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Hathras News: सासनी में 30 बीघा जमीन के विवाद में भाई की हत्या
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 21 Mar 2026 02:16 AM IST
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घटना के बाद मौके पर लगी भीड़। संवाद
- फोटो : Samvad
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गांव सीकुर में शुक्रवार की दोपहर 30 बीघा जमीन के विवाद में भीमसेन(45) की उनके दो भाइयों व भतीजे ने लाठी डंडों, फावड़े और दराती से पीटकर हत्या कर दी।वह बेटी खुशी (17) के साथ खेत पर चारा लेने गए थे, वहीं उनका अपने भाइयों से विवाद हुआ। घटना में खुशी भी घायल हुई है। आरोपियों के भागने पर बेटी ने शोर मचाया, पुलिस के पहुंचने तक वह लहूलुहान हालत में खेत में ही पड़े रहे।
घटना दोपहर करीब ढाई बजे की है। पुलिस के अनुसार भीमसेन और उनकी बेटी खेत में चारा काट रहे थे, तभी उनके बड़े भाई रवेंद्र, छोटा बाई पूरन और उसका बेटा यशवीर पहुंच गए। इन्होंने भीमसेन से अपने हिस्से की जमीन मांगी। इसी पर इनके बीच कहासुनी हो गई और तीनों ने भीमसेन को पीटना शुरू कर दिया। बचाव में आई खुशी को भी पीटा।
उन्होंने बचकर भागने की कोशिश की लेकिन वह चरी के खेत में गिर गए। इसके बाद आरोपियों ने उनके सिर पर लाठी-डंडे, फावड़े व दराती से कई वार किए, अधमरी हालत में छोड़कर भाग गए। खुशी की चीख-पुकार पर गांव के कुछ लोग मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस लहूलुहान हालत में भीमसेन को सासनी सीएचसी लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके पर सीओ सिटी योगेंद्र कृष्ण नारायण पहुंचे तथा छानबीन की। भीमसेन के बेटे हरकेश की पत्नी वीनेश ने तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
फॉरेंसिक टीम ने की छानबीन
हत्या की जानकारी पर एसओजी, सर्विलांस व फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। घटना स्थल से साक्ष्य एकत्रित किए। खेत में खून व अन्य नमूने एकत्रित किए गए। खूने से सने फावड़ा, बैंत, खून से सना गमछा व दराती का पत्ता भी बरामद किया गया। इस दौरान ग्रामीणों से भी पूछताछ की गई। काफी देर तक पुलिस की छानबीन चलती रही।
भाइयों में जमीनी विवाद चल रहा था, जिसके चलते झगड़ा हुआ। तीनों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।
रामानंद कुशवाहा, एएसपी
पिता ने भीमसेन के नाम कर दी थी जमीन,
भाई लगा रहे धोखे से हड़पने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
सासनी। तीन भाइयों में रविंद्र सबसे बड़े और पूरन सिंह तीसरे नंबर के हैं। कई सालों से दोनों फरीदाबाद में मजदूरी करते हैं। इनके परिवार भी वहीं रहते हैं। जिस जमीन को लेकर इनके बीच विवाद है,उसे इनके पिता ने भीमसेन के नाम कर दिया था। अन्य दो भाई उस पर जमीन हड़पने का आरोप लगा रहे हैं और अपना हिस्सा मांग रहे हैं।
कुछ महीनों से पूरन की पत्नी जमीन विवाद के चलते गांव में रहने लगी थीं। गांव में केवल भीमसेन का परिवार रहता है। भीमसेन का बेटा हरकेश भी बाहर नौकरी करता है। ग्रामीणों और पुलिस के अनुसार करीब दो साल पहले भीमसेन के पिता वीरेंद्र सिंह ने 30 बीघा जमीन उसके नाम कर दी थी। इस घटना के एक महीने बाद ही वीरेंद्र सिंह की मौत हो गई थी। इस बीच भीमसेन ने दाखिल खारिज भी करा लिया था। पिता की मौत के बाद भाइयों ने लेखपाल से जब जमीन के बारे में पता किया तो उन्हें इस बारे में पता चला। भाइयों का आरोप था कि धोखे से जमीन नाम कराई है। वे पिता की मौत को भी संदिग्ध मान रहे थे।
तभी से भाइयों के बीच विवाद शुरू हो गया। भाइयों ने अपने हिस्से की जमीन मांगी, लेकिन भीमसेन का कहना था कि पिता की इच्छा थी कि जमीन उनके पास रहे और कोई बेचे नहीं। भाइयों के बीच विवाद बढ़ता चला गया। तहसील व न्यायालय तक यह विवाद पहुंच गया। जानकारी के अनुसार भाइयों ने वसीयत खारिज करने की अपील कर रखी है, जो कि विचाराधीन है।
कई बार हुआ था विवाद
ग्रामीणों ने बताया कि दोनों भाइयों में कई बार झगड़ा हुआ था। एक बार जमीन जोतने को लेकर भाइयों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। मामला पुलिस तक पहुंच गया था। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ शांतिभंग में कार्रवाई की थी।
मृतक की पत्नी का हो चुका है देहांत
हत्या की जानकारी पर घर आए मृतक के रिश्तेदारों ने बताया कि भीमसेन की पत्नी की मृत्यु करीब 10 साल पहले हो चुकी है, तब से बच्चों की जिम्मेदारी खुद ही संभाल रहे थे। उन्होंने अकेले बड़ी बेटी शीतल एवं बेटे हरकेश की शादी की। वे पुत्रवधु व छोटी बेटी के साथ गांव में रह रहे थे। बेटा हरकेश बाहर नौकरी करता है। देर शाम तक वह गांव नहीं आ सका था।
हमलावरों के सिर पर था खून सवार...बोलीं बेटी
आंखों के सामने पिता की हत्या के बाद से वर्षा बदहवास है। रह-रह कर पिता को याद कर रही है। भाभी से लिपटकर उसका रोना बंद नहीं है। रोते हुए वर्षा ने कहा कि उसने पिता को बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकी। हमलावरों पर खून सवार था। इसलिए जब वह बीच में आई तो उस पर भी डंडे बरसा दिए।
त्रयोदशी में एकत्रित हुआ था परिवार
गांव में परिवार की वृद्ध महिला की मौत हो गई थी। बृहस्पतिवार को त्रयोदशी कार्यक्रम था। रविंद्र व पूरन इसी के चलते गांव आए थे। शुक्रवार को वे अचानक खेत पर पहुंच गए और घटना को अंजाम दे डाला।
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घटना दोपहर करीब ढाई बजे की है। पुलिस के अनुसार भीमसेन और उनकी बेटी खेत में चारा काट रहे थे, तभी उनके बड़े भाई रवेंद्र, छोटा बाई पूरन और उसका बेटा यशवीर पहुंच गए। इन्होंने भीमसेन से अपने हिस्से की जमीन मांगी। इसी पर इनके बीच कहासुनी हो गई और तीनों ने भीमसेन को पीटना शुरू कर दिया। बचाव में आई खुशी को भी पीटा।
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उन्होंने बचकर भागने की कोशिश की लेकिन वह चरी के खेत में गिर गए। इसके बाद आरोपियों ने उनके सिर पर लाठी-डंडे, फावड़े व दराती से कई वार किए, अधमरी हालत में छोड़कर भाग गए। खुशी की चीख-पुकार पर गांव के कुछ लोग मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस लहूलुहान हालत में भीमसेन को सासनी सीएचसी लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके पर सीओ सिटी योगेंद्र कृष्ण नारायण पहुंचे तथा छानबीन की। भीमसेन के बेटे हरकेश की पत्नी वीनेश ने तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
फॉरेंसिक टीम ने की छानबीन
हत्या की जानकारी पर एसओजी, सर्विलांस व फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। घटना स्थल से साक्ष्य एकत्रित किए। खेत में खून व अन्य नमूने एकत्रित किए गए। खूने से सने फावड़ा, बैंत, खून से सना गमछा व दराती का पत्ता भी बरामद किया गया। इस दौरान ग्रामीणों से भी पूछताछ की गई। काफी देर तक पुलिस की छानबीन चलती रही।
भाइयों में जमीनी विवाद चल रहा था, जिसके चलते झगड़ा हुआ। तीनों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।
रामानंद कुशवाहा, एएसपी
पिता ने भीमसेन के नाम कर दी थी जमीन,
भाई लगा रहे धोखे से हड़पने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
सासनी। तीन भाइयों में रविंद्र सबसे बड़े और पूरन सिंह तीसरे नंबर के हैं। कई सालों से दोनों फरीदाबाद में मजदूरी करते हैं। इनके परिवार भी वहीं रहते हैं। जिस जमीन को लेकर इनके बीच विवाद है,उसे इनके पिता ने भीमसेन के नाम कर दिया था। अन्य दो भाई उस पर जमीन हड़पने का आरोप लगा रहे हैं और अपना हिस्सा मांग रहे हैं।
कुछ महीनों से पूरन की पत्नी जमीन विवाद के चलते गांव में रहने लगी थीं। गांव में केवल भीमसेन का परिवार रहता है। भीमसेन का बेटा हरकेश भी बाहर नौकरी करता है। ग्रामीणों और पुलिस के अनुसार करीब दो साल पहले भीमसेन के पिता वीरेंद्र सिंह ने 30 बीघा जमीन उसके नाम कर दी थी। इस घटना के एक महीने बाद ही वीरेंद्र सिंह की मौत हो गई थी। इस बीच भीमसेन ने दाखिल खारिज भी करा लिया था। पिता की मौत के बाद भाइयों ने लेखपाल से जब जमीन के बारे में पता किया तो उन्हें इस बारे में पता चला। भाइयों का आरोप था कि धोखे से जमीन नाम कराई है। वे पिता की मौत को भी संदिग्ध मान रहे थे।
तभी से भाइयों के बीच विवाद शुरू हो गया। भाइयों ने अपने हिस्से की जमीन मांगी, लेकिन भीमसेन का कहना था कि पिता की इच्छा थी कि जमीन उनके पास रहे और कोई बेचे नहीं। भाइयों के बीच विवाद बढ़ता चला गया। तहसील व न्यायालय तक यह विवाद पहुंच गया। जानकारी के अनुसार भाइयों ने वसीयत खारिज करने की अपील कर रखी है, जो कि विचाराधीन है।
कई बार हुआ था विवाद
ग्रामीणों ने बताया कि दोनों भाइयों में कई बार झगड़ा हुआ था। एक बार जमीन जोतने को लेकर भाइयों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। मामला पुलिस तक पहुंच गया था। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ शांतिभंग में कार्रवाई की थी।
मृतक की पत्नी का हो चुका है देहांत
हत्या की जानकारी पर घर आए मृतक के रिश्तेदारों ने बताया कि भीमसेन की पत्नी की मृत्यु करीब 10 साल पहले हो चुकी है, तब से बच्चों की जिम्मेदारी खुद ही संभाल रहे थे। उन्होंने अकेले बड़ी बेटी शीतल एवं बेटे हरकेश की शादी की। वे पुत्रवधु व छोटी बेटी के साथ गांव में रह रहे थे। बेटा हरकेश बाहर नौकरी करता है। देर शाम तक वह गांव नहीं आ सका था।
हमलावरों के सिर पर था खून सवार...बोलीं बेटी
आंखों के सामने पिता की हत्या के बाद से वर्षा बदहवास है। रह-रह कर पिता को याद कर रही है। भाभी से लिपटकर उसका रोना बंद नहीं है। रोते हुए वर्षा ने कहा कि उसने पिता को बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकी। हमलावरों पर खून सवार था। इसलिए जब वह बीच में आई तो उस पर भी डंडे बरसा दिए।
त्रयोदशी में एकत्रित हुआ था परिवार
गांव में परिवार की वृद्ध महिला की मौत हो गई थी। बृहस्पतिवार को त्रयोदशी कार्यक्रम था। रविंद्र व पूरन इसी के चलते गांव आए थे। शुक्रवार को वे अचानक खेत पर पहुंच गए और घटना को अंजाम दे डाला।