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Kannauj News: 262 कूड़ा निस्तारण केंद्र बंद, 41 करोड़ रुपये बर्बाद

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2026 11:34 PM IST
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262 waste disposal centers closed, Rs 41 crore wasted
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कन्नौज। स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांवों को कचरा मुक्त करने का दावा जिले में कागजी साबित हो रहा है। पंचायती राज विभाग की लापरवाही से 262 रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) बंद पड़े हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ये केंद्र कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। इससे सरकारी बजट की बर्बादी हो रही है। जिले में कुल 675 कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाए गए थे, जिनमें से केवल 413 ही संचालित हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 262 केंद्रों पर ताला लटका है, जिसका सीधा असर गांवों की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत इन पर 41 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। विभाग 413 केंद्रों का संचालन कर अपनी पीठ थपथपा रहा है।
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गांवों में कूड़े के ढेर लगे हैं क्योंकि विभाग इन्हें चालू करने के बजाय कबाड़ होने दे रहा है। ताला बंद होने से मशीनों और इमारतों को नुकसान हो रहा है, जिसकी भरपाई जनता की जेब से होगी। पंचायती राज विभाग 84 लाख रुपये की वार्षिक आमदनी का दावा करता है। जिले की 499 ग्राम पंचायतों में से केवल 278 में ही कूड़ा ढोने वाले रिक्शे उपलब्ध हैं।
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खांड़ेदेवर स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र शोपीस बना है। वहां चेंबर होने के बावजूद संचालन नहीं हुआ। उमर्दा ब्लॉक के सुखी स्थित आरआरसी का गेट टूटा है और जमीन धसक रही है। इससे नींव कमजोर हो रही है। अमोलर पंचायत में आरआरसी पर ताला लगा है और छह माह से कूड़ा कलेक्शन बंद है, जिससे 13 गांवों में गंदगी फैली है। हसेरन के नादेमऊ स्थित केंद्र में ताला लटका रहता है और गंदगी फैली है। गुगरापुर और सौरिख देहात के केंद्रों पर भी ताले लटके हैं और जंग खा चुके हैं, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
प्लास्टिक निस्तारण और अधिकारियों का बयान
जिले में तीन प्लास्टिक डिस्पोजल यूनिट लगाई गई हैं, जिनमें से केवल बहादुरपुर मझिगवां की यूनिट ही चालू है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक मयंक कुमार का कहना है कि कूड़े को छांटकर कबाड़ी को बेचा जाता है और प्लास्टिक को बहादुरपुर मझिगवां संयंत्र पर भेजकर दाना बनाया जाता है। जिला पंचायत राज अधिकारी राजेंद्र प्रकाश ने बताया कि 675 आरआरसी में से 413 संचालित हैं और सभी बंद केंद्रों को जल्द चालू कराने के निर्देश दिए गए हैं। सिकंदरपुर स्थित एमआरएफ सेंटर भी खाली पड़ा है और देख-रेख के अभाव में बदहाल हो चुका है।
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