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Hathras: अमृत 2.0 योजना पर करोड़ों खर्च, पानी की शक्ल में पी रहे 'जहर', शरीर बन रहा बीमारियों का घर

प्रशांत भारती, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Tue, 31 Mar 2026 11:26 AM IST
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सार

तकनीकी मानकों के अनुसार पेयजल के लिए टीडीएस की मात्रा 500 से कम होनी चाहिए, लेकिन सादाबाद में 18 प्रस्तावित नलकूपों के लिए जहां भी बोरिंग की जांच हो रही है, वहां टीडीएस का स्तर 1800-2000 के पार मिल रहा है। 

Contaminated underground water in Saadabad Hathras
सादाबाद क्षेत्र में खोदी गई पाइप लाइन - फोटो : संवाद
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विस्तार

सादाबाद में एक तरफ अमृत 2.0 योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर घर-घर पानी पहुंचाने का सपना दिखाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ हकीकत यह है कि जमीन के नीचे का पानी जहर के समान हो चुका है। यहां के बाशिंदे 2000 टीडीएस वाला पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे उनका शरीर गंभीर बीमारियों का घर बन रहा है। यह स्थिति जल निगम की जांच में सामने आई है।

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नगर पंचायत में 43.19 करोड़ रुपये की पेयजल कार्ययोजना तैयार की गई है, लेकिन इसे जमीन पर उतारना नामुमकिन लग रहा है। तकनीकी मानकों के अनुसार पेयजल के लिए टीडीएस की मात्रा 500 से कम होनी चाहिए, लेकिन सादाबाद में 18 प्रस्तावित नलकूपों के लिए जहां भी बोरिंग की जांच हो रही है, वहां टीडीएस का स्तर 1800-2000 के पार मिल रहा है। इस कारण जल निगम नलकूप लगाने के लिए सही स्थान का चिह्नांकन नहीं कर पा रहा है। इधर, सादाबाद शहरी क्षेत्र के बाशिंदे पिछले कई साल से अधिक मात्रा में टीडीएस वाला पानी पीने को मजबूर हैं।

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लंबे समय तक 2000 टीडीएस वाला पानी पीने से पथरी, पेट की बीमारियां, जोड़ों में दर्द और बालों के झड़ने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। अधिक टीडीएस वाले पानी को पीने से बचना चाहिए। इन बीमारियों के साथ साथ शारीरिक कई अन्य बीमारियां भी शुरू हो जाती हैं। अगर कोई व्यक्ति 2000 टीडीएस का पानी लगातार पी रहा है तो यह शरीर के लिए बेहद खतरनाक है।-डॉ. भरत यादव, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट।

पीने के पानी का स्वाद तो खराब है ही, अब तो यह डर लगता है कि कहीं बीमार न पड़ जाएं। मजबूरी में हमें बाहर से पानी के कैंपर मंगवाने पड़ते हैं, जिससे घर के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। प्रशासन को जल्द ही शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करनी चाहिए।-सुरेंद्र पाराशर, एडवोकेट, सादाबाद।
पिछले काफी समय से पानी में टीडीएस की मात्रा बढ़ी हुई है। पानी इतना भारी और खारा है कि उसे बिना फिल्टर किए पीना नामुमकिन है। जिनके पास आरओ मशीन नहीं है, उनके पास धीमा जहर पीने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।-अशोक वर्मा, गली राममंदिर, सादाबाद।
पानी की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। जांच में पानी में 2000 टीडीएस आ रहा है। नलकूप के लिए भूमि चिह्नित की जा रही है। बोरिंग की तलाश की जा रही है।-सुनील कुमार, अधिशासी अभियंता, जल निगम शहरी।

एक नजर में 

  • ओवरहेड टैंक : कुल 4 नए टैंकों में से 2 का निर्माण 80 प्रतिशत तक पूरा हुआ।
  • ट्यूबवेल : प्रस्तावित 20 ट्यूबवेलों में से 2 पर 50 प्रतिशत कार्य हुआ।
  • स्टाफ क्वार्टर: 3 में से एक क्वार्टर का 90 प्रतिशत निर्माण पूर्ण है।
  • पंप हाउस: 20 पंप हाउसों और सीडब्ल्यूआर के निर्माण की प्रक्रिया भी पाइपलाइन में है।
  • लक्ष्य - जून 2026 तक पूरा किया जाना है प्रोजेक्ट


यह भी जानें

  • वर्तमान टीडीएस स्तर - 2000 मिलीग्राम प्रति लीटर
  • मानक टीडीएस स्तर 300 - 500 मिलीग्राम प्रति लीटर
  • नगर पंचायत सादाबाद की आबादी - लगभग 55 हजार।
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