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Jalaun News: नदीगांव में बंदरों का आतंक, एक माह में 30 से अधिक ग्रामीण घायल
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कोंच। नदीगांव कस्बे में बंदरों का उपद्रव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले एक महीने में ही 30 से 35 ग्रामीण बंदरों के हमले का शिकार हो चुके हैं जिनमें बच्चे, स्कूली छात्र और बुजुर्ग भी शामिल हैं। इस बढ़ते उपद्रव से पूरे कस्बे में भय का माहौल है। लोगों ने अपने घरों की छतों पर जाना भी बंद कर दिया है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार वार्ड नंबर 10 बंदरों के उपद्रव से सबसे अधिक प्रभावित है। बंदरों के झुंड दिन-रात घरों में घुसकर लोगों पर हमला कर रहे हैं। बच्चों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। वहीं बुजुर्ग भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बंदरों के काटने से रेबीज का खतरा बढ़ गया है। पीड़ितों को नियमित रूप से अस्पतालों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं।
स्थानीय निवासी पवन पांडेय, दीप सिंह चंदेल, सौरभ चंदेल, अंकुश त्रिपाठी, राजेन्द्र स्वर्णकार, अंश चंदेल, टिंकू यादव और अन्य लोगों ने बताया कि बंदर बेहद उग्र हो चुके हैं और आए दिन लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे लोगों में रोष है। ग्रामवासियों ने मांग की है कि बंदरों को पकड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए।
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स्थानीय निवासियों के अनुसार वार्ड नंबर 10 बंदरों के उपद्रव से सबसे अधिक प्रभावित है। बंदरों के झुंड दिन-रात घरों में घुसकर लोगों पर हमला कर रहे हैं। बच्चों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। वहीं बुजुर्ग भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बंदरों के काटने से रेबीज का खतरा बढ़ गया है। पीड़ितों को नियमित रूप से अस्पतालों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं।
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स्थानीय निवासी पवन पांडेय, दीप सिंह चंदेल, सौरभ चंदेल, अंकुश त्रिपाठी, राजेन्द्र स्वर्णकार, अंश चंदेल, टिंकू यादव और अन्य लोगों ने बताया कि बंदर बेहद उग्र हो चुके हैं और आए दिन लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे लोगों में रोष है। ग्रामवासियों ने मांग की है कि बंदरों को पकड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए।
