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जलापूर्ति योजना: 62 लाख की हेरफेर में एजेंसी ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी, अवर अभियंता को किया जा चुका निलंबित
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Wed, 03 Jun 2026 11:28 AM IST
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सार
इस मामले में अवर अभियंता अश्वनी कुमार को निलंबित कर दिया गया जबकि अधिशासी अभियंता मुकेश पाल एवं सहायक अभियंता की जांच शुरू कराई गई। जांच प्रयागराज के अधीक्षण अभियंता को सौंपी गई है।
भ्रष्टाचार
- फोटो : AI
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विस्तार
ललितपुर जलापूर्ति योजना में 62.65 लाख की हेरफेर मामले में भुगतान हासिल करने वाली एजेंसी पर गाज गिरेगी। उसकी भूमिका भी जांच शुरू कराई गई है।
अमृत 2.0 कार्यक्रम के तहत संचालित ललितपुर नगर पालिका पुनर्गठन जलापूर्ति योजना की जांच में निर्माण गुणवत्ता, वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। अधीक्षण अभियंता एसके यादव ने इसकी प्रारंभिक जांच की थी। उनकी जांच रिपोर्ट के मुताबिक 23 अप्रैल को निरीक्षण के दौरान योजना के तहत 2700 केएल क्षमता के ओवरहेड टैंक (ओएचटी), जलशोधन संयंत्र और पाइपलाइन नेटवर्क के निर्माण में कई तकनीकी खामियां मिलीं। ओएचटी की सतह फिनिशिंग और पेंटिंग कार्य मानक के अनुरूप नहीं मिला। कई स्थानों पर बिना समुचित सतह सुधार के पेंटिंग कर दी गई थी, जिसे तकनीकी दृष्टि से अनुचित बताया गया। खुदाई और बैक फिलिंग के गलत रिकॉर्ड के कारण बिल संख्या 32, 35 और 40 समेत अन्य के जरिये करीब 62.65 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। रिपोर्ट में इसे सरकारी राजस्व का नुकसान बताया गया। यह भुगतान आगरा में पंजीकृत ओपी गुप्ता कांसट्रक्शन को हुआ था।
इस मामले में अवर अभियंता अश्वनी कुमार को निलंबित कर दिया गया जबकि अधिशासी अभियंता मुकेश पाल एवं सहायक अभियंता की जांच शुरू कराई गई। जांच प्रयागराज के अधीक्षण अभियंता को सौंपी गई है वहीं, जल निगम सूत्रों का कहना है कि लाखों का भुगतान हासिल करने वाली फर्म की भूमिका भी संदिग्ध है। ऐसे में उसके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है।
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अमृत 2.0 कार्यक्रम के तहत संचालित ललितपुर नगर पालिका पुनर्गठन जलापूर्ति योजना की जांच में निर्माण गुणवत्ता, वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। अधीक्षण अभियंता एसके यादव ने इसकी प्रारंभिक जांच की थी। उनकी जांच रिपोर्ट के मुताबिक 23 अप्रैल को निरीक्षण के दौरान योजना के तहत 2700 केएल क्षमता के ओवरहेड टैंक (ओएचटी), जलशोधन संयंत्र और पाइपलाइन नेटवर्क के निर्माण में कई तकनीकी खामियां मिलीं। ओएचटी की सतह फिनिशिंग और पेंटिंग कार्य मानक के अनुरूप नहीं मिला। कई स्थानों पर बिना समुचित सतह सुधार के पेंटिंग कर दी गई थी, जिसे तकनीकी दृष्टि से अनुचित बताया गया। खुदाई और बैक फिलिंग के गलत रिकॉर्ड के कारण बिल संख्या 32, 35 और 40 समेत अन्य के जरिये करीब 62.65 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ। रिपोर्ट में इसे सरकारी राजस्व का नुकसान बताया गया। यह भुगतान आगरा में पंजीकृत ओपी गुप्ता कांसट्रक्शन को हुआ था।
इस मामले में अवर अभियंता अश्वनी कुमार को निलंबित कर दिया गया जबकि अधिशासी अभियंता मुकेश पाल एवं सहायक अभियंता की जांच शुरू कराई गई। जांच प्रयागराज के अधीक्षण अभियंता को सौंपी गई है वहीं, जल निगम सूत्रों का कहना है कि लाखों का भुगतान हासिल करने वाली फर्म की भूमिका भी संदिग्ध है। ऐसे में उसके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है।
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