में जमानत याचिका डाली गई थी।
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अभियुक्तों के वकीलों ने उन्हें निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने का दावा किया। सरकारी वकील ने अभियुक्तों के दावों का विरोध किया और पत्रावलियों पर मौजूद बयानों का हवाला देते हुए कहा कि सीधी फायरिंग से आम जनता की जान खतरे में पड़ी थी। दोनों के आपराधिक इतिहास का भी जिक्र किया गया। मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने हेमू ठाकुर उर्फ सचिन और शौर्य प्रताप उर्फ शानू की जमानत अर्जियों को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है।
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18 जून 2026 की शाम हाथरस बाईपास रोड पर कैलाश ढाबा और हतीसा पुल के पास दो गुटों में जमकर फायरिंग हुई थी। घटना के बाद शातिर फरार हो गए थे। सड़क पर सरेआम गोलियों की तड़तड़ाहट से वाहन चालकों और राहगीरों में अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। तीन जुलाई को मोना ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने चार जुलाई की रात को शानू निवासी गंगचौली को दयानतपुर नहर के पास से मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था।
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दोनों पैरों में गोली लगने से वह घायल हो गया था। पुलिस एनकाउंटर के डर से हेमू ठाकुर ने आगरा न्यायालय में सरेंडर कर दिया था। पुलिस ने 16 जुलाई को हेमू को रिमांड पर लिया था और उससे घटना में प्रयुक्त तमंचा बरामद किया था। तब से दोनों जेल में बंद हैं। रिहा होने के लिए दोनों की ओर से सेशन न्यायालय में जमानत याचिका डाली गई थी।
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अभियुक्तों के वकीलों ने उन्हें निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने का दावा किया। सरकारी वकील ने अभियुक्तों के दावों का विरोध किया और पत्रावलियों पर मौजूद बयानों का हवाला देते हुए कहा कि सीधी फायरिंग से आम जनता की जान खतरे में पड़ी थी। दोनों के आपराधिक इतिहास का भी जिक्र किया गया। मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने हेमू ठाकुर उर्फ सचिन और शौर्य प्रताप उर्फ शानू की जमानत अर्जियों को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है।