Hathras: आरोग्य मंदिर है बदहाल, यहां उपचार तो दूर रास्ता भी खराब, आसपास गंदगी का अंबार और सुविधाएं भी नहीं
आरोग्य मंदिर तक पहुंचने का मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। ऊबड़-खाबड़ और कीचड़युक्त रास्ते के कारण मरीजों विशेषकर गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को केंद्र तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है। बारिश के दिनों में तो यह रास्ता चलने लायक भी नहीं बचता।
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सरकार एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर पहुंचाने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना पर करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन चंदपा क्षेत्र के गांव मीतई स्थित आयुषमान आरोग्य मंदिर की बदहाली उसकी मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। यहां मरीजों को उपचार मिलना तो दूर की बात है, यहां तक पहुंचने का रास्ता ही खराब पड़ा है।
नगर पालिका क्षेत्र का हिस्सा बनने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि ग्राम पंचायत का बुनियादी ढांचा सुधरेगा, लेकिन हालात इसके उलट हैं। आरोग्य मंदिर तक पहुंचने का मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। ऊबड़-खाबड़ और कीचड़युक्त रास्ते के कारण मरीजों विशेषकर गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को केंद्र तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है। बारिश के दिनों में तो यह रास्ता चलने लायक भी नहीं बचता। आरोग्य मंदिर के चारों ओर गंदगी का अंबार है। जलभराव और झाड़ियों के कारण आए दिन परिसर में जहरीले कीड़े निकलते रहते हैं, जिससे हर समय खतरा बना रहता है।
एक ही कमरे का स्वास्थ्य केंद्र हैं, जहां केवल एक सीएचओ की तैनाती है। सर्दी-जुकाम जैसी आम समस्या में ही परामर्श मिल पाता है। अन्य सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है।-वेदप्रकाश शर्मा, मीतई
स्वास्थ्य सेवाएं केवल नाम की हैं, केंद्र का जीर्णोद्धार तक नहीं हुआ। आसपास झाड़ियां हैं और रास्ता साफ नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना ही चुनौतीपूर्ण होता है। दोपहर दो बजे के बाद मीतई में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं हैं।-सुधीर निवासी मीतई
जिन स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने के रास्ते खराब हैं, उन्हें ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए संबंधित विभागों से संपर्क किया जा रहा है। आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य संबंधी समुचित व्यवस्थाएं हैं।-डा. राजीव रॉय, सीएमओ
मीतई नगर पालिका की सीमा में शामिल हो चुका है। जलभराव व गंदगी की समस्या को जल्द दूर कराया जाएगा।-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद हाथरस।
न पानी, न शौचालय की सुविधा
हैरानी की बात यह है कि एक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद यहां पीने के पानी और शौचालय जैसी अनिवार्य सुविधाओं का अभाव है। केंद्र पर प्रतिदिन 20 से 25 महिलाएं उपचार के लिए आती हैं, जिन्हें पानी के लिए अपने घर से बोतलें साथ लानी पड़ती हैं। शौचालय की सुविधा न होना उनके लिए सबसे बड़ी समस्या है।
एक सीएचओ से चल रहा केंद्र
स्वास्थ्य विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है, इसलिए एएनएम को ही छह-छह माह का प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें सीएचओ बना दिया गया है। यहां एकमात्र सीएचओ अंजली दीक्षित तैनात हैं। वह ही केंद्र खोलती व बंद करती हैं। परामर्श व दवाएं देने का काम भी इन्हीं का है। इस कारण भी मरीजों को समस्या का सामना करना पड़ता है।
