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गैस की आंच ने बिगाड़ा स्वाद : डोसा 30 तो टिक्की 20 रुपये महंगी

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 02 May 2026 11:45 PM IST
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Gas flame spoils the taste: Dosa is Rs 30 and Tikki is Rs 20 costlier
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कन्नौज। इत्रनगरी में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ गई है। इस बढ़ोतरी ने आम जनता की थाली का गणित बिगाड़ दिया है। बाहर खाना खाने के शौकीनों को अब अधिक खर्च करना पड़ेगा। रसोई गैस के बढ़ते दामों ने भोजनालय, ढाबा और ऑनलाइन रसोई तक की कमर तोड़ दी है। त्वरित भोजन और भोजनालयों पर इसका सबसे अधिक असर दिख रहा है। डोसा 30 रुपये और आलू टिक्की 20 रुपये महंगी हो गई है। दुकानदारों ने लाभ के लिए कचौड़ी की संख्या और समोसे का आकार छोटा कर दिया है।
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छोटे व्यापारियों को गैस पर 30 फीसदी अधिक खर्च करना पड़ रहा है। चाय-समोसे से लेकर मिठाई और बेकरी उत्पादों की लागत बढ़ गई है। भोजनालय मालिक दाम नहीं बढ़ाने पर दुकान चलाना मुश्किल बता रहे हैं। खर्च कम करने के लिए कुछ जगहों पर खाने की गुणवत्ता और मात्रा में कटौती की जा रही है। पांच किलोग्राम वाले कॉमर्शियल सिलिंडर में भी 261 रुपये की वृद्धि हुई है। इससे छोटे दुकानदारों का खर्च भी काफी बढ़ गया है। लगन और शादियों के इस सीजन में खानपान सेवा और हलवाइयों ने अपने रेट बढ़ा दिए हैं। म
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फोटो:39: चाट विक्रेता हरिओम गुप्ता।
एक प्लेट पर बढ़ाने पड़ेंगे 10 रुपये

कामर्शियल सिलिंडर के दाम बढ़ने का सीधा असर व्यवसाय पर पड़ रहा है। हालांकि अभी चाट के दाम नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन यही स्थिति रही तो जल्द ही चाट प्लेट की कीमत 10 रुपये तक बढ़ानी पड़ सकती है।
-हरिओम गुप्ता, प्रकाश चाट हाउस
फोटो:40: मिठाई विक्रेता अजय कुमार।
15 से 20 फीसदी बढ़ जाएगी मिठाई की कीमत
कामर्शियल सिलिंडर के दाम बढ़ जाने से मिठाई की लागत में ईंधन का खर्च बढ़ गया है। इसलिए अब मिठाईयों के दाम बढाना पड़ेंगे। फिलहाल मिठाई के दाम नहीं बढ़ाए हैं। एक-दो दिन में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाएंगे।
-अजय कुमार, मिठाई विक्रेता
फोटो :41: डॉ.उदयपाल सिंह
बाजार में बन रही आर्थिक असंतुलन की स्थिति
नेहरू महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उदयपाल सिंह का कहना है कि व्यवसायिक सिलिंडरों के दाम बढ़ने से बाजार में आर्थिक असंतुलन की स्थिति बन रही है। इसका सीधा असर छोटे दुकानदारों व मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। अमीर लोग तो पहले से ही फाइव स्टार होटलों में खाते हैं,, जबकि ठेली पर चाट-पकौड़े एक श्रमिक वर्ग या मध्यम वर्ग का युवक खाता है। यदि उस पर भी 30 प्रतिशत महंगाई होगी तो ग्राहकों की संख्या में निश्वित रूप से कमी आएगी। ऐसे में दुकानदार को घाटा होना स्वाभाविक है।
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