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Jhansi: मेडिकल कॉलेज प्राचार्य का नया फरमान, ड्यूटी इन और आउट से चिकित्सक असहज
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: दीपक महाजन
Updated Thu, 09 Apr 2026 11:04 AM IST
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सार
डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में वह निर्धारित समय से अधिक, कई बार 12 से 16 घंटे तक लगातार ड्यूटी करते हैं। ऐसे में केवल आठ घंटे की उपस्थिति के आधार पर व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक नहीं है।
मेडिकल कॉलेज, झांसी
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य द्वारा ड्यूटी इन-आउट अनिवार्य करने का आदेश बृहस्पतिवार को चर्चा का केंद्र बना रहा। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि यह व्यवस्था न सिर्फ व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा करेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर डाल सकती है।
सूत्रों के अनुसार, प्राचार्य प्रो. शिव कुमार ने बुधवार को दोपहर में डीन और विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई, जो करीब दो घंटे तक चली। बैठक में डॉक्टरों और जूनियर रेजिडेंट (जेआर) की उपस्थिति ऑनलाइन इन-आउट के माध्यम से दर्ज कराने पर जोर दिया गया। प्राचार्य ने निर्देश दिए कि प्रत्येक चिकित्सक, शिक्षक और जेआर को ड्यूटी पर आने और जाने के समय अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज करनी होगी।
इस पर कुछ चिकित्सकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में वे निर्धारित समय से अधिक, कई बार 12 से 16 घंटे तक लगातार ड्यूटी करते हैं। ऐसे में केवल आठ घंटे की उपस्थिति के आधार पर व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक नहीं है। चिकित्सकों का कहना है कि इमरजेंसी या सर्जरी के दौरान उनकी प्राथमिकता मरीज का इलाज होता है, न कि उपस्थिति दर्ज करना। डॉक्टरों ने यह भी तर्क दिया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की गाइडलाइन के अनुसार दिन में एक बार उपस्थिति दर्ज करना पर्याप्त है। ऐसे में नए आदेश से भ्रम और दिक्कतें बढ़ेंगी। वरिष्ठ चिकित्सकों का मानना है कि इस व्यवस्था को लागू करने से कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
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सूत्रों के अनुसार, प्राचार्य प्रो. शिव कुमार ने बुधवार को दोपहर में डीन और विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई, जो करीब दो घंटे तक चली। बैठक में डॉक्टरों और जूनियर रेजिडेंट (जेआर) की उपस्थिति ऑनलाइन इन-आउट के माध्यम से दर्ज कराने पर जोर दिया गया। प्राचार्य ने निर्देश दिए कि प्रत्येक चिकित्सक, शिक्षक और जेआर को ड्यूटी पर आने और जाने के समय अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज करनी होगी।
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इस पर कुछ चिकित्सकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में वे निर्धारित समय से अधिक, कई बार 12 से 16 घंटे तक लगातार ड्यूटी करते हैं। ऐसे में केवल आठ घंटे की उपस्थिति के आधार पर व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक नहीं है। चिकित्सकों का कहना है कि इमरजेंसी या सर्जरी के दौरान उनकी प्राथमिकता मरीज का इलाज होता है, न कि उपस्थिति दर्ज करना। डॉक्टरों ने यह भी तर्क दिया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की गाइडलाइन के अनुसार दिन में एक बार उपस्थिति दर्ज करना पर्याप्त है। ऐसे में नए आदेश से भ्रम और दिक्कतें बढ़ेंगी। वरिष्ठ चिकित्सकों का मानना है कि इस व्यवस्था को लागू करने से कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।