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Kannauj News: टपकती छतों के नीचे चल रही विकास कराने वालों की हुकुमत
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कन्नौज। जनता की समस्याएं सुनने वाले सरकारी दफ्तर खुद बदहाली की शिकायत कर रहे हैं। इत्रनगरी में शुक्रवार को पहली बारिश ने सरकारी भवनों की असलियत उजागर कर दी है। कहीं छतें टपक रही हैं तो कहीं दीवारें दरक रही हैं। कर्मचारी जान जोखिम में डालकर काम कराने को मजबूर हैं। मानसून की दस्तक के साथ ही जिले के कई सरकारी भवनों की जर्जर तस्वीर सामने आ गई है। नगर पालिका के कई कमरों में बारिश का पानी टपक रहा है। दीवारों में पड़ी दरारें और छतों से रिसाव व्यवस्था की अनदेखी की गवाही दे रहे हैं।
शहर के बीचो-बीच स्थित सहायक श्रमायुक्त कार्यालय का भवन भी खस्ताहाल है। सदर तहसील परिसर के पुराने एनआईसी भवन में जिला पूर्ति कार्यालय समेत कई विभाग संचालित हो रहे हैं। अंदर मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति हुई, लेकिन बाहर से भवन अब भी खंडहर जैसा नजर आता है।सबसे खराब स्थिति जिला उपभोक्ता विवाद एवं प्रतितोष आयोग कार्यालय की है। वर्षों से जर्जर भवन में कार्यालय चल रहा है। बारिश होते ही छत टपकने लगती है और लेंटर का प्लास्टर टूटकर गिरता है। कर्मचारियों के सिर पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान की ओर कदम नहीं बढ़ा रहे हैं। सरकारी भवनों की हकीकत बयां करती पड़ताल।
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फोटो :33: जिला उपभोक्ता विवाद एवं प्रतितोष आयोग का कार्यालय खतरे के बीच काम करते कर्मी। संवाद
जर्जर भवन में न्याय की उम्मीद
सदर तहसील परिसर में वर्ष 2008 से जिला उपभोक्ता विवाद एवं प्रतितोष आयोग का कार्यालय चल रहा है। अब भवन पूरी तरह से जर्जर है। तस्वीर में दीवारों से उखड़ा प्लास्टर, सीलन से काली पड़ी दीवारें और जगह-जगह टूटता लेंटर साफ दिखाई दे रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जिससे फाइलों और अभिलेखों के सुरक्षित रहने पर भी सवाल खड़े होते हैं। उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने वाला यह कार्यालय खुद बदहाल व्यवस्था का शिकार बना हुआ है।
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फोटो :34: पुरानी एनआईसी बिल्डिंग का बाहरी हिस्सा जर्जर हो चुका है। संवाद
बाहर से खंडहर, भीतर चल रहा सरकारी दफ्तर
तहसील सदर परिसर स्थित पुरानी एनआईसी बिल्डिंग की दीवारों से प्लास्टर उखड़ चुका है, ईंटें खुल गई हैं और जगह-जगह दरारें साफ नजर आती हैं। भवन में जिला पूर्ति कार्यालय समेत कई सरकारी दफ्तर संचालित हैं। अंदर मरम्मत के सहारे काम चल रहा है, लेकिन बाहर से इमारत खंडहर जैसी दिखाई देती है। बारिश के मौसम में जर्जर ढांचा कर्मचारियों और आने वाले लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।
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फोटो :35: शहर में स्थित श्रम कार्यालय भी बाहर से जर्जर है। संवाद
जर्जर दीवारों में श्रम विभाग का दफ्तर
सहायक श्रमायुक्त कार्यालय वर्षों से एक कमरे में संचालित है। बाहर से भवन की हालत बेहद खराब है। दीवारों का प्लास्टर झड़ चुका है, ईंटें खुल गई हैं और छज्जों पर उगी घास जर्जरता की गवाही दे रही है। शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित यह भवन हर दिन सैकड़ों लोगों की नजर में आता है, फिर भी मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दिया गया। मजदूरों और कर्मचारियों के हितों की निगरानी करने वाला यह दफ्तर खुद बदहाल व्यवस्था का प्रतीक बन गया है।
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फोटो :36: नगर पालिका कार्यालय में दीवारों पर दरारें दिख रहीं हैं। संवाद
नगर पालिका की दीवारों में दरारें
नगर पालिका कार्यालय के कई कमरों में दरारें अब साफ दिखाई देने लगी हैं। तस्वीर में दीवार के ऊपरी हिस्से में लंबी दरारें और उखड़ता प्लास्टर भवन की कमजोर हालत बयां कर रहा है। इसी भवन से शहर के विकास और रखरखाव की योजनाएं संचालित होती हैं लेकिन खुद पालिका भवन मरम्मत की जरूरत में खड़ा है। कर्मचारियों के बीच भी भवन की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
वर्जन
जर्जर भवनों को लेकर संबंधित विभाग से पत्र भेजा जाता है, जिसके आधार पर उसकी जांच कराई जाती है। इसके बाद ही उसे निष्प्रयोज्य घोषित किया जाता है।
-दीपेश अस्थाना, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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जिले में जो भी जर्जर भवन हैं, उन्हें निष्प्रयोज्य घोषित कराया जाएगा। यदि किसी विभाग के पास बजट नहीं है तो वह लिखित रूप से दे। उन्हें सरकारी भवन उपलब्ध कराया जाएगा।
-आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी
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शहर के बीचो-बीच स्थित सहायक श्रमायुक्त कार्यालय का भवन भी खस्ताहाल है। सदर तहसील परिसर के पुराने एनआईसी भवन में जिला पूर्ति कार्यालय समेत कई विभाग संचालित हो रहे हैं। अंदर मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति हुई, लेकिन बाहर से भवन अब भी खंडहर जैसा नजर आता है।सबसे खराब स्थिति जिला उपभोक्ता विवाद एवं प्रतितोष आयोग कार्यालय की है। वर्षों से जर्जर भवन में कार्यालय चल रहा है। बारिश होते ही छत टपकने लगती है और लेंटर का प्लास्टर टूटकर गिरता है। कर्मचारियों के सिर पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान की ओर कदम नहीं बढ़ा रहे हैं। सरकारी भवनों की हकीकत बयां करती पड़ताल।
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फोटो :33: जिला उपभोक्ता विवाद एवं प्रतितोष आयोग का कार्यालय खतरे के बीच काम करते कर्मी। संवाद
जर्जर भवन में न्याय की उम्मीद
सदर तहसील परिसर में वर्ष 2008 से जिला उपभोक्ता विवाद एवं प्रतितोष आयोग का कार्यालय चल रहा है। अब भवन पूरी तरह से जर्जर है। तस्वीर में दीवारों से उखड़ा प्लास्टर, सीलन से काली पड़ी दीवारें और जगह-जगह टूटता लेंटर साफ दिखाई दे रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जिससे फाइलों और अभिलेखों के सुरक्षित रहने पर भी सवाल खड़े होते हैं। उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने वाला यह कार्यालय खुद बदहाल व्यवस्था का शिकार बना हुआ है।
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फोटो :34: पुरानी एनआईसी बिल्डिंग का बाहरी हिस्सा जर्जर हो चुका है। संवाद
बाहर से खंडहर, भीतर चल रहा सरकारी दफ्तर
तहसील सदर परिसर स्थित पुरानी एनआईसी बिल्डिंग की दीवारों से प्लास्टर उखड़ चुका है, ईंटें खुल गई हैं और जगह-जगह दरारें साफ नजर आती हैं। भवन में जिला पूर्ति कार्यालय समेत कई सरकारी दफ्तर संचालित हैं। अंदर मरम्मत के सहारे काम चल रहा है, लेकिन बाहर से इमारत खंडहर जैसी दिखाई देती है। बारिश के मौसम में जर्जर ढांचा कर्मचारियों और आने वाले लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।
फोटो :35: शहर में स्थित श्रम कार्यालय भी बाहर से जर्जर है। संवाद
जर्जर दीवारों में श्रम विभाग का दफ्तर
सहायक श्रमायुक्त कार्यालय वर्षों से एक कमरे में संचालित है। बाहर से भवन की हालत बेहद खराब है। दीवारों का प्लास्टर झड़ चुका है, ईंटें खुल गई हैं और छज्जों पर उगी घास जर्जरता की गवाही दे रही है। शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित यह भवन हर दिन सैकड़ों लोगों की नजर में आता है, फिर भी मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दिया गया। मजदूरों और कर्मचारियों के हितों की निगरानी करने वाला यह दफ्तर खुद बदहाल व्यवस्था का प्रतीक बन गया है।
फोटो :36: नगर पालिका कार्यालय में दीवारों पर दरारें दिख रहीं हैं। संवाद
नगर पालिका की दीवारों में दरारें
नगर पालिका कार्यालय के कई कमरों में दरारें अब साफ दिखाई देने लगी हैं। तस्वीर में दीवार के ऊपरी हिस्से में लंबी दरारें और उखड़ता प्लास्टर भवन की कमजोर हालत बयां कर रहा है। इसी भवन से शहर के विकास और रखरखाव की योजनाएं संचालित होती हैं लेकिन खुद पालिका भवन मरम्मत की जरूरत में खड़ा है। कर्मचारियों के बीच भी भवन की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
वर्जन
जर्जर भवनों को लेकर संबंधित विभाग से पत्र भेजा जाता है, जिसके आधार पर उसकी जांच कराई जाती है। इसके बाद ही उसे निष्प्रयोज्य घोषित किया जाता है।
-दीपेश अस्थाना, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
जिले में जो भी जर्जर भवन हैं, उन्हें निष्प्रयोज्य घोषित कराया जाएगा। यदि किसी विभाग के पास बजट नहीं है तो वह लिखित रूप से दे। उन्हें सरकारी भवन उपलब्ध कराया जाएगा।
-आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी