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Hathras News: दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात मामले में लापरवाही, हाईकोर्ट ने किया हाथरस सीएमओ को तलब

कमल वार्ष्णेय, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Fri, 13 Mar 2026 01:27 PM IST
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सार

महिला ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि बुआ के बेटे ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। पेट में दर्द होने पर घर वालों को जानकारी हुई। रिपोर्ट के समय पीड़िता पांच माह की गर्भवती थी।

Negligence in the abortion case of physical harassment victim
हाथरस सीएमओ कार्यालय - फोटो : संवाद
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विस्तार

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी दुष्कर्म पीड़िता का गर्भपात करने के मामले में निर्णय लेने के लिए हाथरस सीएमओ ने पैनल गठित नहीं किया। इस अवमानना पर हाईकोर्ट ने सीएमओ को तलब किया। वह बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में पेश हुए, लेकिन वह पैनल में शामिल चिकित्सकों के नाम तक नहीं बता पाए। इसमें हुई देरी से दुष्कर्म पीड़िता का गर्भ साढ़े छह माह का हो गया। सीएमओ ने इस संबंध में कोई रिपोर्ट भी कोर्ट के समक्ष पेश नहीं की। अब उन्हें 18 मार्च तक के लिए अंतिम अवसर दिया गया है। 

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मुरसान कोतवाली में 23 जनवरी को महिला ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि बुआ के बेटे ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। जनवरी में पेट में दर्द होने पर घर वालों को जानकारी हुई। मुकदमे में आरोपी मां को भी नामजद किया था। रिपोर्ट के समय पीड़िता पांच माह की गर्भवती थी। एक तरफ पुलिस की विवेचना शुरू हुई और दूसरी ओर पीड़िता के भविष्य को देखते हुए गर्भपात कराने के लिए हाईकोर्ट में अपील की गई थी। 
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27 फरवरी को इस गंभीर प्रकरण में हाईकोर्ट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पांच प्रतिष्ठित चिकित्सकों का एक बोर्ड बनाने का निर्देश दिए थे, जिसमें प्रसूति एवं स्त्री रोग, नवजात शिशु और मनोरोग विभागों के विशेषज्ञों का होना अनिवार्य था। बोर्ड को पीड़िता की जांच, उसकी मनोस्थिति व माता-पिता से भी बात के आधार पर रिपोर्ट तैयार करनी थी। इस रिपोर्ट को 10 मार्च को हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना था। आदेश वाले दिन ही ई-मेल से सीएमओ कार्यालय को सूचित कर दिया गया था। इसके बाद भी आदेशों की अनदेखी की गई। 

बोर्ड को इन बिंदुओं पर करनी थी जांच

  • गर्भावस्था को पूर्ण अवधि तक जारी रखने से पीड़िता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर बुरा असर पड़ेगा?
  • क्या इस चरण में गर्भपात करना पीड़िता के जीवन के लिए सुरक्षित है?
  • पीड़िता की कम उम्र गर्भपात की प्रक्रिया में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा कर सकती हैं या नहीं।
  • पीड़िता और उसके माता-पिता इस प्रक्रिया के लिए अपनी सहमति दे रहे हैं या नहीं।
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