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Hathras News: बारिश और अंधड़ से फसलें तबाह, किसानों के अरमानों पर फिरा पानी
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बारिश में बिसावर क्षेत्र में भीगी गेहूं की कटी फसल। संवाद
- फोटो : Samvad
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क्षेत्र में मौसम के बदले मिजाज और तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है, जो फसलें कुछ दिन पहले लहलहा रही थीं, वे अब खेतों में बिछ गई हैं। आलू, गेहूं और सरसों की फसलों को हुए नुकसान ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
क्षेत्र में अभी लगभग 20 प्रतिशत आलू की खुदाई शेष थी। बारिश के कारण खेतों में जलभराव और नमी बढ़ गई है, जिससे जमीन के अंदर आलू सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। बटाई पर खेती करने वाले किसानों के लिए स्थिति चिंताजनक है।
सिर्फ आलू ही नहीं, बल्कि कटाई की ओर बढ़ रही गेहूं की फसल भी तेज हवाओं के कारण खेतों में बिछ गई है। फसल गिरने से दानों की गुणवत्ता खराब हो जाएगी और उत्पादन में गिरावट आएगी।भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों ने अब प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने राजस्व विभाग की टीम से नुकसान का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को उचित आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है।
दस बीघा खेत बटाई पर लेकर आलू बोया था। प्रति बीघा 25 हजार रुपये की लागत आई है। अब तो लागत निकलना भी मुश्किल लग रहा है। अगर पानी नहीं सूखा तो सब बर्बाद हो जाएगा।
महावीर सिंह, किसान (नगला गुलर)
30 बीघा में गेहूं और आलू किया था।पहले ही पैदावार कम थी, अब मौसम की मार ने सब छीन लिया। प्रशासन को तुरंत सुध लेनी चाहिए।
शिवराज सिंह (किसान, नगला गुलर)
वे मौसम बरसात हो रही है जिसके कारण को भारी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल में गिरावट आ जाएगी। सरसों पककर तैयार खड़ी हुई है उसका दाना धूप निकलते ही चटकने लग जाएगा।
गोविंद, हाथरस जंक्शन।
बारिश पड़ने के कारण भारी नुकसान हुआ है। गेहूं पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं जिससे गेहूं की फसल पूरी तरह गिर गई है इसमें दाना भी हल्का होगा।
रामू गांव मौहारी।
एक नजर में कृषि व फसलवार क्षेत्रफल
1.48 लाख हेक्टेयर जिले में कृषि भूमि -
75 हजार हेक्टेयर है लगभग गेहूं का रकबा--
52 हजार हेक्टेयर में हुई है आलू की पैदावार
35 हजार हेक्टेयर में बोई गई थी सरसो
सभी तहसीलों के अधिकारियों को बारिश में फसल के नुकसान के संबंध में निर्देश दिए हैं, जहां से भी किसान सूचना दे रहे हैं वहां टीमें भेजी जा रही हैं।
एडीएम वित्त, एवं राजस्व।
बारिश ने फिलहाल सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा है। सरसों में पककर तैयार हो गई, तापमान बढे़गा तो दाना चटक गया। कुछ खेतों में गेहूं भी कटकर पडे़ हुए हैं और जिन किसानों ने हाल फिलहाल पानी में लगाया है, उनकी फसल प्रभावित हो सकती है।
डॉ. अख्तर हुसैन वारसी, प्रभारी , कृषि विज्ञान केंद्र
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क्षेत्र में अभी लगभग 20 प्रतिशत आलू की खुदाई शेष थी। बारिश के कारण खेतों में जलभराव और नमी बढ़ गई है, जिससे जमीन के अंदर आलू सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। बटाई पर खेती करने वाले किसानों के लिए स्थिति चिंताजनक है।
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सिर्फ आलू ही नहीं, बल्कि कटाई की ओर बढ़ रही गेहूं की फसल भी तेज हवाओं के कारण खेतों में बिछ गई है। फसल गिरने से दानों की गुणवत्ता खराब हो जाएगी और उत्पादन में गिरावट आएगी।भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों ने अब प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने राजस्व विभाग की टीम से नुकसान का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को उचित आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है।
दस बीघा खेत बटाई पर लेकर आलू बोया था। प्रति बीघा 25 हजार रुपये की लागत आई है। अब तो लागत निकलना भी मुश्किल लग रहा है। अगर पानी नहीं सूखा तो सब बर्बाद हो जाएगा।
महावीर सिंह, किसान (नगला गुलर)
30 बीघा में गेहूं और आलू किया था।पहले ही पैदावार कम थी, अब मौसम की मार ने सब छीन लिया। प्रशासन को तुरंत सुध लेनी चाहिए।
शिवराज सिंह (किसान, नगला गुलर)
वे मौसम बरसात हो रही है जिसके कारण को भारी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल में गिरावट आ जाएगी। सरसों पककर तैयार खड़ी हुई है उसका दाना धूप निकलते ही चटकने लग जाएगा।
गोविंद, हाथरस जंक्शन।
बारिश पड़ने के कारण भारी नुकसान हुआ है। गेहूं पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं जिससे गेहूं की फसल पूरी तरह गिर गई है इसमें दाना भी हल्का होगा।
रामू गांव मौहारी।
एक नजर में कृषि व फसलवार क्षेत्रफल
1.48 लाख हेक्टेयर जिले में कृषि भूमि -
75 हजार हेक्टेयर है लगभग गेहूं का रकबा
52 हजार हेक्टेयर में हुई है आलू की पैदावार
35 हजार हेक्टेयर में बोई गई थी सरसो
सभी तहसीलों के अधिकारियों को बारिश में फसल के नुकसान के संबंध में निर्देश दिए हैं, जहां से भी किसान सूचना दे रहे हैं वहां टीमें भेजी जा रही हैं।
एडीएम वित्त, एवं राजस्व।
बारिश ने फिलहाल सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा है। सरसों में पककर तैयार हो गई, तापमान बढे़गा तो दाना चटक गया। कुछ खेतों में गेहूं भी कटकर पडे़ हुए हैं और जिन किसानों ने हाल फिलहाल पानी में लगाया है, उनकी फसल प्रभावित हो सकती है।
डॉ. अख्तर हुसैन वारसी, प्रभारी , कृषि विज्ञान केंद्र