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Kannauj News: उपभोक्ता अदालत का भवन जर्जर
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कन्नौज। तीन से पांच माह में न्याय देने का दावा करने वाली उपभोक्ता अदालत का भवन जर्जर है। अध्यक्ष की नियुक्ति न होने के कारण फाइलों की पोटली मोटी होती जा रही है। सुनवाई व निस्तारण न होने से वादकारी परेशान हैं।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की जर्जर बिल्डिंग की छत से बरसात में पानी टपकता है। जगह-जगह लेंटर टूट चुका है, दीवारों में दरारें आ गई हैं, जिनसे पानी अंदर घुसता है। इस कारण पत्रावलियां खराब हो जाती हैं। उच्चाधिकारियों ने निरीक्षण कर भवन की स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था का भरोसा दिया। विभागीय जिम्मेदार किराए की जगह नहीं तलाश पाए। वहीं कुछ अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रस्तावित नया भवन बनाने विकल्प के तौर पर तहसील में नियमित सुनवाई नहीं हो सकी।
औरैया की उपभोक्ता अदालत के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्रा की संबद्धता भी समाप्त कर दी गई, तब से अदालत औपचारिक तौर पर खुल रही है। मंगलवार को नए अध्यक्ष चार्ज ले सकते हैं, इसके बाद प्रकरणों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद थी। हालांकि कर्मचारी जर्जर भवन में काम करने को तैयार नहीं है, इसलिए वादकारियों काे राहत मिलने की फिलहाल उम्मीद नहीं है। वरिष्ठ सदस्य न्यायाधीश वंदना मिश्रा ने बताया कि एटा से अध्यक्ष् योगेंद्रराम गुप्ता को संबद्ध किया गया है, वह जल्द ही चार्ज ले लेंगे। अभी अदालत में 371 वाद लंबित हैं, इनमें से 45 बाद साल से अधिक पुराने हाे चुके हैं, जबकि 108 वाद ऐसे हैं जो तीन साल से अधिक के हो चुके हैं। जिनके फिलहाल निस्तारण की कोई उम्मीद नजर नहीं आती, प्रस्तावित नए भवन को बनने में काफी वक्त लगेगा।
तीन से पांच माह में होना चाहिए निस्तारण
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा (7) के अनुसार सामान्य मामले तीन माह व जांच आदि से जुड़े मामलों का निस्तारण पांच माह में किया जाना चाहिए, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल विपरीत है। करीब चार माह से अदालत में कोेई निर्णय नहीं हुआ है। साथ ही सुरक्षित स्थान मिलने तक अदालत का चल पाना फिलहाल मुश्किल लग रहा है, क्योंकि इसके लिए सदस्य व कर्मचारी तैयार नहीं हैं।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की जर्जर बिल्डिंग की छत से बरसात में पानी टपकता है। जगह-जगह लेंटर टूट चुका है, दीवारों में दरारें आ गई हैं, जिनसे पानी अंदर घुसता है। इस कारण पत्रावलियां खराब हो जाती हैं। उच्चाधिकारियों ने निरीक्षण कर भवन की स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था का भरोसा दिया। विभागीय जिम्मेदार किराए की जगह नहीं तलाश पाए। वहीं कुछ अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रस्तावित नया भवन बनाने विकल्प के तौर पर तहसील में नियमित सुनवाई नहीं हो सकी।
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औरैया की उपभोक्ता अदालत के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्रा की संबद्धता भी समाप्त कर दी गई, तब से अदालत औपचारिक तौर पर खुल रही है। मंगलवार को नए अध्यक्ष चार्ज ले सकते हैं, इसके बाद प्रकरणों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद थी। हालांकि कर्मचारी जर्जर भवन में काम करने को तैयार नहीं है, इसलिए वादकारियों काे राहत मिलने की फिलहाल उम्मीद नहीं है। वरिष्ठ सदस्य न्यायाधीश वंदना मिश्रा ने बताया कि एटा से अध्यक्ष् योगेंद्रराम गुप्ता को संबद्ध किया गया है, वह जल्द ही चार्ज ले लेंगे। अभी अदालत में 371 वाद लंबित हैं, इनमें से 45 बाद साल से अधिक पुराने हाे चुके हैं, जबकि 108 वाद ऐसे हैं जो तीन साल से अधिक के हो चुके हैं। जिनके फिलहाल निस्तारण की कोई उम्मीद नजर नहीं आती, प्रस्तावित नए भवन को बनने में काफी वक्त लगेगा।
तीन से पांच माह में होना चाहिए निस्तारण
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा (7) के अनुसार सामान्य मामले तीन माह व जांच आदि से जुड़े मामलों का निस्तारण पांच माह में किया जाना चाहिए, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल विपरीत है। करीब चार माह से अदालत में कोेई निर्णय नहीं हुआ है। साथ ही सुरक्षित स्थान मिलने तक अदालत का चल पाना फिलहाल मुश्किल लग रहा है, क्योंकि इसके लिए सदस्य व कर्मचारी तैयार नहीं हैं।
