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Jhansi News: कोलतार महंगा, 60 करोड़ के टेंडर अटके
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब बुंदेलखंड में सड़क निर्माण कार्यों पर दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से कोलतार महंगा हो गया है, जिससे लोक निर्माण विभाग के 60 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर अटक गए हैं।
झांसी, ललितपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में लोक निर्माण , नगर निगम और सेतु निगम के कई सड़क प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। कुछ कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जबकि कई जगह काम रुकने की स्थिति बन रही है।
अभियंताओं के अनुसार, फरवरी में कोलतार 45-50 हजार रुपये प्रति टन था, जो अब बढ़कर 60-65 हजार रुपये प्रति टन हो गया है। ठेकेदारों का कहना है कि स्वीकृत दरों की तुलना में लागत करीब 10 फीसदी बढ़ चुकी है, जिससे काम करना घाटे का सौदा बन गया है। इसी कारण नए टेंडरों में भी ठेकेदार रुचि नहीं दिखा रहे हैं। घिसौली बाइपास-प्रेमपुर, बिजौली स्टेशन मार्ग, सुकुवां-ढुकुवां मार्ग समेत कई सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इसका असर और बढ़ सकता है।
तीन माह में बढ़ेगा संकट
अप्रैल से जून के बीच सड़क निर्माण का सबसे उपयुक्त समय होता है। यदि इसी दौरान कोलतार महंगा रहा, तो कई प्रोजेक्ट ठप पड़ सकते हैं। अनुमान है कि कीमतें 90 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच सकती हैं।
करारी और मथुरा से होती है आपूर्ति
झांसी में कोलतार की आपूर्ति मुख्य रूप से करारी और मथुरा से होती है। मथुरा का कोलतार अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण अधिक उपयोग में लाया जाता है।
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झांसी, ललितपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में लोक निर्माण , नगर निगम और सेतु निगम के कई सड़क प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। कुछ कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जबकि कई जगह काम रुकने की स्थिति बन रही है।
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अभियंताओं के अनुसार, फरवरी में कोलतार 45-50 हजार रुपये प्रति टन था, जो अब बढ़कर 60-65 हजार रुपये प्रति टन हो गया है। ठेकेदारों का कहना है कि स्वीकृत दरों की तुलना में लागत करीब 10 फीसदी बढ़ चुकी है, जिससे काम करना घाटे का सौदा बन गया है। इसी कारण नए टेंडरों में भी ठेकेदार रुचि नहीं दिखा रहे हैं। घिसौली बाइपास-प्रेमपुर, बिजौली स्टेशन मार्ग, सुकुवां-ढुकुवां मार्ग समेत कई सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इसका असर और बढ़ सकता है।
तीन माह में बढ़ेगा संकट
अप्रैल से जून के बीच सड़क निर्माण का सबसे उपयुक्त समय होता है। यदि इसी दौरान कोलतार महंगा रहा, तो कई प्रोजेक्ट ठप पड़ सकते हैं। अनुमान है कि कीमतें 90 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच सकती हैं।
करारी और मथुरा से होती है आपूर्ति
झांसी में कोलतार की आपूर्ति मुख्य रूप से करारी और मथुरा से होती है। मथुरा का कोलतार अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण अधिक उपयोग में लाया जाता है।