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Kannauj News: फिटर ट्रेड से आईटीआई कर छोटे से गांव से निकलकर तय किया स्लोवाकिया का सफर
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कन्नौज। हरदोई के मोहन मिश्रा को स्लोवाकिया की जैगुआर लैंड रोवर कंपनी में सालाना 20 लाख रुपये का पैकेज मिला है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कड़ी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। मोहन ने कन्नौज में अपनी ननिहाल में रहकर पढ़ाई की और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया।
मोहन ने लखनऊ में टाटा मोटर्स से दो साल का डिप्लोमा भी किया। इसके बाद 2023 में कैंपस चयन के माध्यम से उनका चयन स्लोवाकिया की कंपनी में हुआ। मोहन मूल रूप से हरदोई के मल्लावां क्षेत्र के बंदीपुर गांव के निवासी हैं। वह कक्षा तीन उत्तीर्ण करने के बाद कन्नौज के ठठिया क्षेत्र के कृपालपुरवा स्थित अपनी ननिहाल आ गए थे। उनके मामा शिवपूजन और कमलेश अवस्थी ने उनकी पढ़ाई में पूरा सहयोग किया। मोहन ने वर्ष 2017 में हाईस्कूल में 82 फीसदी अंक प्राप्त किए थे।
वर्ष 2018 में मोहन के पिता पंकज मिश्रा का निधन हो गया था। इस दुखद घटना के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। पिता की तेरहवीं के तीन दिन बाद 16 जनवरी 2019 से इंटरमीडिएट की परीक्षा शुरू हुई। इसमें उन्होंने 72 फीसदी अंक प्राप्त किए। कोरोना महामारी के दौर के बाद उन्होंने आईटीआई से फिटर व्यवसाय में प्रशिक्षण लिया। आईटीआई में शिक्षक मयंक यादव ने भी उनका विशेष मार्गदर्शन किया।
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मोहन के परिवार में मां विनीता मिश्रा और छोटा भाई पारस मिश्रा हैं। पारस इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे हैं और मां गृहिणी है। बड़े बेटे का स्लोवाकिया में कंपनी में चयन होने की खुशी तो मां की आंखों में साफ दिखाई देती है, लेकिन बेटे के दूर जाने का गम भी मां को है, लेकिन बेटे की सफलता से वह काफी खुश हैं।
मोहन ने लखनऊ में टाटा मोटर्स से दो साल का डिप्लोमा भी किया। इसके बाद 2023 में कैंपस चयन के माध्यम से उनका चयन स्लोवाकिया की कंपनी में हुआ। मोहन मूल रूप से हरदोई के मल्लावां क्षेत्र के बंदीपुर गांव के निवासी हैं। वह कक्षा तीन उत्तीर्ण करने के बाद कन्नौज के ठठिया क्षेत्र के कृपालपुरवा स्थित अपनी ननिहाल आ गए थे। उनके मामा शिवपूजन और कमलेश अवस्थी ने उनकी पढ़ाई में पूरा सहयोग किया। मोहन ने वर्ष 2017 में हाईस्कूल में 82 फीसदी अंक प्राप्त किए थे।
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वर्ष 2018 में मोहन के पिता पंकज मिश्रा का निधन हो गया था। इस दुखद घटना के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। पिता की तेरहवीं के तीन दिन बाद 16 जनवरी 2019 से इंटरमीडिएट की परीक्षा शुरू हुई। इसमें उन्होंने 72 फीसदी अंक प्राप्त किए। कोरोना महामारी के दौर के बाद उन्होंने आईटीआई से फिटर व्यवसाय में प्रशिक्षण लिया। आईटीआई में शिक्षक मयंक यादव ने भी उनका विशेष मार्गदर्शन किया।
मोहन के परिवार में मां विनीता मिश्रा और छोटा भाई पारस मिश्रा हैं। पारस इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे हैं और मां गृहिणी है। बड़े बेटे का स्लोवाकिया में कंपनी में चयन होने की खुशी तो मां की आंखों में साफ दिखाई देती है, लेकिन बेटे के दूर जाने का गम भी मां को है, लेकिन बेटे की सफलता से वह काफी खुश हैं।