{"_id":"6a304c0543088409cb05ddfb","slug":"orai-orai-news-orai-news-c-224-1-ori1005-145528-2026-06-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jalaun News: पूर्व प्रधान व सचिव से 2.30 लाख की वसूली के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jalaun News: पूर्व प्रधान व सचिव से 2.30 लाख की वसूली के आदेश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
रामपुरा। विकास खंड रामपुरा की ग्राम पंचायत बिलौड़ में मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है। डीएम ने तत्कालीन ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव को सरकारी धन के दुरुपयोग का दोषी मानते हुए कुल 2.30 लाख रुपये की वसूली के आदेश जारी किए हैं। मामले की शिकायत ग्राम बिलौड़ निवासी रमेश सिंह ने जिलाधिकारी से की थी।
जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में मनरेगा योजना के तहत सात विकास कार्य कराए गए थे। जांच के दौरान निर्माण कार्यों के माप, स्थल निरीक्षण और भुगतान संबंधी अभिलेखों का परीक्षण किया गया। जांच में तीन कच्चे निर्माण कार्यों में वास्तविक कार्य से अधिक माप दर्ज कर भुगतान किए जाने की पुष्टि हुई, जिससे शासन को 2,30,613 रुपये की वित्तीय क्षति हुई।
मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान भोंदल सिंह और तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव मुकेश कुमार सविता को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। दोनों के जवाबों का परीक्षण करने के बाद जिला प्रशासन ने उन्हें असंतोषजनक मानते हुए समान रूप से जिम्मेदार ठहराया।
विज्ञापन
जिला मजिस्ट्रेट ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए भोंदल सिंह से 1,15,306.50 रुपये तथा मुकेश कुमार सविता से 1,15,306.50 रुपये की वसूली के आदेश दिए हैं।
आदेश में कहा गया है कि दोनों संबंधित व्यक्ति एक सप्ताह के भीतर निर्धारित सरकारी खाते में धनराशि जमा करें। निर्धारित समय में राशि जमा न करने पर भू-राजस्व की भांति वसूली की कार्रवाई की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर वेतन एवं अन्य देयकों से भी रकम वसूली जाएगी।
जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में मनरेगा योजना के तहत सात विकास कार्य कराए गए थे। जांच के दौरान निर्माण कार्यों के माप, स्थल निरीक्षण और भुगतान संबंधी अभिलेखों का परीक्षण किया गया। जांच में तीन कच्चे निर्माण कार्यों में वास्तविक कार्य से अधिक माप दर्ज कर भुगतान किए जाने की पुष्टि हुई, जिससे शासन को 2,30,613 रुपये की वित्तीय क्षति हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान भोंदल सिंह और तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव मुकेश कुमार सविता को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। दोनों के जवाबों का परीक्षण करने के बाद जिला प्रशासन ने उन्हें असंतोषजनक मानते हुए समान रूप से जिम्मेदार ठहराया।
जिला मजिस्ट्रेट ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए भोंदल सिंह से 1,15,306.50 रुपये तथा मुकेश कुमार सविता से 1,15,306.50 रुपये की वसूली के आदेश दिए हैं।
आदेश में कहा गया है कि दोनों संबंधित व्यक्ति एक सप्ताह के भीतर निर्धारित सरकारी खाते में धनराशि जमा करें। निर्धारित समय में राशि जमा न करने पर भू-राजस्व की भांति वसूली की कार्रवाई की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर वेतन एवं अन्य देयकों से भी रकम वसूली जाएगी।