Hathras: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ हत्या पर केंद्र-प्रदेश सरकार को जमकर घेरा, पीएम-सीएम पर बोला हमला
शंकराचार्य ने यूपी सरकार को देश में मांस निर्यात का सबसे बड़ा जरिया बताते हुए कहा, "पूरे भारत के सभी राज्य मिलकर जितना मांस बेचते हैं, उतना अकेला उत्तर प्रदेश बेच रहा है। गेरुआ वस्त्र पहनकर कोई मांस का व्यापार कैसे कर सकता है? यदि व्यवसाय ही करना है तो साधु वेश छोड़ दें या फिर किसी और व्यापार से राजस्व बढ़ाएं।
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ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने गौ हत्या को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार पर तीखे प्रहार किए। गौ को माता का दर्जा देने को लेकर प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशा को कटघरे में खड़ा किया। शंकराचार्य ने चुनावी नारों से लेकर 'वैध-अवैध' कत्लखानों संबंधी सरकार के कथित बयान की आलोचना की।
81 दिवसीय गविष्टि यात्रा के अंतर्गत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 11 जून की सुबह हाथरस के आगरा रोड स्थित राधाकृपा भवन गेस्टहाउस में पहुंचे। यहां लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि देश में पोस्टर लगाए गए थे कि 'मोदी जी को मतदान, गौमाता को जीवनदान'। हमने उनको एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन बार मतदान कर दिया, लेकिन गौमाता को जीवनदान नहीं मिला।
उन्होंने आगे कहा कि तीसरी बार चुनाव के समय गृहमंत्री अमित शाह ने गौ-हत्यारों को उल्टा लटकाकर सीधा कर देने की बात कही थी, लेकिन तीसरी कार्यकाल भी आधा बीत चुका है, सरकार बताए कि कितने गौ-हत्यारों को उल्टा लटकाया गया? शंकराचार्य ने कहा कि सरकार ने अवैध बूचड़खानों को बंद करने का दावा किया था। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वैध और अवैध का यह चक्कर सिर्फ एक शब्दजाल है। किसी व्यक्ति को फांसी की सजा कोर्ट में मुकदमा चलने के बाद दी जाती है, फिर सरकार बताए कि गाय के ऊपर कौन सा मुकदमा चला है कि उनकी हत्या के लिए वैध बूचड़खाना की बात कही जा रही है। वैध हिंसा जैसी कोई चीज नहीं होती।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कहा कि बिजनौर में मुख्यमंत्री बोले कि 'गाय हमारी माता है, जन्म-जन्मांतर का नाता है, लेकिन मां-बेटे के संबंध में घोषणा करने की क्या जरूरत है?' शंकराचार्य ने इसका खंडन करते हुए 'गोरखवाणी' पुस्तक का हवाला दिया और कहा कि खुद गुरु गोरखनाथ जी ने अपनी सबदी में उद्घोषणा की है कि 'गौ हमारी माता है'। उन्होंने गरजते हुए कहा, जब गुरु गोरखनाथ खुद सार्वजनिक रूप से यह उद्घोषणा कर चुके हैं, तो उनका कोई भी शिष्य यह कैसे कह सकता है कि हम यह घोषणा नहीं करेंगे?
मांस के व्यापार पर घेरा
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार को देश में मांस निर्यात का सबसे बड़ा जरिया बताते हुए कहा, "पूरे भारत के सभी राज्य मिलकर जितना मांस बेचते हैं, उतना अकेला उत्तर प्रदेश बेच रहा है। गेरुआ वस्त्र पहनकर कोई मांस का व्यापार कैसे कर सकता है? यदि व्यवसाय ही करना है तो साधु वेश छोड़ दें या फिर किसी और व्यापार से राजस्व बढ़ाएं।
गाय को पशु कहना बंद करे सरकार
शंकराचार्य ने कहा कि अंग्रेजों ने गाय को 'पशु' के रूप में दर्ज किया था और आजादी के 78 साल बाद भी हमारी सरकारें उसे पशु ही कह रही हैं। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि जो गाय में पशु बुद्धि रखता है, वह नरक का भागी होता है। उन्होंने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तारीफ करते हुए कहा कि गाय को 'राज्यमाता' घोषित किया, तो फिर भाजपा शासित 22 राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा है? शंकराचार्य ने कहा कि प्रदेश में पहले गाय को राज्य माता घोषित करे। उन्होंने दावा किया दूसरा समुदाय खुद आगे आकर इस बात को कह रहा है।