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Jhansi: आसमान पर कोलतार के दाम, कई सड़कों का ठप पड़ा काम, दो माह में तीस हजार रुपये टन तक बढ़ चुका भाव
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sun, 12 Apr 2026 05:03 PM IST
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सार
कोलतार के साथ ही इस्तेमाल होने वाले एलडीओ की लागत भी बढ़ गई है। जिस वजह से बुंदेलखंड में सड़क निर्माण का काम काफी धीमा हो गया है। कई ठेकेदारों ने नुकसान की आशंका के चलते काम बंद करा दिया है।
झांसी-ललितपुर हाईवे।
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विस्तार
पश्चिम एशिया में भले कुछ दिनों के लिए युद्ध थम गया हो लेकिन कोलतार की आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। उसके दाम आसमान छू रहे हैं। उसके साथ एलडीओ (लाइट डीजल ऑयल) भी महंगा होता जा रहा है। इस वजह से बुंदेलखंड में सड़क निर्माण का काम काफी धीमा हो गया है। कई ठेकेदारों ने नुकसान की आशंका के चलते काम बंद करा दिया है। मथुरापुरा से करारी, संपर्क मार्ग, घिसौली बाईपास-प्रेमपुर, बिजौली स्टेशन मार्ग, सुकुवां-ढुकुवां मार्ग समेत कई सड़क निर्माण बीच में फंस गए।
फरवरी से अप्रैल के बीच कोलतार का दाम करीब 30 हजार रुपये प्रति टन बढ़ चुका है। जानकारों ने बताया कि फरवरी में कोलतार का दाम 45-50 हजार रुपये प्रति टन था, जो अब बढ़कर 75 हजार रुपये से अधिक हो गया है। इस कोलतार के यहां तक आने में भी परेशानी हो रही है। कोलतार के साथ ही इस्तेमाल होने वाले एलडीओ की लागत भी बढ़ गई है। फरवरी में जो एलडीओ 10,400 रुपये प्रति ड्रम (200 लीटर) मिलता था, अब उसकी कीमत बढ़कर 14,500 रुपये तक पहुंच गई है। कोलतार में एलडीओ को मिलाकर पतला किया जाता है। इससे कोलतार आसानी से सतह पर फैलता है।
20 फीसदी बढ़ी लागत
कोलतार एवं एलडीओ के दाम बढ़ने से डामरीकरण जैसे कार्य ठेकेदारों के लिए घाटे का सौदा बन गए हैं। जिन ठेकेदारों ने बिलो रेट पर टेंडर लिया है, उनका कहना है कि लागत 20 फीसदी बढ़ गई है। ऐसे में उनका नुकसान बढ़ता जा रहा है। मुख्य अभियंता राजनाथ गुप्ता का कहना है कि अप्रैल से जून तक सड़क निर्माण का सबसे उपयुक्त समय होता है। कोलतार के महंगा होने से कई जगह परेशानी हो रही है। आने वाले समय पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
करारी और मथुरा से होती है आपूर्ति
झांसी में कोलतार की आपूर्ति मुख्य रूप से करारी और मथुरा से होती है। मथुरा का कोलतार अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण अधिक उपयोग में लाया जाता है।
धीमा पड़ा झांसी-ललितपुर हाईवे का डामरीकरण
झांसी-ललितपुर हाईवे पर चल रहे डामरीकरण का काम भी कोलतार न मिलने से धीमा हो गया है। यहां एक छोर से करीब 99 किलोमीटर तक डामरीकरण होना था। दोनों ओर करीब 198 किलोमीटर में डामरीकरण होना है। मार्च में काम शुरू हुआ लेकिन उसके बाद से ही संकट शुरू हो गया। किसी तरह मार्च में काम कराया गया लेकिन अब कोलतार मिल नहीं रहा है। इस वजह से यहां काम धीमा पड़ गया। एनएचएआई अफसरों का भी मानना है कि कोलतार की आपूर्ति न होने की वजह से काम प्रभावित हो रहा है। यह काम जुलाई से पहले पूरा करा लेना है लेकिन जिस तरह की रफ्तार है, उसके मुताबिक समय पर काम पूरा हो पाना मुश्किल दिख रहा है।
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फरवरी से अप्रैल के बीच कोलतार का दाम करीब 30 हजार रुपये प्रति टन बढ़ चुका है। जानकारों ने बताया कि फरवरी में कोलतार का दाम 45-50 हजार रुपये प्रति टन था, जो अब बढ़कर 75 हजार रुपये से अधिक हो गया है। इस कोलतार के यहां तक आने में भी परेशानी हो रही है। कोलतार के साथ ही इस्तेमाल होने वाले एलडीओ की लागत भी बढ़ गई है। फरवरी में जो एलडीओ 10,400 रुपये प्रति ड्रम (200 लीटर) मिलता था, अब उसकी कीमत बढ़कर 14,500 रुपये तक पहुंच गई है। कोलतार में एलडीओ को मिलाकर पतला किया जाता है। इससे कोलतार आसानी से सतह पर फैलता है।
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20 फीसदी बढ़ी लागत
कोलतार एवं एलडीओ के दाम बढ़ने से डामरीकरण जैसे कार्य ठेकेदारों के लिए घाटे का सौदा बन गए हैं। जिन ठेकेदारों ने बिलो रेट पर टेंडर लिया है, उनका कहना है कि लागत 20 फीसदी बढ़ गई है। ऐसे में उनका नुकसान बढ़ता जा रहा है। मुख्य अभियंता राजनाथ गुप्ता का कहना है कि अप्रैल से जून तक सड़क निर्माण का सबसे उपयुक्त समय होता है। कोलतार के महंगा होने से कई जगह परेशानी हो रही है। आने वाले समय पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
करारी और मथुरा से होती है आपूर्ति
झांसी में कोलतार की आपूर्ति मुख्य रूप से करारी और मथुरा से होती है। मथुरा का कोलतार अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण अधिक उपयोग में लाया जाता है।
धीमा पड़ा झांसी-ललितपुर हाईवे का डामरीकरण
झांसी-ललितपुर हाईवे पर चल रहे डामरीकरण का काम भी कोलतार न मिलने से धीमा हो गया है। यहां एक छोर से करीब 99 किलोमीटर तक डामरीकरण होना था। दोनों ओर करीब 198 किलोमीटर में डामरीकरण होना है। मार्च में काम शुरू हुआ लेकिन उसके बाद से ही संकट शुरू हो गया। किसी तरह मार्च में काम कराया गया लेकिन अब कोलतार मिल नहीं रहा है। इस वजह से यहां काम धीमा पड़ गया। एनएचएआई अफसरों का भी मानना है कि कोलतार की आपूर्ति न होने की वजह से काम प्रभावित हो रहा है। यह काम जुलाई से पहले पूरा करा लेना है लेकिन जिस तरह की रफ्तार है, उसके मुताबिक समय पर काम पूरा हो पाना मुश्किल दिख रहा है।