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Jalaun News: शॉर्ट सर्किट से कच्चे मकान में लगी आग, लकवाग्रस्त वृद्ध की जिंदा जलकर मौत
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फोटो- 12 मृतक श्रीराम की फाइल फोटो।
- फोटो : लाइन का इंसुलेटर बदलता कर्मचारी।
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कोंच। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम परैथा में शुक्रवार सुबह बिजली के शॉर्ट सर्किट से कच्चे मकान में आग लग गई। हादसे में घर में अकेले सो रहे लकवाग्रस्त वृद्ध नहीं उठ सका और उसकी जिंदा जलकर मौत हो गई। दमकल टीम ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक घर में रखा अनाज व गृहस्थी का सामान भी जलकर राख हो गया। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी पर पहुंचे परिजन जब पहुंचे तो सब कुछ तबाह हो चुका था।
ग्राम परैथा निवासी श्रीराम बरार (70) लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पैरालाइसिस थे। शुक्रवार सुबह वह कच्चे मकान में चारपाई पर सो रहे थे, जबकि परिजन खेतों में मजदूरी करने गए हुए थे। इसी दौरान छप्पर के नीचे से गुजर रही बिजली के केबल में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। निकली चिंगारी से छप्पर ने आग पकड़ ली, जिसने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया।
आग की लपटें उठती देख ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस व दमकल विभाग को सूचना दी। ग्रामीणों ने आग बुझाने के साथ ही श्रीराम को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन आग की तीव्रता के कारण वे सफल नहीं हो सके। कुछ ही देर में छप्पर जलकर गिर गया। इससे वृद्ध की जिंदा जलकर मौत हो गई। दमकल वाहन के पहुंचने के बाद आग पर काबू पाया गया। इसके बाद मलबे से श्रीराम का शव बाहर निकाला गया लेकिन वह पूरी तरह से जल चुका था।
परिजनों ने बताया गया कि पैरालाइसिस के कारण श्रीराम चलने-फिरने में असमर्थ थे, जिससे वह स्वयं को बचा नहीं सके। हादसे में घर में रखी करीब 15 बोरी सरसों, आठ क्विंटल गेहूं समेत घरेलू सामान भी जलकर नष्ट हो गया। श्रीराम के दो पुत्र रविंद्र और अरविंद हैं तथा परिवार के पास लगभग एक बीघा कृषि भूमि है।
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बेबस चारपाई, बुझती सांसें और देर से पहुंची मदद
पैरालाइसिस ने बांध रखा था शरीर, आग ने छीन ली जिंदगी
सुधीर राना
उरई। कोंच के ग्राम परैथा में जिस वक्त कच्चे मकान में आग लगी, उस वक्त 70 वर्षीय श्रीराम बरार बिल्कुल अकेले थे। शरीर पैरालाइसिस से जकड़ा था, उठना तो दूर, करवट बदल पाना भी मुश्किल था। चारपाई पर पड़े श्रीराम के लिए आग सिर्फ एक हादसा नहीं थी, बल्कि मौत का वो दरवाजा थी, जिससे निकलने का कोई रास्ता उनके पास नहीं था।
बिजली के केबल से निकली चिंगारी ने सूखे छप्पर को चपेट में लिया और कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे घर को घेर लिया। धुआं भरता गया, लपटें नीचे उतरती रहीं, लेकिन श्रीराम सिर्फ आंखों से सब देख सकते थे। आवाज लगाने की ताकत भी शायद जवाब दे चुकी थी।
ग्रामीणों ने आग देखी तो दौड़े, बाल्टियां आईं, शोर मचा, लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई भीतर नहीं पहुंच सका। छप्पर गिरा और उसके साथ ही चारपाई पर पड़ी एक जिंदगी हमेशा के लिए खामोश हो गई।
कई ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि कोई भी पास नहीं जा सका। कुछ ही देर में छप्पर भरभराकर गिर पड़ा और उसी मलबे के नीचे दब गई श्रीराम की सांसें।
दमकल की गाड़ी पहुंची, आग पर काबू पाया गया। जब जलता हुआ मलबा हटाया गया तो वहां पड़ा था एक जला हुआ शरीर श्रीराम का। वहीं, श्रीराम, जो कभी अपने परिवार का सहारा थे, खेतों में मेहनत करते थे, बच्चों के भविष्य के सपने देखते थे। बीमारी ने उन्हें बिस्तर से बांध दिया था, लेकिन किस्मत ने उन्हें आग के हवाले कर दिया।
खेतों में मजदूरी कर रहे परिजन जब बदहवास लौटे, तो सामने था राख में तब्दील घर। रोती-बिलखती महिलाएं, सिर पकड़कर बैठे बेटे और खामोशी में डूबा पूरा गांव हर आंख नम थी। आग ने सिर्फ एक बुजुर्ग की जान ही नहीं ली, बल्कि परिवार की पूरी गृहस्थी भी निगल ली। 15 बोरी सरसों, आठ क्विंटल गेहूं और वर्षों की जमा पूंजी पल भर में खत्म हो गई।
परिवार के पास महज एक बीघा जमीन है, वही उनकी आजीविका का सहारा है। अब न सिर पर छप्पर बचा है, न घर में अनाज। सिर्फ जली हुई चारपाई बची है,जो हर किसी को उस बेबसी की याद दिलाती है, जिसमें एक इंसान आग के बीच अकेला दम तोड़ गया।
गांव में आज भी उस घर के सामने से गुजरते लोग ठहर जाते हैं। शायद सोचते हैं, कि अगर कोई साथ होता, अगर बिजली की लाइन ठीक होती, अगर मदद वक्त पर मिल जाती तो क्या एक जिंदगी बच सकती थी। (संवाद)
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ग्राम परैथा निवासी श्रीराम बरार (70) लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पैरालाइसिस थे। शुक्रवार सुबह वह कच्चे मकान में चारपाई पर सो रहे थे, जबकि परिजन खेतों में मजदूरी करने गए हुए थे। इसी दौरान छप्पर के नीचे से गुजर रही बिजली के केबल में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। निकली चिंगारी से छप्पर ने आग पकड़ ली, जिसने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया।
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आग की लपटें उठती देख ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस व दमकल विभाग को सूचना दी। ग्रामीणों ने आग बुझाने के साथ ही श्रीराम को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन आग की तीव्रता के कारण वे सफल नहीं हो सके। कुछ ही देर में छप्पर जलकर गिर गया। इससे वृद्ध की जिंदा जलकर मौत हो गई। दमकल वाहन के पहुंचने के बाद आग पर काबू पाया गया। इसके बाद मलबे से श्रीराम का शव बाहर निकाला गया लेकिन वह पूरी तरह से जल चुका था।
परिजनों ने बताया गया कि पैरालाइसिस के कारण श्रीराम चलने-फिरने में असमर्थ थे, जिससे वह स्वयं को बचा नहीं सके। हादसे में घर में रखी करीब 15 बोरी सरसों, आठ क्विंटल गेहूं समेत घरेलू सामान भी जलकर नष्ट हो गया। श्रीराम के दो पुत्र रविंद्र और अरविंद हैं तथा परिवार के पास लगभग एक बीघा कृषि भूमि है।
बेबस चारपाई, बुझती सांसें और देर से पहुंची मदद
पैरालाइसिस ने बांध रखा था शरीर, आग ने छीन ली जिंदगी
सुधीर राना
उरई। कोंच के ग्राम परैथा में जिस वक्त कच्चे मकान में आग लगी, उस वक्त 70 वर्षीय श्रीराम बरार बिल्कुल अकेले थे। शरीर पैरालाइसिस से जकड़ा था, उठना तो दूर, करवट बदल पाना भी मुश्किल था। चारपाई पर पड़े श्रीराम के लिए आग सिर्फ एक हादसा नहीं थी, बल्कि मौत का वो दरवाजा थी, जिससे निकलने का कोई रास्ता उनके पास नहीं था।
बिजली के केबल से निकली चिंगारी ने सूखे छप्पर को चपेट में लिया और कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे घर को घेर लिया। धुआं भरता गया, लपटें नीचे उतरती रहीं, लेकिन श्रीराम सिर्फ आंखों से सब देख सकते थे। आवाज लगाने की ताकत भी शायद जवाब दे चुकी थी।
ग्रामीणों ने आग देखी तो दौड़े, बाल्टियां आईं, शोर मचा, लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई भीतर नहीं पहुंच सका। छप्पर गिरा और उसके साथ ही चारपाई पर पड़ी एक जिंदगी हमेशा के लिए खामोश हो गई।
कई ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि कोई भी पास नहीं जा सका। कुछ ही देर में छप्पर भरभराकर गिर पड़ा और उसी मलबे के नीचे दब गई श्रीराम की सांसें।
दमकल की गाड़ी पहुंची, आग पर काबू पाया गया। जब जलता हुआ मलबा हटाया गया तो वहां पड़ा था एक जला हुआ शरीर श्रीराम का। वहीं, श्रीराम, जो कभी अपने परिवार का सहारा थे, खेतों में मेहनत करते थे, बच्चों के भविष्य के सपने देखते थे। बीमारी ने उन्हें बिस्तर से बांध दिया था, लेकिन किस्मत ने उन्हें आग के हवाले कर दिया।
खेतों में मजदूरी कर रहे परिजन जब बदहवास लौटे, तो सामने था राख में तब्दील घर। रोती-बिलखती महिलाएं, सिर पकड़कर बैठे बेटे और खामोशी में डूबा पूरा गांव हर आंख नम थी। आग ने सिर्फ एक बुजुर्ग की जान ही नहीं ली, बल्कि परिवार की पूरी गृहस्थी भी निगल ली। 15 बोरी सरसों, आठ क्विंटल गेहूं और वर्षों की जमा पूंजी पल भर में खत्म हो गई।
परिवार के पास महज एक बीघा जमीन है, वही उनकी आजीविका का सहारा है। अब न सिर पर छप्पर बचा है, न घर में अनाज। सिर्फ जली हुई चारपाई बची है,जो हर किसी को उस बेबसी की याद दिलाती है, जिसमें एक इंसान आग के बीच अकेला दम तोड़ गया।
गांव में आज भी उस घर के सामने से गुजरते लोग ठहर जाते हैं। शायद सोचते हैं, कि अगर कोई साथ होता, अगर बिजली की लाइन ठीक होती, अगर मदद वक्त पर मिल जाती तो क्या एक जिंदगी बच सकती थी। (संवाद)

फोटो- 12 मृतक श्रीराम की फाइल फोटो।- फोटो : लाइन का इंसुलेटर बदलता कर्मचारी।

फोटो- 12 मृतक श्रीराम की फाइल फोटो।- फोटो : लाइन का इंसुलेटर बदलता कर्मचारी।
