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Kannauj News: पति की शिकायत पर जांच, अंकपत्र फर्जी मिलने पर शिक्षिका हुई थी बर्खास्त
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सौरिख। फर्जी अंकपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाली एक शिक्षिका को 10 साल बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। लाली उर्फ सोनिया नाम की यह शिक्षिका वर्ष 2016 में बर्खास्त होने के बाद से फरार चल रही थी। पुलिस ने उसे शनिवार को सिकंदरपुर अंडरपास के पास से पकड़ा और न्यायालय में पेश किया। पति की शिकायत के बाद मामले की जांच की गई थी।
लाली उर्फ सोनिया की नियुक्ति वर्ष 2008 में विकास खंड सौरिख के मझूपूर स्थित प्राथमिक स्कूल में हुई थी। औरैया जनपद के अजीतमल क्षेत्र के जगतपुर गांव की निवासी लाली उर्फ सोनिया के पति धर्मेंद्र सिंह से अनबन चल रही थी। धर्मेंद्र सिंह ने शिक्षिका के अंकपत्र फर्जी होने की शिकायत शिक्षा विभाग में की थी। वर्ष 2016 में तत्कालीन बीईओ ने शिकायत के आधार पर जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद शिक्षिका को बर्खास्त कर दिया गया। धोखाधड़ी की प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। बर्खास्तगी और प्राथमिकी के बाद से ही शिक्षिका फरार थी। पुलिस ने शनिवार को उसे सिकंदरपुर अंडरपास के पास से गिरफ्तार किया। बीएसए संदीप कुमार ने बताया कि फर्जी अंकपत्र मिलने पर शिक्षिका को बर्खास्त किया गया था। तत्कालीन बीईओ ने ही प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
शिक्षिका की गिरफ्तारी के बाद शिक्षा विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग अब नियुक्ति से संबंधित अभिलेखों और पूरे मामले की फाइल खंगाल रहा है। चर्चा है कि विभाग यह भी जांच करेगा कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान सत्यापन में कोई लापरवाही तो नहीं हुई थी।
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10 साल तक पुलिस को चकमा देती रही शिक्षिका
वर्ष 2016 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपी शिक्षिका की तलाश में थी लेकिन 10 साल तक शिक्षिका पुलिस को चकमा देती रही।
लाली उर्फ सोनिया की नियुक्ति वर्ष 2008 में विकास खंड सौरिख के मझूपूर स्थित प्राथमिक स्कूल में हुई थी। औरैया जनपद के अजीतमल क्षेत्र के जगतपुर गांव की निवासी लाली उर्फ सोनिया के पति धर्मेंद्र सिंह से अनबन चल रही थी। धर्मेंद्र सिंह ने शिक्षिका के अंकपत्र फर्जी होने की शिकायत शिक्षा विभाग में की थी। वर्ष 2016 में तत्कालीन बीईओ ने शिकायत के आधार पर जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद शिक्षिका को बर्खास्त कर दिया गया। धोखाधड़ी की प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। बर्खास्तगी और प्राथमिकी के बाद से ही शिक्षिका फरार थी। पुलिस ने शनिवार को उसे सिकंदरपुर अंडरपास के पास से गिरफ्तार किया। बीएसए संदीप कुमार ने बताया कि फर्जी अंकपत्र मिलने पर शिक्षिका को बर्खास्त किया गया था। तत्कालीन बीईओ ने ही प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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शिक्षिका की गिरफ्तारी के बाद शिक्षा विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग अब नियुक्ति से संबंधित अभिलेखों और पूरे मामले की फाइल खंगाल रहा है। चर्चा है कि विभाग यह भी जांच करेगा कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान सत्यापन में कोई लापरवाही तो नहीं हुई थी।
10 साल तक पुलिस को चकमा देती रही शिक्षिका
वर्ष 2016 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपी शिक्षिका की तलाश में थी लेकिन 10 साल तक शिक्षिका पुलिस को चकमा देती रही।