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Jalaun News: 15 लाख रुपये के चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाले में दो अधिकारियों पर विभागीय जांच
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उरई। चिकित्सा प्रतिपूर्ति की धनराशि में हुए करीब 15 लाख रुपये के गबन के मामले में शासन ने कार्रवाई करते हुए दो विभागीय अधिकारी उप निदेशक कृषि सुशील कुमार उत्तम और भूमि संरक्षण अधिकारी अभिषेक चंद्रा के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए हैं। दोनों अधिकारियों पर वित्तीय नियंत्रण में शिथिलता बरतने और अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन न करने के आरोप हैं।
मामले का खुलासा फरवरी माह में उस समय हुआ था, जब सेवानिवृत्त भूमि संरक्षण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी सहित कुछ कर्मचारियों ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय से शिकायत कर बताया था कि उन्हें चिकित्सा प्रतिपूर्ति की धनराशि प्राप्त नहीं हुई है, जबकि विभागीय अभिलेखों में भुगतान दर्शाया जा रहा है। शिकायत के बाद कराई गई जांच में करीब 15 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई थी।
जांच में सामने आया कि उप निदेशक कृषि कार्यालय में तैनात लिपिक हर्ष वर्मा और भूमि संरक्षण विभाग के लिपिक श्यामजी ने कथित रूप से मिलीभगत कर चिकित्सा प्रतिपूर्ति की धनराशि कर्मचारियों के खातों में भेजने के बजाय निजी खातों में स्थानांतरित कर दी। मामला उजागर होने के बाद दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
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इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति और कृषि भवन लखनऊ से आई जांच टीम ने मामले की जांच की। दोनों जांच रिपोर्टों में वित्तीय नियंत्रण और निगरानी में गंभीर लापरवाही की बात सामने आने पर शासन ने विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की।
प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र द्वारा जारी आदेश के अनुसार उप निदेशक कृषि सुशील कुमार उत्तम की जांच के लिए अपर निदेशक कृषि (भूमि संरक्षण) रमेश कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं भूमि संरक्षण अधिकारी अभिषेक चंद्रा के विरुद्ध जांच की जिम्मेदारी संयुक्त कृषि निदेशक अखिलेश कुमार सिंह को सौंपी गई है।
जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि शासन स्तर से कार्रवाई संबंधी पत्र प्राप्त हो गए हैं और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।
मामले का खुलासा फरवरी माह में उस समय हुआ था, जब सेवानिवृत्त भूमि संरक्षण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी सहित कुछ कर्मचारियों ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय से शिकायत कर बताया था कि उन्हें चिकित्सा प्रतिपूर्ति की धनराशि प्राप्त नहीं हुई है, जबकि विभागीय अभिलेखों में भुगतान दर्शाया जा रहा है। शिकायत के बाद कराई गई जांच में करीब 15 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई थी।
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जांच में सामने आया कि उप निदेशक कृषि कार्यालय में तैनात लिपिक हर्ष वर्मा और भूमि संरक्षण विभाग के लिपिक श्यामजी ने कथित रूप से मिलीभगत कर चिकित्सा प्रतिपूर्ति की धनराशि कर्मचारियों के खातों में भेजने के बजाय निजी खातों में स्थानांतरित कर दी। मामला उजागर होने के बाद दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति और कृषि भवन लखनऊ से आई जांच टीम ने मामले की जांच की। दोनों जांच रिपोर्टों में वित्तीय नियंत्रण और निगरानी में गंभीर लापरवाही की बात सामने आने पर शासन ने विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की।
प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र द्वारा जारी आदेश के अनुसार उप निदेशक कृषि सुशील कुमार उत्तम की जांच के लिए अपर निदेशक कृषि (भूमि संरक्षण) रमेश कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं भूमि संरक्षण अधिकारी अभिषेक चंद्रा के विरुद्ध जांच की जिम्मेदारी संयुक्त कृषि निदेशक अखिलेश कुमार सिंह को सौंपी गई है।
जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि शासन स्तर से कार्रवाई संबंधी पत्र प्राप्त हो गए हैं और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।