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Hathras News: पूरे साल नहीं दिया ध्यान, अब कटवाए जा रहे कनेक्शन

संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Wed, 18 Mar 2026 01:50 AM IST
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No attention paid throughout the year; now connections are being disconnected.
शहर की एक कॉलोनी में स्मार्ट मीटर के साथ लगे चेक मीटर। संवाद - फोटो : Samvad
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पूरे साल तो बिजली निगम को उपभोक्ताओं से वसूली करने का ख्याल नहीं आया। अब वित्तीय वर्ष के आखिरी माह में उन पर बकाया वसूली का बोझ डाला जा रहा है। अब करीब 55 करोड़ रुपये के बकाया की वसूली के लिए प्रीपेड उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे जा रहे हैं।
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जिले में कुल 2.77 लाख विद्युत कनेक्शन हैं, जिनमें से 1.34 लाख पर प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 1.31 लाख कनेक्शन पूरी तरह प्रीपेड प्रणाली में परिवर्तित हो चुके हैं। विभाग ने पहले चरण में 3.21 करोड़ रुपये के बकाया पर 9,513 बकायेदारों के कनेक्शन काटे थे। बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद भी इनसे मिलने वाले बकाये की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा है।
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विभाग के अनुसार केवल 20 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने ही अभी तक बकाया राशि जमा कराई है, जबकि बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब भी भुगतान नहीं कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह ज्यादातर उपभोक्ताओं को ऑनलाइन भुगतान प्रणाली की जानकारी नहीं है। ऊर्जावान एप के जरिये आसानी से बिल जमा किया जा सकता है, लेकिन इसके प्रति जागरूकता की कमी बनी हुई है।






उपभोक्ता को नहीं मालूम कितना है बकाया

मीटर प्रीपेड होने के बाद कई उपभोक्ताओं को विद्युत विभाग की ओर से बिल या उससे संबंधित जानकारी नहीं मिल पा रही। उपभोक्ताओं को पता ही नहीं कि उन्हें कितना बिल जमा करना है। बिल जमा करने के बाद उन्हें यह भी पता नहीं चल पा रहा कि उनसे कब तक का बिल लिया गया है।





मोबाइल रिचार्ज से नहीं हो सकती तुलना

उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारी इस व्यवस्था की तुलना मोबाइल रिचार्ज से कर रहे हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है। रिचार्ज में मासिक प्लान होते हैं, जो कि काफी सरल हैं, लेकिन बिजली विभाग की व्यवस्थाएं काफी जटिल हैं। इसकी मोबाइल से तुलना नहीं की जा सकती।






प्रीपेड मीटर की व्यवस्था काफी जटिल है। इसे प्रत्येक उपभोक्ता नहीं समझ सकता। गांव के कई लोगों को मैंने बड़ी मुश्किल से समझाया कि कैसे बिल व बिजली का उपयोग देखना है और कैसे बिल जमा करना है। विभाग को इस व्यवस्था को और सरल बनाना चाहिए, तब ही उपभोक्ताओं के साथ न्याय होगा।
-उपेंद्र कुमार शर्मा निवासी घास की मंडी।







हमें पता नहीं चला कि बिजली वालों ने बिल देना ही बंद कर दिया। घर पर बिना कुछ पूछे ही मीटर भी बदल दिया, पता नहीं कौन-कौन से कागज पर साइन करा लिए। अब बिल कैसे जमा करना है, मुझे पता नहीं। हम मोबाइल भी कीपेड वाला चलाते हैं। बिजली वाले कुछ बताते नहीं, बस कहते हैं कि बकाया जमा करा दो।
-राहुल देशवार निवासी गिजरौली।
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