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Kannauj News: 40 पैसे क्रीड़ा शुल्क में कैसे तैयार करें खिलाड़ी
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कन्नौज। हर साल महंगाई बढ़ती है पर वित्तपोषित (एडेड) स्कूलों के कई मदों में छात्रों से 16 साल पहले तय हुआ शुल्क लिया जा रहा है। छात्रों से प्रतिमाह विकास के लिए दो रुपये शुल्क, पंखे के लिए डेढ़ रुपये, कला शुल्क 1.20 रुपये, क्रीड़ा के लिए 40 पैसे शुल्क लिया जा रहा है। इन शुल्कों के सहारे कॉलेजों को अपने संसाधनों का संचालन करना पड़ रहा है। ऐसे में अधिकतर वित्तपोषित स्कूलों के संचालकों को आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा है।
जिले में 59 वित्तपोषित (एडेड) स्कूल संचालित हैं। इनमें पढ़ने वाले छात्रों से जो प्रतिमाह शुल्क लिया जा रहा है, वह वर्ष 2010 में निर्धारित किया गया था, जो आज भी लागू हैं। उसी के अनुसार वित्तपोषित स्कूलों में छात्रों से शुल्क लिया जा रहा है। शुल्क पर नजर डाले तो कक्षा छह से आठ तक के छात्रों से क्रीड़ा शुल्क सिर्फ 40 पैसे लिए जा रहे हैं। इस शुल्क से छात्रों को खिलाड़ी बनाना संभव ही नहीं है। इसके अलावा कला के लिए 1.20 रुपये, देरी से आने पर 10 पैसे, छात्र पंजीकरण के लिए एक रुपये लिया जा रहा है। साथ ही प्रगति पत्र का भी एक ही रुपये ले रहे हैं। ऐसे में एडेड स्कूलों के संचालन में प्रबंधकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
छह से आठ तक के छात्रों से नहीं ली जाती धनराशि
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत सरकार कक्षा एक से आठ तक के छात्रों को निशुल्क शिक्षा दे रही है। इसमें छात्रों को मध्याह्न भोजन, ड्रेस, जूता, मोजा, स्वेटर, बैग के लिए 1200 रुपये और पाठ्य पुस्तकें दी जाती है। वित्तपोषित स्कूलों में भी यह नियम लागू है तो कक्षा छह से आठ तक के छात्रों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है।
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प्रोजेक्ट अलंकार के तहत वित्तपोषित स्कूलों को सरकार देती धनराशि
डीआईओएस पप्पू सरोज ने बताया कि वित्तपोषित स्कूलों को संसाधन उपलब्ध और विकास कराने के लिए सरकार ने प्रोजेक्ट अलंकार के तहत धनराशि दी जाती है। इसके लिए स्कूलों को आवेदन करना होता है। इसमें 25 फीसदी धनराशि स्कूल प्रबंधन को खर्च करनी होती है और 75 फीसदी धनराशि सरकार देती है। इसके लिए स्कूल में कम से कम 300 छात्र अध्ययनरत होने चाहिए। 10 स्कूलों को प्रोजेक्ट अलंकार के तहत सरकार ने धनराशि उपलब्ध कराई है।
शुल्क मद (मासिक) कक्षा नौ व 10 (रुपये) कक्षा 11 व 12 (रुपये)
विकास 05 08
क्रीडा 0.40 0.60
विज्ञान 1.50 02
पंखा 1.50 1.50
जलपान 06 06
वाचनालय 06 08
श्रव्य दृश्य 1.20 1.20
कला 1.20 -
प्रगति पत्र 01 01
छात्र पंजीकरण 01 01
अनुपस्थित दंड 0.10 0.10
गृह परीक्षा 08 08
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जिले में 59 वित्तपोषित (एडेड) स्कूल संचालित हैं। इनमें पढ़ने वाले छात्रों से जो प्रतिमाह शुल्क लिया जा रहा है, वह वर्ष 2010 में निर्धारित किया गया था, जो आज भी लागू हैं। उसी के अनुसार वित्तपोषित स्कूलों में छात्रों से शुल्क लिया जा रहा है। शुल्क पर नजर डाले तो कक्षा छह से आठ तक के छात्रों से क्रीड़ा शुल्क सिर्फ 40 पैसे लिए जा रहे हैं। इस शुल्क से छात्रों को खिलाड़ी बनाना संभव ही नहीं है। इसके अलावा कला के लिए 1.20 रुपये, देरी से आने पर 10 पैसे, छात्र पंजीकरण के लिए एक रुपये लिया जा रहा है। साथ ही प्रगति पत्र का भी एक ही रुपये ले रहे हैं। ऐसे में एडेड स्कूलों के संचालन में प्रबंधकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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छह से आठ तक के छात्रों से नहीं ली जाती धनराशि
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत सरकार कक्षा एक से आठ तक के छात्रों को निशुल्क शिक्षा दे रही है। इसमें छात्रों को मध्याह्न भोजन, ड्रेस, जूता, मोजा, स्वेटर, बैग के लिए 1200 रुपये और पाठ्य पुस्तकें दी जाती है। वित्तपोषित स्कूलों में भी यह नियम लागू है तो कक्षा छह से आठ तक के छात्रों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है।
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प्रोजेक्ट अलंकार के तहत वित्तपोषित स्कूलों को सरकार देती धनराशि
डीआईओएस पप्पू सरोज ने बताया कि वित्तपोषित स्कूलों को संसाधन उपलब्ध और विकास कराने के लिए सरकार ने प्रोजेक्ट अलंकार के तहत धनराशि दी जाती है। इसके लिए स्कूलों को आवेदन करना होता है। इसमें 25 फीसदी धनराशि स्कूल प्रबंधन को खर्च करनी होती है और 75 फीसदी धनराशि सरकार देती है। इसके लिए स्कूल में कम से कम 300 छात्र अध्ययनरत होने चाहिए। 10 स्कूलों को प्रोजेक्ट अलंकार के तहत सरकार ने धनराशि उपलब्ध कराई है।
शुल्क मद (मासिक) कक्षा नौ व 10 (रुपये) कक्षा 11 व 12 (रुपये)
विकास 05 08
क्रीडा 0.40 0.60
विज्ञान 1.50 02
पंखा 1.50 1.50
जलपान 06 06
वाचनालय 06 08
श्रव्य दृश्य 1.20 1.20
कला 1.20 -
प्रगति पत्र 01 01
छात्र पंजीकरण 01 01
अनुपस्थित दंड 0.10 0.10
गृह परीक्षा 08 08