Drinking water crisis: पुरानी टंकियां ढहा दीं, नई बनवाईं नहीं, पानी के लिए जूझेंगे 12 गांव के 22 हजार ग्रामीण
कई बार दूर-दराज से पानी लाना मजबूरी बन जाती है, जिससे खासतौर पर महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी होती है। प्रशासन द्वारा पेयजल व्यवस्था सुधारने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है।
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हाथरस जिले के ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट एक बार फिर गहराने लगा है। कई गांवों में पुरानी टंकियों को तोड़ दिया गया है, लेकिन नई टंकियों के निर्माण का अब तक कोई अता-पता नहीं है। ऐसे में इस भीषण गर्मी में करीब 12 गांवों की 22 हजार से अधिक आबादी को एक बार फिर पेयजल के लिए जूझना पड़ेगा।
सादाबाद, सहपऊ और सासनी क्षेत्र के कई गांवों में वर्षों से जलापूर्ति की व्यवस्था ठप पड़ी है। कहीं टंकियां जर्जर होकर बंद पड़ी हैं तो कहीं उन्हें ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन उनके स्थान पर नई टंकियों का निर्माण नहीं कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल के लिए उन्हें गिने-चुने हैंडपंपों और आसपास लगे सबमर्सिबल पंपों पर निर्भर रहना पड़ता है।
कई बार दूर-दराज से पानी लाना मजबूरी बन जाती है, जिससे खासतौर पर महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी होती है। प्रशासन द्वारा पेयजल व्यवस्था सुधारने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है। गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की मांग बढ़ती है और इन गांवों में समस्या और विकराल हो जाती है। ग्रामीणों की ओर से लगातार प्रशासन से मांग की जाती रही है कि जल्द से जल्द नई पानी की टंकियों का निर्माण कराया जाए और जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारू किया जाए, ताकि उन्हें इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है।
करीब 15 साल से टंकी में पानी नहीं आ रहा है। यहां तक की टंकी की चहारदीवारी भी टूटी पड़ी है। टंकी खंडहर होती जा रही है, लेकिन अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। गांव में पानी की किल्लत है। सरकार को टंकी की तरफ ध्यान देना चाहिए।-बनवारीलाल दुबे निवासी गांव छौंड़ा।
सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर कर पानी की टंकी तो बनवा दी गई, लेकिन इससे पानी आज तक नहीं मिला, जबकि यह टंकी खंडहर होती जा रही है। ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है। टंकी को शीघ्र ही चालू कराया जाना चाहिए।-ओमदत्त निवासी छौंड़ा।
जिले के करीब 39 गांवों में पेयजल आपूर्ति सुचारू किए जाने के लिए चिह्नांकन कर लिया गया है। प्रवीन इलेक्टि्रकल नामक कंपनी की ओर से 16 जगहों पर पेयजल आपूर्ति सुचारू किए जाने का काम शुरू कर दिया गया है, 23 जगहों पर भी जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा।-मोहित कुमार, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण, हाथरस।
सादाबाद क्षेत्र में करीब 12 हजार की आबादी प्रभावित
सादाबाद क्षेत्र के गांव धाधऊ, नगला चक्की, नगला मुनीम, नगला सेवा, सुल्तानपुर और चौबारा में वर्ष 1985 में बनी पानी की टंकी अब केवल दिखावटी बनकर रह गई है। वर्षों से बंद पड़ी इस टंकी से अब जलापूर्ति नहीं हो रही है, जबकि इन गांव की आबादी करीब 12 हजार है।
सहपऊ के तीन गांवों में भी नहीं मिल रहा पानी
सहपऊ क्षेत्र के गांव दौहई, नगला बैनी और नगला महासुख में भी पानी की टंकियां लंबे समय से बंद पड़ी थीं। इन्हें तोड़ भी दिया गया है, लेकिन नई टंकी बनाने की पहल नहीं की गई है। यहां के करीब चार हजार ग्रामीणों को भी पेयजल के लिए हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
सासनी में भी पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीण
सासनी क्षेत्र के गांव छौंड़ा, गढ़ौआ व मोहरिया में भी टंकियां वर्षों से बंद हैं। यहां के ग्रामीणों को पेयजल के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है। हालत यह हैं कि यहां के करीब छह हजार ग्रामीणों को पेयजल का खुद ही प्रबंध करना पड़ रहा है। यहां के लोगों ने अब टंकी के पानी की आस ही छोड़ दी है।
