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Jhansi: राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए मास्टर रुद्रनारायण के पौत्र की दावेदारी, ई-मेल से भेजा आवेदन

Sun, 19 Jul 2026 11:53 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Sun, 19 Jul 2026 11:53 AM IST
सार

दूरदर्शन के पूर्व प्रभारी निदेशक मुकेश नारायण सक्सेना लंबे समय से रंगमंच और अभिनय से जुड़े हैं। वर्तमान में वह अग्नि परीक्षा नामक नाट्य कार्यक्रम का लेखन और प्रस्तुतीकरण कर रहे हैं। 
 

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Jhansi: Grandson of Master Rudranarayan stakes claim for the post of Ram Mandir Trust CEO
मुकेश नारायण सक्सेना। - फोटो : स्वयं

विस्तार

क्रांतिकारी मास्टर रुद्रनारायण के पौत्र एवं दूरदर्शन के पूर्व प्रभारी निदेशक मुकेश नारायण सक्सेना ने राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए आवेदन किया है। उन्होंने शनिवार को ई-मेल के माध्यम से अपनी दावेदारी पेश की।
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झांसी के टकसाल मोहल्ला निवासी मुकेश नारायण सक्सेना लंबे समय से रंगमंच और अभिनय से जुड़े हैं। वर्तमान में वह अग्नि परीक्षा नामक नाट्य कार्यक्रम का लेखन और प्रस्तुतीकरण कर रहे हैं। कार्यक्रम का ट्रेलर गीत राम की सिया आएंगी, सिया के राम आएंगे, त्रेता की अयोध्या लाएंगे... जारी हो चुका है। वर्ष 1982 में उन्होंने भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ से डिप्लोमा इन ड्रामेटिक आर्ट्स किया। इसके बाद श्रीराम सेंटर और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में रंगमंच कलाकार के रूप में कार्य किया। वर्ष 1991 में आकाशवाणी ग्वालियर में कार्यक्रम अधिशासी (ड्रामा) बने और 1993 में दूरदर्शन से जुड़ गए। दूरदर्शन में 25 वर्ष तक सेवाएं देने के बाद वर्ष 2018 में उन्होंने प्रभारी निदेशक पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली। इसके बाद से वह कला और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। उनके पुत्र गौरव सक्सेना ने बताया कि शनिवार दोपहर 2:37 बजे उनके पिता ने ई-मेल के माध्यम से राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए आवेदन भेजा। कहा कि अग्नि परीक्षा थिएटर शो भी जल्द लॉच किया जाएगा।
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कौन थे मास्टर रुद्रनारायण
क्रांतिकारी मास्टर रुद्रनारायण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। पेशे से शिक्षक होने के कारण उनके नाम के साथ ''मास्टर'' जुड़ गया। काकोरी कांड के बाद चंद्रशेखर आजाद जब झांसी आए, तब सबसे पहले उनका संपर्क मास्टर रुद्रनारायण से हुआ। बताया जाता है कि उन्होंने आजाद को लंबे समय तक अपने मकान के तहखाने में सुरक्षित शरण दी थी।
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