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Hathras News: मासूम की तस्करी करने वाले पांच अभियुक्तों को 10 साल की कैद

संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Fri, 01 May 2026 02:01 AM IST
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Five accused of trafficking an innocent child sentenced to 10 years imprisonment
प्रतीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
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अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम महेंद्र कुमार रावत ने 4 साल के मासूम कविश के अपहरण और उसे बेचने की कोशिश करने वाले पांच आरोपियों को 10 साल कैद की सजा सुनाई है। पड़ोसी पति-पत्नी बच्चे को आंध्र प्रदेश ले गए थे। मात्र 1.8 लाख रुपये में बच्चे को बेच दिया गया था, लेकिन पुलिस ने समय रहते बच्चे को बरामद कर लिया था। आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
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घटना 9 मई 2025 की है, जब हाथरस की जागेश्वर कॉलोनी से चार वर्षीय बालक कविश अचानक खेलते समय गायब हो गया था। बच्चे के दादा राजेश गोस्वामी ने अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाली, तो पड़ोस में रहने वाला मोनू पाठक बच्चे का हाथ पकड़कर ले जाता हुआ दिखाई दिया।
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इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस की मदद ली और बच्चे की लोकेशन आंध्र प्रदेश में ट्रैक की। 13 मई को आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा स्थित होटल ताज के कमरा नंबर 103 में छापा मारा। वहां पुलिस को मासूम कविश सकुशल मिल गया। मौके से मोनू पाठक और उसकी पत्नी नेहा पाठक के अलावा मेद्दी पाटला राघवेंद्र और उसकी पत्नी सुब्बालक्ष्मी निवासी रिम्स, कड़प्पा (आंध्र प्रदेश) को गिरफ्तार किया गया था।



पूछताछ में बोडेडा मल्लिकार्जुन राव निवासी गाजूवाका, विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश), मधुरानी शर्मा निवासी छावला, द्वारका नई दिल्ली, राजेश गुप्ता उर्फ उमेश निवासी रोहिणी, सेक्टर 16, दिल्ली व सोनिया मिश्रा निवासी मयूर विहार फेज-1, पांडव नगर, पूर्वी दिल्ली के नाम सामने आए। निरीक्षक गिरीशचंद्र गौतम ने विवेचना के बाद सभी आठों लोगों के खिलाफ धारा 143(4) व धारा 143(5) चार्जशीट दाखिल की।




मामला एडीजे एफटीसी कोर्ट प्रथम में ट्रायल पर पहुंचा। साक्ष्य व गवाहों के आधार पर मोनू पाठक, नेहा पाठक, मेद्दी पाटला राघवेंद्र, बोडेडा मल्लिकार्जुन राव एवं सुब्बालक्ष्मी को धारा 143(4) के अंतर्गत कविश के अपहरण में दोषी सिद्ध किया। पांचों को दस-दस साल की कैद व 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।








एक से अधिक बच्चे के अपहरण में दोष मुक्त

इन पांचों के अलावा दिल्ली से पकड़े गए राजेश, सोनिया व मधुरानी के खिलाफ केवल धारा 143(5)(एक से अधिक बच्चे का अपहरण) के अंंतर्गत चार्जशीट दाखिल की गई थी। पुलिस ने विवेचना में केवल उल्लेख किया था कि दिल्ली से दो और बच्चे बरामद किए गए थे, लेकिन अभियोजन पक्ष इसे साबित नहीं कर पाया। कोर्ट ने इस आरोप में आठों को दोषमुक्त कर दिया। राजेश, सोनिया व मधुरानी पर केवल इसी धारा में आरोप थे।






विवेचक पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

धारा 143 (5) के अंतर्गत ठोस साक्ष्य संकलित नहीं करने के कारण अभियुक्तों को संदेह का लाभ मिल गया। इस पर कोर्ट ने विवेचक पर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों की खरीद-फरोख्त जैसे संवेदनशील मामले में विवेचक ने गंभीरता नहीं दिखाई। उनका ध्यान केवल आरोप पत्र प्रेषित करने पर रहा। जल्दबाजी में साक्ष्य एकत्रित नहीं किए गए। अभियुक्तों के बयान में बड़े स्तर पर रैकेट चलने की जानकारी के बाद भी विवेचना सम्यक रूप से नहीं की गई। सभी अभियुक्तों के नाम नहीं खोले गए। कोर्ट ने यहां तक कहा कि विवेचक जल्दबाजी में या तो अधिक जानकारी जुटाना नहीं चाहते थे या फिर उन्होंने अभियुक्तों को बचाने का प्रयास किया।






मोनू चाचा ट्रेन से दूर ले गए थे

मुकदमे में पुलिस ने नौ गवाह शामिल गए थे। दूसरा गवाह चार साल के कविश को बनाया गया था। कविश ने कोर्ट में मोनू की पहचान की। उसने बताया कि मोनू चाचा रिक्शा, बस व ट्रेन में बैठाकर दूर ले गए थे।
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