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Jhansi News: उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने फसल बीमा कंपनी को 2.42 लाख रुपये देने का दिया आदेश
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
झांसी। तीन साल पहले ओले से बर्बाद हुई फसल का एग्रीकल्चर बीमा कंपनी ने मुआवजा कम दिया। किसान ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद लगाया। आयोग ने सुनवाई करते हुए क्षतिपूर्ति के रूप में 2.42 लाख रुपये मय ब्याज के देने का आदेश दिया।
एडवोकेट गणेश खरे ने दो साल पहले आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया था। इसमें उल्लेख किया गया कि बरुआसागर के हरपुरा गांव के किसान ओम प्रकाश मिश्रा ने एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लखनऊ से पीएम फसल बीमा योजना के तहत फसल का बीमा कराया था लेकिन 20 मार्च 2023 को ओले पड़ गए। ऐसे में पांच हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो गई थी। किसान का सेंट्रल बैंक शाखा गुरसराय का किसान क्रेडिट कार्ड था।
किसान के खाते से बीमा की किस्तें कट रही थींं। फसल नष्ट होने के बाद कंपनी से क्षतिपूर्ति राशि मांगी गई तो केवल 24 हजार 886 रुपये दिए गए जबकि दो लाख 67 हजार 598 रुपये देनी चाहिए थी। इसीलिए मामला आयोग में प्रस्तुत किया गया।
आयोग के अध्यक्ष अमरपाल सिंह और सदस्यगण देवेश अग्निहोत्री व शशि प्रभा जैन ने गहराई से दस्तावेज का परीक्षण किया तो पाया कि बीमा कंपनी ने बिना मौके का मुआयना किए किसान को आंशिक रूप से मुआवजे की राशि दी। निर्णय देते हुए बीमा कंपनी को शेष राशि के रूप में किसान को 2 लाख 42 हजार रुपये मय ब्याज के देने का आदेश दिया।
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झांसी। तीन साल पहले ओले से बर्बाद हुई फसल का एग्रीकल्चर बीमा कंपनी ने मुआवजा कम दिया। किसान ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद लगाया। आयोग ने सुनवाई करते हुए क्षतिपूर्ति के रूप में 2.42 लाख रुपये मय ब्याज के देने का आदेश दिया।
एडवोकेट गणेश खरे ने दो साल पहले आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया था। इसमें उल्लेख किया गया कि बरुआसागर के हरपुरा गांव के किसान ओम प्रकाश मिश्रा ने एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लखनऊ से पीएम फसल बीमा योजना के तहत फसल का बीमा कराया था लेकिन 20 मार्च 2023 को ओले पड़ गए। ऐसे में पांच हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो गई थी। किसान का सेंट्रल बैंक शाखा गुरसराय का किसान क्रेडिट कार्ड था।
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किसान के खाते से बीमा की किस्तें कट रही थींं। फसल नष्ट होने के बाद कंपनी से क्षतिपूर्ति राशि मांगी गई तो केवल 24 हजार 886 रुपये दिए गए जबकि दो लाख 67 हजार 598 रुपये देनी चाहिए थी। इसीलिए मामला आयोग में प्रस्तुत किया गया।
आयोग के अध्यक्ष अमरपाल सिंह और सदस्यगण देवेश अग्निहोत्री व शशि प्रभा जैन ने गहराई से दस्तावेज का परीक्षण किया तो पाया कि बीमा कंपनी ने बिना मौके का मुआयना किए किसान को आंशिक रूप से मुआवजे की राशि दी। निर्णय देते हुए बीमा कंपनी को शेष राशि के रूप में किसान को 2 लाख 42 हजार रुपये मय ब्याज के देने का आदेश दिया।
