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Jhansi: नगर आयुक्त ने की सख्ती तो हुआ निगम में डीजल का ‘मीटर डाउन’, 40 फीसदी घटी खपत
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Fri, 06 Feb 2026 11:56 AM IST
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सार
बीते दिसंबर में छोटी-बड़ी 183 गाड़ियों का करीब 30 लाख रुपये तेल का खर्च आया है। जबकि अक्तूबर 2025 में लगभग 50 लाख रुपये डीजल पर खर्च हुए थे।
नगर निगम, झांसी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नगर निगम में अधिकारियों की सख्ती के बाद अब वाहनों की डीजल की खपत में दो महीने में 40 फीसदी तक की कमी आ गई है। बीते दिसंबर में छोटी-बड़ी 183 गाड़ियों का करीब 30 लाख रुपये तेल का खर्च आया है। जबकि अक्तूबर 2025 में लगभग 50 लाख रुपये डीजल पर खर्च हुए थे।
महानगर की सफाई के लिए नगर निगम में रोबोट मशीन, डंपर से लेकर जेसीबी तक है। जरूरत के अनुसार इन्हें चलाया जाता है। ऐसे वाहनों की संख्या 154 है। इसके अलावा अधिकारियों के आवागमन के लिए भी 29 वाहनों का इस्तेमाल होता है। नगर निगम पर 30 करोड़ से अधिक की उधारी हो चुकी है। ऐसे में निगम प्रशासन का पूरा फोकस बेवजह के खर्चों को कम करके, गड़बड़ियों का पता लगाकर उन्हें दुरुस्त करने पर है ताकि बकायेदारी कम हो सके। इसलिए जिन मदों में हर महीने सबसे ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है, उसकी निगरानी शुरू कराकर नगर आयुक्त ने सख्ती की। इसी के बाद अब डीजल की खपत में लगातार कमी देखने को मिल रही है। हालांकि, इसके पीछे स्टाफ की ओर से ये भी तर्क दिया जा रहा है कि पिछले साल अक्तूबर तक फॉगिंग मशीन चली। निगम में 42 फॉगिंग मशीनें हैं। इन्हें क्रमवार वार्डों में मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिए दवा छिड़कने के लिए भेजा जाता है। ये दवा डीजल में मिलाकर छिड़की जाती है। ऐसे में उस समय डीजल की खपत ज्यादा हुई। ये भी कहा गया कि फॉगिंग कराने में ही 13 से 14 लाख का डीजल लगता है। हालांकि, इन दावों के बीच नवंबर में फॉगिंग न कराने के बावजूद 39 लाख रुपये डीजल का खर्च आया। जबकि दिसंबर में डीजल खर्च का मीटर घटकर 30 लाख पर आ गया। वहीं, पार्षद हरिओम मिश्रा ने डीजल के मुद्दे पर नगर आयुक्त को प्रार्थनापत्र सौंपा। कहा कि जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
म्यूजियम में भी सख्ती के बाद आई खपत में बड़ी गिरावट
निगम प्रशासन की सख्ती के बाद पिछले दिनों स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत बने मेजर ध्यानचंद और स्पेस म्यूजियम में भी डीजल की खपत में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। अप्रैल 2025 में जहां दोनों संग्रहालयों में 5700 लीटर डीजल की खपत हो रही थी। बाद में ये घटकर 600 से 700 लीटर प्रतिमाह तक आ गई। यानी कि खपत में लगभग आठ गुना कमी आई।
जरूरत के अनुसार सभी वाहनों को डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही इसकी भी निगरानी की जा रही है कि बिना उपयोग के वाहन न चलें। ताकि बेवजह डीजल का खर्च न आए। दिसंबर में वाहनों में करीब 30 लाख रुपये का डीजल खर्च हुआ है, जो अक्तूबर में लगभग 50 लाख था। - आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त।
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महानगर की सफाई के लिए नगर निगम में रोबोट मशीन, डंपर से लेकर जेसीबी तक है। जरूरत के अनुसार इन्हें चलाया जाता है। ऐसे वाहनों की संख्या 154 है। इसके अलावा अधिकारियों के आवागमन के लिए भी 29 वाहनों का इस्तेमाल होता है। नगर निगम पर 30 करोड़ से अधिक की उधारी हो चुकी है। ऐसे में निगम प्रशासन का पूरा फोकस बेवजह के खर्चों को कम करके, गड़बड़ियों का पता लगाकर उन्हें दुरुस्त करने पर है ताकि बकायेदारी कम हो सके। इसलिए जिन मदों में हर महीने सबसे ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है, उसकी निगरानी शुरू कराकर नगर आयुक्त ने सख्ती की। इसी के बाद अब डीजल की खपत में लगातार कमी देखने को मिल रही है। हालांकि, इसके पीछे स्टाफ की ओर से ये भी तर्क दिया जा रहा है कि पिछले साल अक्तूबर तक फॉगिंग मशीन चली। निगम में 42 फॉगिंग मशीनें हैं। इन्हें क्रमवार वार्डों में मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिए दवा छिड़कने के लिए भेजा जाता है। ये दवा डीजल में मिलाकर छिड़की जाती है। ऐसे में उस समय डीजल की खपत ज्यादा हुई। ये भी कहा गया कि फॉगिंग कराने में ही 13 से 14 लाख का डीजल लगता है। हालांकि, इन दावों के बीच नवंबर में फॉगिंग न कराने के बावजूद 39 लाख रुपये डीजल का खर्च आया। जबकि दिसंबर में डीजल खर्च का मीटर घटकर 30 लाख पर आ गया। वहीं, पार्षद हरिओम मिश्रा ने डीजल के मुद्दे पर नगर आयुक्त को प्रार्थनापत्र सौंपा। कहा कि जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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म्यूजियम में भी सख्ती के बाद आई खपत में बड़ी गिरावट
निगम प्रशासन की सख्ती के बाद पिछले दिनों स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत बने मेजर ध्यानचंद और स्पेस म्यूजियम में भी डीजल की खपत में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। अप्रैल 2025 में जहां दोनों संग्रहालयों में 5700 लीटर डीजल की खपत हो रही थी। बाद में ये घटकर 600 से 700 लीटर प्रतिमाह तक आ गई। यानी कि खपत में लगभग आठ गुना कमी आई।
जरूरत के अनुसार सभी वाहनों को डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही इसकी भी निगरानी की जा रही है कि बिना उपयोग के वाहन न चलें। ताकि बेवजह डीजल का खर्च न आए। दिसंबर में वाहनों में करीब 30 लाख रुपये का डीजल खर्च हुआ है, जो अक्तूबर में लगभग 50 लाख था। - आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त।
