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Hathras News: पंक्चर जोड़ने वाले प्रधान ने बदली गांव की तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 28 May 2026 02:07 AM IST
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ग्राम पंचायत रुहेरी में बना कचरा निस्तारण केंद्र। संवाद
- फोटो : Samvad
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प्रशांत भारती
हाथरस। कहते हैं कि पद और प्रतिष्ठा इंसान का व्यवहार बदल देते हैं, लेकिन रुहेरी ग्राम पंचायत के प्रधान तालेश्वर सिंह इस सोच को गलत साबित करते हैं। सुबह होते ही वह अपनी पंक्चर की दुकान पर नजर आते हैं, जहां वह टायर-ट्यूब ठीक कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वहीं गांव के विकास और लोगों की समस्याओं की बात आते ही वही साधारण पंक्चर मिस्त्री एक जिम्मेदार प्रशासक की भूमिका निभाते दिखाई देते हैं।
पिछले पांच वर्षों में तालेवर सिंह ने न केवल अपनी दुकान पर पंक्चर जोड़े हैं, बल्कि उन्होंने रुहेरी ग्राम पंचायत के विकास की टूटी कड़ियों को भी बखूबी जोड़ा है। डायरी के पन्नों में दर्ज आंकड़े गवाही देते हैं कि एक साधारण सा दिखने वाला व्यक्ति अगर ठान ले, तो वह पूरे सिस्टम को बदलकर रख सकता है। तालेश्वर की यह कहानी यह दिखाती है कि नेतृत्व करने के लिए बड़ी-बड़ी डिग्रियों या करोड़ों की संपत्ति की जरूरत नहीं होती, बल्कि इसके लिए सेवा भाव की जरूरत होती है।
जब लोग छोटे-छोटे पदों पर आकर भी अहंकार से भर जाते हैं, वहीं तालेवर सिंह आज भी अपनी दुकान पर बैठकर गाड़ियों के पंक्चर ठीक करते हैं। उनके लिए प्रधान पद कोई रौब दिखाने का जरिया नहीं, बल्कि अपने ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने की एक जिम्मेदारी है। पंचायत सचिव विदेश शर्मा का कहना है कि कभी भी विकास कार्य के लिए बुलाने पर ग्राम प्रधान अपनी दुकान से चले आते हैं और अपनी भूमिका का निर्वहन करते हैं। इधर, ग्राम प्रधान तालेवर सिंह का कहना है कि मैं तो ग्रामीणों का सेवक हूं, मेरा मूल काम गाड़ियों को ठीक करना है, उसे मैं नहीं छोड़ सकता। संवाद
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एक नजर में ग्राम पंचायत
राजस्व ग्राम : रुहेरी, नगला उम्मेद, श्रीनगर, नगला गलिया
वर्तमान में आबादी-- लगभग 16 हजार।
कुल परिवार : चार हजार।
कुल वोटर : 4629 ।
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पांच सालों में हुए मुख्य विकास कार्य और अनुमानित लागत :
- ग्राम सचिवालय का निर्माण : गांव के लोगों को सरकारी कार्याें के लिए शहर न भागना पड़े, इसके लिए 14 लाख रुपये की अनुमानित लागत से ग्राम सचिवालय का निर्माण कराया गया है।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (कूड़ा निस्तारण) : पर्यावरण और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए नौ लाख रुपये की लागत से इस केंद्र का निर्माण कराया गया।
- बरात घर का निर्माण : ग्राम पंचायत रुहेरी के अंतर्गत नया नगला में 7.5 लाख रुपये की लागत से बरात घर बनवाया गया, जिससे गरीब परिवारों को बेटियों की शादी और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए एक सर्वसुविधायुक्त स्थान मिला।
-पुस्तकालय की स्थापना : रुहेरी में एक मुख्य पुस्तकालय का निर्माण कार्य कराया गया। नगला उम्मेद के आंबेडकर पार्क में चार लाख रुपये की लागत से एक और पुस्तकालय का निर्माण कराया गया है।
-भूमिगत पाइप (जल निकासी) : रुहेरी में गंदे नाले से पानी की सुचारू निकासी के लिए 7 .5 लाख रुपये की लागत से भूमिगत पाइप स्थापित करने का कार्य किया गया।
- श्मशान घाट का सुंदरीकरण : अंतिम यात्रा के लिए 12 लाख रुपये की भारी लागत से श्मशान घाट का कायाकल्प कराया गया।
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आत्मनिर्भरता और अनोखी पहल, कूड़े से कमाई
तालेश्वर सिंह के काम करने का तरीका कॉरपोरेट मैनेजमेंट जैसा ही है। उन्होंने गांव को स्वच्छ रखने के साथ-साथ राजस्व कमाने का भी जरिया निकाला। ग्राम पंचायत ने स्वच्छता अभियान के तहत 1.75 लाख रुपये की कमाई कूड़े के निस्तारण से की है। प्रत्येक दिन हर एक परिवार से डोर-टू-डोर कूड़ा संकलन किया जाता है। रुहेरी के ग्राम सचिवालय में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के रूप में आरओ सिस्टम लगा हुआ है।
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ग्राम प्रधान विकास के पहिये की असली धुरी होता है। अगर सकारात्मक विचार हो तो ग्राम पंचायत की तस्वीर को बदला जा सकता है। यह ग्राम पंचायत रुहेरी के ग्राम प्रधान ने करके दिखाया है।
-अतुल वत्स, डीएम।
हाथरस। कहते हैं कि पद और प्रतिष्ठा इंसान का व्यवहार बदल देते हैं, लेकिन रुहेरी ग्राम पंचायत के प्रधान तालेश्वर सिंह इस सोच को गलत साबित करते हैं। सुबह होते ही वह अपनी पंक्चर की दुकान पर नजर आते हैं, जहां वह टायर-ट्यूब ठीक कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वहीं गांव के विकास और लोगों की समस्याओं की बात आते ही वही साधारण पंक्चर मिस्त्री एक जिम्मेदार प्रशासक की भूमिका निभाते दिखाई देते हैं।
पिछले पांच वर्षों में तालेवर सिंह ने न केवल अपनी दुकान पर पंक्चर जोड़े हैं, बल्कि उन्होंने रुहेरी ग्राम पंचायत के विकास की टूटी कड़ियों को भी बखूबी जोड़ा है। डायरी के पन्नों में दर्ज आंकड़े गवाही देते हैं कि एक साधारण सा दिखने वाला व्यक्ति अगर ठान ले, तो वह पूरे सिस्टम को बदलकर रख सकता है। तालेश्वर की यह कहानी यह दिखाती है कि नेतृत्व करने के लिए बड़ी-बड़ी डिग्रियों या करोड़ों की संपत्ति की जरूरत नहीं होती, बल्कि इसके लिए सेवा भाव की जरूरत होती है।
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जब लोग छोटे-छोटे पदों पर आकर भी अहंकार से भर जाते हैं, वहीं तालेवर सिंह आज भी अपनी दुकान पर बैठकर गाड़ियों के पंक्चर ठीक करते हैं। उनके लिए प्रधान पद कोई रौब दिखाने का जरिया नहीं, बल्कि अपने ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने की एक जिम्मेदारी है। पंचायत सचिव विदेश शर्मा का कहना है कि कभी भी विकास कार्य के लिए बुलाने पर ग्राम प्रधान अपनी दुकान से चले आते हैं और अपनी भूमिका का निर्वहन करते हैं। इधर, ग्राम प्रधान तालेवर सिंह का कहना है कि मैं तो ग्रामीणों का सेवक हूं, मेरा मूल काम गाड़ियों को ठीक करना है, उसे मैं नहीं छोड़ सकता। संवाद
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एक नजर में ग्राम पंचायत
राजस्व ग्राम : रुहेरी, नगला उम्मेद, श्रीनगर, नगला गलिया
वर्तमान में आबादी
कुल परिवार : चार हजार।
कुल वोटर : 4629 ।
पांच सालों में हुए मुख्य विकास कार्य और अनुमानित लागत :
- ग्राम सचिवालय का निर्माण : गांव के लोगों को सरकारी कार्याें के लिए शहर न भागना पड़े, इसके लिए 14 लाख रुपये की अनुमानित लागत से ग्राम सचिवालय का निर्माण कराया गया है।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (कूड़ा निस्तारण) : पर्यावरण और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए नौ लाख रुपये की लागत से इस केंद्र का निर्माण कराया गया।
- बरात घर का निर्माण : ग्राम पंचायत रुहेरी के अंतर्गत नया नगला में 7.5 लाख रुपये की लागत से बरात घर बनवाया गया, जिससे गरीब परिवारों को बेटियों की शादी और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए एक सर्वसुविधायुक्त स्थान मिला।
-पुस्तकालय की स्थापना : रुहेरी में एक मुख्य पुस्तकालय का निर्माण कार्य कराया गया। नगला उम्मेद के आंबेडकर पार्क में चार लाख रुपये की लागत से एक और पुस्तकालय का निर्माण कराया गया है।
-भूमिगत पाइप (जल निकासी) : रुहेरी में गंदे नाले से पानी की सुचारू निकासी के लिए 7 .5 लाख रुपये की लागत से भूमिगत पाइप स्थापित करने का कार्य किया गया।
- श्मशान घाट का सुंदरीकरण : अंतिम यात्रा के लिए 12 लाख रुपये की भारी लागत से श्मशान घाट का कायाकल्प कराया गया।
आत्मनिर्भरता और अनोखी पहल, कूड़े से कमाई
तालेश्वर सिंह के काम करने का तरीका कॉरपोरेट मैनेजमेंट जैसा ही है। उन्होंने गांव को स्वच्छ रखने के साथ-साथ राजस्व कमाने का भी जरिया निकाला। ग्राम पंचायत ने स्वच्छता अभियान के तहत 1.75 लाख रुपये की कमाई कूड़े के निस्तारण से की है। प्रत्येक दिन हर एक परिवार से डोर-टू-डोर कूड़ा संकलन किया जाता है। रुहेरी के ग्राम सचिवालय में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के रूप में आरओ सिस्टम लगा हुआ है।
ग्राम प्रधान विकास के पहिये की असली धुरी होता है। अगर सकारात्मक विचार हो तो ग्राम पंचायत की तस्वीर को बदला जा सकता है। यह ग्राम पंचायत रुहेरी के ग्राम प्रधान ने करके दिखाया है।
-अतुल वत्स, डीएम।