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Kannauj News: छिबरामऊ की कान्हा गोशाला बनेगी प्रदेश के लिए मिसाल
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छिबरामऊ। नगर पालिका परिषद की कान्हा गोशाला कम बजट में बनकर तैयार हो गई है। यह गोशाला प्रदेशभर के लिए एक मिसाल बनकर उभरेगी। पालिका प्रशासन इसे अगस्त में शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
गोशाला में टिन शेडों में 500 गोवंशों को संरक्षित किया जाएगा। इनके लिए 135 पंखे और प्रत्येक शेड में पानी के फव्वारे लगाए गए हैं। वर्ष 2017 में गोशाला के लिए 1.65 करोड़ रुपये का बजट मांगा गया था। कोरोना काल और महंगाई के कारण कार्य में देरी हुई। वर्ष 2019 में तीन कार्यदायी संस्थाओं ने टेंडर छोड़ दिया था। तब तत्कालीन डीएम शुभ्रांत शुक्ला के कहने पर पालिका ने खुद निर्माण का बीड़ा उठाया। चेयरमैन मनोज दुबे, राहुल सिंह और अन्य ठेकेदारों व समाजसेवियों के सहयोग से गोशाला बनी है। यह गोशाला कई आधुनिक सुविधाओं से लैस है।
गोशाला परिसर में एक हर्बल गार्डन विकसित किया गया है। इसमें 101 प्रजाति के औषधीय पौधे तैयार हो रहे हैं। प्रत्येक पौधे पर नाम और लाभ की जानकारी वाली पट्टिका लगेगी, जिससे युवाओं को जानकारी मिलेगी। प्रकाश के लिए बायो गैस प्लांट से पांच किलोवॉट बिजली पैदा की जाएगी। गोवंशों के गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर पालिका की आय का स्रोत बढ़ेगा।
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आकर्षण और पक्षी बसेरा
युवाओं को आकर्षित करने के लिए गोशाला में ओपन जिम की स्थापना होगी। जन्मदिन या शादी की सालगिरह जैसे कार्यक्रमों के लिए एवरग्रीन हट भी आकर्षण का केंद्र होगा। गोशाला परिसर को राष्ट्रीय ध्वज की तरह तीन रंगों से सजाया गया है। यहां राधा कृष्ण, गाय के बछड़े और भगवान शंकर की प्रतिमाएं लगेंगी। पक्षियों के लिए दीवारों पर 151 मिट्टी के कटोरे और दानों के लिए काउंटर बनवाए गए हैं।
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गोशाला में टिन शेडों में 500 गोवंशों को संरक्षित किया जाएगा। इनके लिए 135 पंखे और प्रत्येक शेड में पानी के फव्वारे लगाए गए हैं। वर्ष 2017 में गोशाला के लिए 1.65 करोड़ रुपये का बजट मांगा गया था। कोरोना काल और महंगाई के कारण कार्य में देरी हुई। वर्ष 2019 में तीन कार्यदायी संस्थाओं ने टेंडर छोड़ दिया था। तब तत्कालीन डीएम शुभ्रांत शुक्ला के कहने पर पालिका ने खुद निर्माण का बीड़ा उठाया। चेयरमैन मनोज दुबे, राहुल सिंह और अन्य ठेकेदारों व समाजसेवियों के सहयोग से गोशाला बनी है। यह गोशाला कई आधुनिक सुविधाओं से लैस है।
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गोशाला परिसर में एक हर्बल गार्डन विकसित किया गया है। इसमें 101 प्रजाति के औषधीय पौधे तैयार हो रहे हैं। प्रत्येक पौधे पर नाम और लाभ की जानकारी वाली पट्टिका लगेगी, जिससे युवाओं को जानकारी मिलेगी। प्रकाश के लिए बायो गैस प्लांट से पांच किलोवॉट बिजली पैदा की जाएगी। गोवंशों के गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर पालिका की आय का स्रोत बढ़ेगा।
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युवाओं को आकर्षित करने के लिए गोशाला में ओपन जिम की स्थापना होगी। जन्मदिन या शादी की सालगिरह जैसे कार्यक्रमों के लिए एवरग्रीन हट भी आकर्षण का केंद्र होगा। गोशाला परिसर को राष्ट्रीय ध्वज की तरह तीन रंगों से सजाया गया है। यहां राधा कृष्ण, गाय के बछड़े और भगवान शंकर की प्रतिमाएं लगेंगी। पक्षियों के लिए दीवारों पर 151 मिट्टी के कटोरे और दानों के लिए काउंटर बनवाए गए हैं।