Accident: काल बन रहीं तेज रफ्तार रोडवेज बसें, छह महीने में 12 हादसे, सात लोगों की मौत और कई हुए घायल
हादसों के पीछे तीन मुख्य कारण सामने आ रहे हैं। पहला रफ्तार, खाली सड़कें मिलते ही चालक बसों को तेज गति से दौड़ाते हैं। दूसरा लापरवाही, कई मामलों में चालक नशे की हालत में पाए गए। तीसरा, चालकों की कमी, लंबी दूरी की बसों पर दो चालक व एक परिचालक होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।
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रोडवेज बसें अब यात्रियों के लिए सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं देतीं। बीते छह महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बस चालकों की लापरवाही से सात लोगों की मौत हो गई और कई लोग बुरी तरह से घायल हो गए। इन लोगों को उम्र भर का जख्म मिला, जिसे वह कभी नहीं भूल पाएंगे।
छह नवंबर 2025 से 11 मई 2026 के बीच हुए 12 सड़क हादसों ने परिवहन विभाग के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। लगातार हो रहे हादसों के बाद भी विभागीय कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हुआ है।
इन हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नवंबर 2025 में सासनी के समामई में हुई बस-टैंकर भिड़ंत में 4 मौतों हो गई थी और 21 लोग घायल हुए थे। अप्रैल और मई 2026 में हादसों की बाढ़ आ गई। हाल ही में 16 अप्रैल को एक चालक द्वारा बाइक सवार को 500 मीटर तक घसीटना और एक मई को गंगा स्नान करने जा रहे दंपती को रौंद देना, चालकों की संवेदनहीनता को दर्शाता है। 25 अप्रैल की रात शहर में ओवरब्रिज पर होमगार्ड भर्ती की परीक्षा देने आए अभ्यर्थी का पैर बस चालक की लापरवाही से कुचल गया था।
पिछले छह महीनों में रोडवेज बसों से कई दुर्घटनाएं हुई हैं। इस संबंध में परिवहन विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया है, ताकि वे चालकों को जागरूक करें। यातायात माह में पुलिस द्वारा चालकों को जागरूक किया जाता है। हादसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।-रामानंद कुशवाहा, एएसपी
हादसों की तीन मुख्य वजह
जांच और जमीनी हकीकत पर गौर करें तो इन हादसों के पीछे तीन मुख्य कारण सामने आ रहे हैं। पहला रफ्तार, खाली सड़कें मिलते ही चालक बसों को तेज गति से दौड़ाते हैं। दूसरा लापरवाही, कई मामलों में चालक नशे की हालत में पाए गए, जैसा कि 13 मार्च को मेंडू रोड पर हुआ, जब नशे में धुत चालक बस को रेलवे ट्रैक तक ले गया। तीसरा, चालकों की कमी, लंबी दूरी की बसों पर दो चालक व एक परिचालक होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। अधिकांश बसों में एक चालक ही होता है।
ये हुईं बड़ी घटनाएं
- 6 नवंबर 2025 को सासनी के समामई में रोडवेज बस व टैंकर की भिड़ंत में चार लोगों की मौत व 21 लोग घायल।
- 8 नवंबर 2025 सिकंदराराऊ में एटा रोड पर रोडवेज बस ने ट्रैक्टर को टक्कर मारी। हादसे में दो लोग घायल हुए थे।
- 13 नवंबर को सिकंदराराऊ में एटा रोड पर ट्रक व रोडवेज बस की भिड़ंत में बस चालक की मौत, चार यात्री घायल।
- 17 दिसंबर 2025 को मथुरा-बरेली मार्ग पर रोडवेज बस व टैंकर की भिड़ंत, एक दर्जन सवारियां घायल हो गईं।
- 29 दिसंबर 2025 को सासनी में रोडवेज बस व स्कूल बस की टक्कर हुई, जिसमें तीन लोग घायल हो गए थे।
- 13 मार्च 2026 को मेंडू रोड पर नशे में धुत चालक रेलवे की फेंसिंग तोड़ते हुए रेलवे ट्रक पर पहुंच गया था।
- 16 अप्रैल 2026 को रोडवेज बस ने बाइक सवार को रौंद दिया। बाइक सवार की मौत हो गई।
- 25 अप्रैल 2026 की रात होमगार्ड भर्ती की परीक्षा देने आए युवक का पैर रोडवेज बस ने कुचल दिया था।
- 30 अप्रैल 2026 की देर रात सिकंदराराऊ में गांव बिलार के निकट रोडवेज बस पलटने से एक दर्जन सवारियां घायल।
- 01 मई 2026 को सिकंदराराऊ में कासगंज रोड पर बस ने बाइक सवार दंपती को रौंद दिया था। पति की मौत हो गई।
- 8 मई 2026 को आगरा-अलीगढ़ रोड पर रोडवेज बस व कार की टक्कर हो गई।
- 11 मई 2026 को सासनी में कैंटर व एसी बस की भिड़ंत, तीन यात्री हुए घायल।
रोडरेज की स्थितियां बन रहीं : साइकोलॉजिस्ट
जिला अस्पताल के साइकोलॉजिस्ट डाॅ. ललित कुमार कहते हैं कि समय से पहुंचने और डीजल खर्च का औसत बनाए रखने का दबाव मानसिक तनाव पैदा करता है, जिससे रोडरेज की स्थिति बनती है। लगातार ड्राइविंग हाइवे हिप्नोसिस की वजह बनती है। सड़क हादसों के पीछे चालकों की मानसिक स्थिति एक बड़ा कारण है। लंबी दूरी की ड्यूटी के चलते नींद का चक्र बिगड़ जाता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है। चालकों के स्वास्थ्य के प्रति हमें सजग होना चाहिए।
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