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Jhansi: नगर निगम की दुकानों का ही चार करोड़ किराया दबाए दुकानदार, सूची हो रही तैयार, शुरू होगी कार्रवाई
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Mon, 02 Feb 2026 11:09 AM IST
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सार
नगर निगम को किराये से होने वाली आय लगातार कम होने लगी तो अधिकारियों ने दुकानों से संबंधित पूरा ब्योरा तलब कर लिया। पता चला कि लगभग चार करोड़ रुपये किराया दुकानदारों ने जमा नहीं किया है।
नगर निगम, झांसी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नगर निगम की दुकानों का ही लगभग चार करोड़ रुपये किराया दुकानदार दबाए बैठे हैं। कई ने तो वर्षों से किराया जमा नहीं किया है। अब ऐसे दुकानदारों की सूची निगम प्रशासन तैयार करवा रहा है। जल्द ही इन्हें नोटिस भेजे जाएंगे। फिर भी किराया जमा नहीं करते हैं तो कार्रवाई शुरू होगी।
महानगर में तिलक मार्केट, सुभाषगंज, नया और पुराना बस स्टैंड, शिवाजी नगर, नई तहसील, सीपरी बाजार आदि जगहों पर नगर निगम की लगभग 1200 दुकानें हैं, जिन्हें नगर निगम ने किराये पर दुकानदारों को व्यापार करने के लिए दिया है। कई दुकानें मूल आवंटियों ने किरायेदारों को दे दी हैं, जिन्हें सिकमी किरायेदार कहा जाता है। इन दुकानों से मिलने वाला किराया भी नगर निगम की आय का मुख्य स्रोत है। विकास कार्य कराने में इस पैसे को भी खर्च किया जाता है मगर कई दुकानदार वर्षों से किराया जमा ही नहीं कर रहे हैं।
नगर निगम को किराये से होने वाली आय लगातार कम होने लगी तो अधिकारियों ने दुकानों से संबंधित पूरा ब्योरा तलब कर लिया। पता चला कि लगभग चार करोड़ रुपये किराया दुकानदारों ने जमा नहीं किया है। ऐसे सभी दुकानदारों की सूची तैयार करने के निर्देश संपत्ति विभाग को नगर आयुक्त ने दिए हैं।
सवा साल पहले बढ़ाया गया था किराया
नगर निगम की अक्तूबर 2024 में सदन की बैठक हुई थी, इसमें दुकानों का किराया बढ़ाया था। हालांकि, कुछ दुकानदार बढ़े हुए किराये के विरोध में हैं। इसलिए भी वह किराया जमा नहीं कर रहे हैं। जबकि, निगम प्रशासन तर्क दे रहा है कि तीन-चार साल पहले नई तहसील पर जो दुकानें बनाई गई हैं, उनके सापेक्ष पुरानी दुकानों से बहुत कम किराया मिल रहा है।
जो दुकानदार किराया जमा नहीं कर रहे हैं, उनकी सूची तैयार करवाई जा रही है। इन सभी को किराया जमा करने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। किराया जमा नहीं करते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। - आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त।
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महानगर में तिलक मार्केट, सुभाषगंज, नया और पुराना बस स्टैंड, शिवाजी नगर, नई तहसील, सीपरी बाजार आदि जगहों पर नगर निगम की लगभग 1200 दुकानें हैं, जिन्हें नगर निगम ने किराये पर दुकानदारों को व्यापार करने के लिए दिया है। कई दुकानें मूल आवंटियों ने किरायेदारों को दे दी हैं, जिन्हें सिकमी किरायेदार कहा जाता है। इन दुकानों से मिलने वाला किराया भी नगर निगम की आय का मुख्य स्रोत है। विकास कार्य कराने में इस पैसे को भी खर्च किया जाता है मगर कई दुकानदार वर्षों से किराया जमा ही नहीं कर रहे हैं।
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नगर निगम को किराये से होने वाली आय लगातार कम होने लगी तो अधिकारियों ने दुकानों से संबंधित पूरा ब्योरा तलब कर लिया। पता चला कि लगभग चार करोड़ रुपये किराया दुकानदारों ने जमा नहीं किया है। ऐसे सभी दुकानदारों की सूची तैयार करने के निर्देश संपत्ति विभाग को नगर आयुक्त ने दिए हैं।
सवा साल पहले बढ़ाया गया था किराया
नगर निगम की अक्तूबर 2024 में सदन की बैठक हुई थी, इसमें दुकानों का किराया बढ़ाया था। हालांकि, कुछ दुकानदार बढ़े हुए किराये के विरोध में हैं। इसलिए भी वह किराया जमा नहीं कर रहे हैं। जबकि, निगम प्रशासन तर्क दे रहा है कि तीन-चार साल पहले नई तहसील पर जो दुकानें बनाई गई हैं, उनके सापेक्ष पुरानी दुकानों से बहुत कम किराया मिल रहा है।
जो दुकानदार किराया जमा नहीं कर रहे हैं, उनकी सूची तैयार करवाई जा रही है। इन सभी को किराया जमा करने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। किराया जमा नहीं करते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। - आकांक्षा राणा, नगर आयुक्त।
