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Hathras News: 114 साल पुरानी परंपरा का गवाह है गोविंद भगवान का रथ

संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Tue, 24 Feb 2026 01:39 AM IST
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The chariot of Lord Govind is a witness to the 114-year-old tradition.
घ्ंटाघर ​स्थित गोविंद भगवान मंदिर पर लाया गया रथ। संवाद - फोटो : samvad
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शहर के घंटाघर स्थित मंदिर श्री गोविंद भगवान से निकलने वाली रथयात्रा की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। यह रथयात्रा 114 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा की गवाह है। रथ में लगे हवाई जहाज के पहिये इसकी सबसे बड़ी खासियत हैं।
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हर साल रंगभरनी एकादशी से गोविंद भगवान रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत होेती है। यही वजह है कि रविवार की रात को रथ व डोला को मंदिर पर खड़ा कर दिया गया है। इन दोनों को सजाए जाने का काम किया जा रहा है। घंटाघर के गोविंद भगवान मंदिर की स्थापना वार्ष्णेय समाज की ओर से वर्ष 1940 में की गई थी। तभी से यहां महोत्सव का आयोजन किया जाने लगा, लेकिन स्थापना के 27 साल बाद वर्ष 1912 में वार्ष्णेय समाज की ओर से प्रथम रथयात्रा का आयोजन किया, जिसमें प्रभु अपनी प्रिया संग नगर यात्रा करते हैं।
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शुरुआती दौर में यह रथ तीन मंजिला का होता था, लेकिन आवागमन में अधिक दिक्कत होने के कारण एक मंजिल को उतार दिया गया। इसलिए आज भी इसे तीन मंजिला रथ कहा जाता है। वर्ष 1969 में तत्कालीन नगर पालिका चेयरमैन रमाशंकर वार्ष्णेय ने रथ के पहियों को बदलवाया था। इस रथ में लगे लकड़ी के पहियों को संग्रहालय में रखवाकर इसमें हवाई जहाज के पहिये लगाए गए थे। 1993 में इस रथ का जीर्णोद्धार मदन मोहन अपना वालों की अध्यक्षता में किया गया। इस रथ यात्रा को भव्यता देने के लिए हाथरस ही नहीं, बल्कि देश भर में रहने वाले वार्ष्णेय समाज के लोग तन-मन-धन से प्रयत्नशील रहते हैं।



रेलवे लाइन पार कराने के लिए आती थी टीम

एक समय था जब रथ को रेलवे लाइन पार कराए जाने के लिए बकायदा रेलवे का स्टाफ मथुरा से आता था, जो रेलवे सिग्नल के तारों को हटाता था व बाद में उन्हें जोड़ता था। इसके लिए रथयात्रा कमेटी की ओर से पहले से मथुरा में सूचना दी जाती थी। अब ओएचई लाइन होने के बाद रथ से डोले में भगवान को विराजमान कर रेलवे लाइन को पार कराया जाता है।
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