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Asha Bhosle: फिल्म जगत में मशहूर थी झांसी के इंदीवर और आशा भोसले की जुगलबंदी, रानी लक्ष्मीबाई से थीं प्रभावित
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Mon, 13 Apr 2026 11:29 AM IST
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सार
महान गायिका आशा भोसले ने अपने कॅरिअर में 12 हजार से अधिक गीत गाए हैं। इनमें झांसी के बरुआसागर कस्बे के रहने वाले मशहूर गीतकार इंदीवर के लिखे हुए तमाम गाने भी शामिल हैं।
आशा भोसले
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
महान गायिका आशा भोसले ने अपने कॅरिअर में 12 हजार से अधिक गीत गाए हैं। इनमें झांसी के बरुआसागर कस्बे के रहने वाले मशहूर गीतकार इंदीवर के लिखे हुए तमाम गाने भी शामिल हैं। फिल्म जगत में आशा भोसले और इंदीवर की जुगलबंदी को आज भी याद किया जाता है। वह झांसी तो कभी नहीं आईं, लेकिन रानी लक्ष्मीबाई के बारे में अधिक से अधिक जानने की उनमें हमेशा उत्सुकता रहती थी।
श्यामलाल बाबू राय उर्फ इंदीवर की कलम ने एक से बढ़कर एक फिल्मी गीतों को जन्म दिया। उनके लिखे ‘ये मेरा दिल’ (डॉन, 1978), ‘पिया तू अब तो आजा’ (कारवां, 1971), ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ (तीसरी मंजिल, 1966), ‘चुरा लिया है तुमने’ (यादों की बारात, 1973), ‘अभी न जाओ छोड़कर’ (हम दोनों, 1961), ‘कहीं आग लगे’ (तक्षक, 1999) समेत कई यादगार गीतों को आशा भोंसले ने अपनी आवाज से सजाया, जो आज भी लोगों की जुबां पर हैं।
रानी लक्ष्मीबाई से थी प्रभावित
गीतकार इंदीवर के भतीजे अजीत राय ने बताया कि मुंबई में फूफाजी इंदीवर के साथ उनकी कई बार आशा भोसले से मुलाकात हुई। वह अक्सर इंदीवर के साथ गीतों का रियाज करती थीं। उन्होंने बताया कि आशा भोसले रानी लक्ष्मीबाई से खासी प्रभावित थीं। मुलाकातों के दौरान वह झांसी की रानी के बारे में जरूर कुछ न कुछ पूछती थीं। झांसी आने की उन्होंने इच्छा भी जताई थी। एक बार तो उन्होंने सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता ‘चमक उठी सन सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी...’ को भी अपनी आवाज में पिरोने की इच्छा जताई थी, लेकिन यह संयोग बन नहीं पाया।
राजा बुंदेला से नहीं ली थी गाने की फीस
ललितपुर के रहने वाले अभिनेता राजा बुंदेला ने साल 2002 में प्रथा फिल्म का निर्माण किया था। कम बजट की इस फिल्म में वह किसी बड़े गायक को नहीं ले पाए थे। फिल्म की रिलीज से पहले डिस्ट्रीब्यूटर ने बड़े गायक की मांग रख दी। इसके लिए राजा ने बेहद संकोच के साथ आशा भोसले से संपर्क किया। वह खुशी-खुशी गाना गाने के लिए तैयार हो गईं। इसकी उन्होंने कोई फीस नहीं ली। राजा ने बताया कि आशा भोसले के गीत की वजह से उनकी फिल्म को काफी लाभ मिला था। वह महान गायिका के साथ बेहद संवेदनशील इंसान भी थीं।
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श्यामलाल बाबू राय उर्फ इंदीवर की कलम ने एक से बढ़कर एक फिल्मी गीतों को जन्म दिया। उनके लिखे ‘ये मेरा दिल’ (डॉन, 1978), ‘पिया तू अब तो आजा’ (कारवां, 1971), ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ (तीसरी मंजिल, 1966), ‘चुरा लिया है तुमने’ (यादों की बारात, 1973), ‘अभी न जाओ छोड़कर’ (हम दोनों, 1961), ‘कहीं आग लगे’ (तक्षक, 1999) समेत कई यादगार गीतों को आशा भोंसले ने अपनी आवाज से सजाया, जो आज भी लोगों की जुबां पर हैं।
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रानी लक्ष्मीबाई से थी प्रभावित
गीतकार इंदीवर के भतीजे अजीत राय ने बताया कि मुंबई में फूफाजी इंदीवर के साथ उनकी कई बार आशा भोसले से मुलाकात हुई। वह अक्सर इंदीवर के साथ गीतों का रियाज करती थीं। उन्होंने बताया कि आशा भोसले रानी लक्ष्मीबाई से खासी प्रभावित थीं। मुलाकातों के दौरान वह झांसी की रानी के बारे में जरूर कुछ न कुछ पूछती थीं। झांसी आने की उन्होंने इच्छा भी जताई थी। एक बार तो उन्होंने सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता ‘चमक उठी सन सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी...’ को भी अपनी आवाज में पिरोने की इच्छा जताई थी, लेकिन यह संयोग बन नहीं पाया।
राजा बुंदेला से नहीं ली थी गाने की फीस
ललितपुर के रहने वाले अभिनेता राजा बुंदेला ने साल 2002 में प्रथा फिल्म का निर्माण किया था। कम बजट की इस फिल्म में वह किसी बड़े गायक को नहीं ले पाए थे। फिल्म की रिलीज से पहले डिस्ट्रीब्यूटर ने बड़े गायक की मांग रख दी। इसके लिए राजा ने बेहद संकोच के साथ आशा भोसले से संपर्क किया। वह खुशी-खुशी गाना गाने के लिए तैयार हो गईं। इसकी उन्होंने कोई फीस नहीं ली। राजा ने बताया कि आशा भोसले के गीत की वजह से उनकी फिल्म को काफी लाभ मिला था। वह महान गायिका के साथ बेहद संवेदनशील इंसान भी थीं।