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Kannauj News: पॉक्सो एक्ट के दुरुपयोग पर अदालत सख्त, झूठे आरोप लगाने वाली माताओं को सजा
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कन्नौज। पॉक्सो एक्ट के बढ़ते दुरुपयोग पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) हरेंद्रनाथ ने झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाली दो महिलाओं पर गुरुवार को कार्रवाई की है। एक महिला को तीन दिन की जेल और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। वहीं दूसरे मामले में एक महिला के खिलाफ वाद दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यह कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए है। इसे निजी रंजिश निकालने का हथियार नहीं बनाया जा सकता है। न्यायालय के इस फैसले को उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है जो लोग व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए झूठी प्राथमिकी का सहारा लेते हैं।
पहला मामला थाना ठठिया क्षेत्र का है। जून 2024 में महिला ने अपने दूसरे पति सोनू रैदास के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि सोनू उसकी 13 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ लगातार दुष्कर्म कर रहा था। बेटी महिला के पहले पति की संतान थी, जिनकी दुर्घटना में मौत हो चुकी है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि आरोपी उन्हें डरा-धमकाकर गुजरात ले गया था, वहां भी उसने यह कृत्य जारी रखा। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर सोनू रैदास को जेल भेज दिया था। सुनवाई जब शुरू हुई तो महिला बयानों से पलट गई। महिला ने अदालत में स्वीकार किया कि उसने बयानों और तहरीर में गलत तथ्यों का उल्लेख किया था, जिस गंभीर कानून का सहारा लेकर व्यक्ति को जेल भेजा गया था, उसका आधार ही असत्य था। न्यायाधीश ने इस मामले को पॉक्सो कानून का दुरुपयोग माना।
दूसरे मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने वाली स्नेहलता नामक महिला को कारावास की सजा सुनाई है। स्नेहलता ने दिसंबर 2024 में राजा नामक युवक पर अपनी चौदह वर्षीय बेटी से छेड़खानी का आरोप लगाया था। पुलिस जांच में बेटी ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया। बेटी ने बताया कि मां ने लकड़ी बीनने के मामूली विवाद में रंजिशन यह झूठा मामला दर्ज कराया था। न्यायालय ने स्नेहलता को धारा 217 बीएनएस और 22 पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया। उसे तीन दिन के कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
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पहला मामला थाना ठठिया क्षेत्र का है। जून 2024 में महिला ने अपने दूसरे पति सोनू रैदास के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि सोनू उसकी 13 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ लगातार दुष्कर्म कर रहा था। बेटी महिला के पहले पति की संतान थी, जिनकी दुर्घटना में मौत हो चुकी है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि आरोपी उन्हें डरा-धमकाकर गुजरात ले गया था, वहां भी उसने यह कृत्य जारी रखा। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर सोनू रैदास को जेल भेज दिया था। सुनवाई जब शुरू हुई तो महिला बयानों से पलट गई। महिला ने अदालत में स्वीकार किया कि उसने बयानों और तहरीर में गलत तथ्यों का उल्लेख किया था, जिस गंभीर कानून का सहारा लेकर व्यक्ति को जेल भेजा गया था, उसका आधार ही असत्य था। न्यायाधीश ने इस मामले को पॉक्सो कानून का दुरुपयोग माना।
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दूसरे मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने वाली स्नेहलता नामक महिला को कारावास की सजा सुनाई है। स्नेहलता ने दिसंबर 2024 में राजा नामक युवक पर अपनी चौदह वर्षीय बेटी से छेड़खानी का आरोप लगाया था। पुलिस जांच में बेटी ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया। बेटी ने बताया कि मां ने लकड़ी बीनने के मामूली विवाद में रंजिशन यह झूठा मामला दर्ज कराया था। न्यायालय ने स्नेहलता को धारा 217 बीएनएस और 22 पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया। उसे तीन दिन के कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।