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Jhansi News: निकल पड़ी चीखें, रेल ट्रैक पर पड़ी थीं लाशें
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Mon, 15 Jun 2026 02:30 AM IST
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झांसी। ट्रेन से हादसे के बाद लोगों के बाद चीख पुकार मच गई। रेल ट्रैक के बीचों-बीच और किनारे शव पड़े रहे। प्रत्यक्षदर्शियों ने घटना को भयावह और रूह कंपा देने वाला बताया। पातालकोट एक्सप्रेस में सवार यात्रियों के अनुसार पातालकोट एक्सप्रेस तेज गति से वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी की ओर बढ़ रही थी। ट्रेन के चालक ने यात्रियों को देख चेतावनी के लिए हॉर्न बजाया और घटना के बाद इमरजेंसी ब्रेक लगाकर रोक दिया।
खजुराहो से चलकर उदयपुर की ओर जाने वाली उदयपुर इंटरसिटी (19665) वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी 1:44 पर आकर दोपहर 2:00 बजे आगरा की ओर रवाना हुई थी। ट्रेन मुरैना 3:56 पर पहुंचकर 4:02 बजे रवाना हुई थी। इसी बीच हेतमपुर स्टेशन के पास ट्रेन से उतरकर कुछ लोग ट्रैक पर खड़े हुए थे। उधर वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी की ओर आने वाली फिरोजपुर से सिवनी जाने वाली पातालकोट एक्सप्रेस (20424) आगरा से अपने निर्धारित समय से सवा घंटे देरी से पहुंचकर वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन की ओर अपनी तेज गति से बढ़ रही थी।
ट्रेन के झांसी आने के बाद इंजन के पीछे के जनरल कोच में सवार मथुरा निवासी अनिल कुमार ने बताया कि हेतमपुर स्टेशन के पास हादसे के बाद झटके ट्रेन रुक गई तब चीख पुकार सुनकर उन्हें इस घटना की जानकारी हुई। नीचे उतरकर देखा तो कुछ लाशें ट्रैक के बीच में थी तो कुछ लाइन किनारें। इसी प्रकार से हजरत निजामुद्दीन से भोपाल के लिए यात्रा कर रहे भोपाल निवासी रवि कहार ने बताया कि ट्रेन के रुकने के बाद देखा तो ट्रैक किनारे शवों के कपड़े भी पड़े और क्षत-विक्षत अवस्था में शव पड़े थे। घटना के बाद चारों ओर चीख पुकार मच गई थी।
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हॉर्न को सुन कई यात्रियों ने ट्रैक से हटकर बचाई जान
पातालकोट लेकर झांसी आ रहे चालक दल के पायलट आरपी मौर्या इंजन नंबर 45049 में सवार थे और ट्रेन को लेकर झांसी की ओेर आ रहे थे। उन्होंने ट्रैक पर यात्रियों को देख ट्रेन का हॉर्न चेतावनी के लिए कई बार बजाया। कुछ लोग सुनकर तो हट गए थे पर कुछ ट्रैक पर होने के कारण चपेट में आ गए थे। हादसे के पहले चालक ने इमरजेंसी ब्रेक का भी इस्तेमाल भी किया पर गति तेज होने के कारण ट्रेन हादसे के बाद ही रुकी।
एकाएक ट्रेन रुकी, निकल पड़ी चीख
ट्रेन में मैं इंजन के पीछे के दूसरी बोगी में मथुरा से सवार हुआ था, ट्रेन एकाएक रुकी थी। कोच आगे निकल गया था। खिड़की के पास बैठा था। चीख-पुकार सुनकर झांक कर देखा तब जाकर घटना की जानकारी हुई थी।
- जगदीश, मथुरा
ट्रैक के बीच में पड़ीं थी लाशें
छिंदवाड़ा के लिए पातालकोट एक्सप्रेस में यात्रा के लिए हजरत निजामुद्दीन से सवार हुए थे। हेतमपुर स्टेशन के पास झटके से ट्रेन रुकी थी। गेट पर खड़े होने के कारण उतरकर देखा तो ट्रैक के किनारे और बीच में लाशें थीं।
- शिवा, छिंदवाड़ा
कंपा देने वाला था मंजर
हादसे के बाद जो मंजर था वह रुह कंपा देने के साथ ही भयावह था। घटना के बाद ट्रेन घटनास्थल पर काफी देर तक रुकी रही थी। अगले स्टेशन पर सूचना देने के बाद आरपीएफ और जीआरपी मौके पर पहुंच गई थी।
- गोविंदा, छिंदवाड़ा
यात्रियों की भीड़ देख हादसा पता चला
यात्रियों का जब जमावड़ा हो गया तब जाकर घटना की जानकारी हुई। मौजूद यात्री आपस में बातचीत कर रहे थे कि इंजन के पीछे दूसरे वाले जनरल कोच की चपेट में आकर हादसा हुआ है। उस कोच में मैं भी था।
- संत कुमार, छिंदवाड़ा
खजुराहो से चलकर उदयपुर की ओर जाने वाली उदयपुर इंटरसिटी (19665) वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी 1:44 पर आकर दोपहर 2:00 बजे आगरा की ओर रवाना हुई थी। ट्रेन मुरैना 3:56 पर पहुंचकर 4:02 बजे रवाना हुई थी। इसी बीच हेतमपुर स्टेशन के पास ट्रेन से उतरकर कुछ लोग ट्रैक पर खड़े हुए थे। उधर वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी की ओर आने वाली फिरोजपुर से सिवनी जाने वाली पातालकोट एक्सप्रेस (20424) आगरा से अपने निर्धारित समय से सवा घंटे देरी से पहुंचकर वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन की ओर अपनी तेज गति से बढ़ रही थी।
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ट्रेन के झांसी आने के बाद इंजन के पीछे के जनरल कोच में सवार मथुरा निवासी अनिल कुमार ने बताया कि हेतमपुर स्टेशन के पास हादसे के बाद झटके ट्रेन रुक गई तब चीख पुकार सुनकर उन्हें इस घटना की जानकारी हुई। नीचे उतरकर देखा तो कुछ लाशें ट्रैक के बीच में थी तो कुछ लाइन किनारें। इसी प्रकार से हजरत निजामुद्दीन से भोपाल के लिए यात्रा कर रहे भोपाल निवासी रवि कहार ने बताया कि ट्रेन के रुकने के बाद देखा तो ट्रैक किनारे शवों के कपड़े भी पड़े और क्षत-विक्षत अवस्था में शव पड़े थे। घटना के बाद चारों ओर चीख पुकार मच गई थी।
हॉर्न को सुन कई यात्रियों ने ट्रैक से हटकर बचाई जान
पातालकोट लेकर झांसी आ रहे चालक दल के पायलट आरपी मौर्या इंजन नंबर 45049 में सवार थे और ट्रेन को लेकर झांसी की ओेर आ रहे थे। उन्होंने ट्रैक पर यात्रियों को देख ट्रेन का हॉर्न चेतावनी के लिए कई बार बजाया। कुछ लोग सुनकर तो हट गए थे पर कुछ ट्रैक पर होने के कारण चपेट में आ गए थे। हादसे के पहले चालक ने इमरजेंसी ब्रेक का भी इस्तेमाल भी किया पर गति तेज होने के कारण ट्रेन हादसे के बाद ही रुकी।
एकाएक ट्रेन रुकी, निकल पड़ी चीख
ट्रेन में मैं इंजन के पीछे के दूसरी बोगी में मथुरा से सवार हुआ था, ट्रेन एकाएक रुकी थी। कोच आगे निकल गया था। खिड़की के पास बैठा था। चीख-पुकार सुनकर झांक कर देखा तब जाकर घटना की जानकारी हुई थी।
- जगदीश, मथुरा
ट्रैक के बीच में पड़ीं थी लाशें
छिंदवाड़ा के लिए पातालकोट एक्सप्रेस में यात्रा के लिए हजरत निजामुद्दीन से सवार हुए थे। हेतमपुर स्टेशन के पास झटके से ट्रेन रुकी थी। गेट पर खड़े होने के कारण उतरकर देखा तो ट्रैक के किनारे और बीच में लाशें थीं।
- शिवा, छिंदवाड़ा
कंपा देने वाला था मंजर
हादसे के बाद जो मंजर था वह रुह कंपा देने के साथ ही भयावह था। घटना के बाद ट्रेन घटनास्थल पर काफी देर तक रुकी रही थी। अगले स्टेशन पर सूचना देने के बाद आरपीएफ और जीआरपी मौके पर पहुंच गई थी।
- गोविंदा, छिंदवाड़ा
यात्रियों की भीड़ देख हादसा पता चला
यात्रियों का जब जमावड़ा हो गया तब जाकर घटना की जानकारी हुई। मौजूद यात्री आपस में बातचीत कर रहे थे कि इंजन के पीछे दूसरे वाले जनरल कोच की चपेट में आकर हादसा हुआ है। उस कोच में मैं भी था।
- संत कुमार, छिंदवाड़ा