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Kannauj News: भाजपा विधायकों की जीत के अंतर से 10 से 90 गुना घटे वोट
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कन्नौज। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के बाद आए आंकड़ों ने शुक्रवार को जिले की राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण के लिए चलाए गए इस अभियान ने तीनों विधानसभा सीटों कन्नौज सदर, छिबरामऊ और तिर्वा का गणित बदल दिया है। इन सीटों पर मतदाता संख्या में आई गिरावट मौजूदा विधायकों की वर्ष 2022 की जीत के अंतर से कई गुना अधिक है। इससे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा ने कन्नौज की तीनों सीटों पर क्लीन स्वीप किया था पर जीत का अंतर काफी कम रहा था। कन्नौज सदर (सुरक्षित) सीट पर भाजपा के असीम अरुण ने 6,090 वोटों से जीत दर्ज की थी पर अभियान के बाद इस क्षेत्र में 64,733 वोट ही कम हो गए हैं। यानी कम हुए वोटों की संख्या जीत के अंतर से 10 गुना ज्यादा है। वह समाज कल्याण मंत्री भी हैं। सबसे चौंकाने वाले आंकड़े छिबरामऊ सीट के हैं। यहां अर्चना पांडेय महज 1,111 वोटों से जीती थीं। पुनरीक्षण में यहां रिकॉर्ड 98,962 वोट कम हुए हैं। यह आंकड़ा उनकी जीत के अंतर से 90 गुना अधिक है। वहीं, तिर्वा में कैलाश राजपूत ने 4,608 वोटों से जीत हासिल की थी जबकि अब विधानसभा क्षेत्र से 58,193 वोट काट दिए गए हैं। यह उनकी जीत के अंतर से 12 गुना अधिक है।
फोटो :19: भाजपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया।
भाजपा का दावा फर्जी वोट हटने से बढ़ेगी पारदर्शिता
भाजपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया का कहना है कि मतदाता सूची से कम हुए वोट फर्जी थे। उनका तर्क है कि ये वोट अधिकांशतः समाजवादी पार्टी के पक्ष में थे। इन्हें रणनीतिक तौर पर सूची में शामिल कराया गया था। भाजपा के इन अवैध वोटों के हटने से चुनाव में पारदर्शिता आएगी और इसका असर पार्टी की जीत पर नहीं पड़ेगा। बल्कि असली जनादेश और स्पष्ट होकर सामने आएगा। मुस्लिम बहुल इलाकों में डबल वोट बने थे, जिनके कटने से फर्जी वोटिंग भी नहीं हो सकेगी।
फोटो :20: सपा प्रवक्ता विजय द्विवेदी।
सपा का दावा, एसआईआर से होगा फायदा
समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल इन आंकड़ों को बारीकी से देख रहे हैं। विपक्षी खेमे में यह चर्चा है कि इतनी बड़ी संख्या में वोटों का कटना कहीं वास्तविक मतदाताओं के विलोपन का परिणाम तो नहीं। छिबरामऊ जैसी सीट पर, जहां हार-जीत का फैसला मात्र एक हजार वोटों से हुआ था, वहां एक लाख वोटों का कम होना किसी भी दल का खेल बना या बिगाड़ सकता है। सपा के जिला प्रवक्ता विजय द्विवेदी का कहना है कि एसआईआर से भाजपा ने अपनी ही कब्र खोद ली है।
फोटो :21: डॉ. रामनारायण, राजनीतिक विश्लेषक
नए और शुद्ध डाटा पर लड़ी जाएगी जंग
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रामनारायण का कहना है कि एसआईआर अभियान के बाद साफ हुई इस तस्वीर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2027 की जंग अब नए और शुद्ध डाटा पर लड़ी जाएगी। यदि भाजपा का दावा सही है कि ये फर्जी वोट थे तो पार्टी के लिए राह आसान हो सकती है। यदि इन कटे हुए वोटों में सामान्य मतदाता भी शामिल हैं, तो वर्ष 2022 में बेहद कम अंतर से जीतने वाले विधायकों के लिए अगली डगर बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है। इत्रनगरी की जनता इस बदलाव को भावी चुनावी परिणामों के ट्रेलर के रूप में देख रही है।
एसआईआर के बाद जिले की स्थिति
विधानसभा क्षेत्र
2022 विजेता
2022 हारे जीत का अंतर घटे वोट
गुणा
कन्नौज सदर
असीम अरुण (भाजपा) अनिल दोहरे (सपा) 6,090
64,733
10 गुना
छिबरामऊ अर्चना पांडेय (भाजपा) अरविंद यादव (सपा) 1,111
98,962
89 गुना
तिर्वा कैलाश राजपूत (भाजपा) अनिल पाल (सपा) 4,608
58,193
12 गुना
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विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा ने कन्नौज की तीनों सीटों पर क्लीन स्वीप किया था पर जीत का अंतर काफी कम रहा था। कन्नौज सदर (सुरक्षित) सीट पर भाजपा के असीम अरुण ने 6,090 वोटों से जीत दर्ज की थी पर अभियान के बाद इस क्षेत्र में 64,733 वोट ही कम हो गए हैं। यानी कम हुए वोटों की संख्या जीत के अंतर से 10 गुना ज्यादा है। वह समाज कल्याण मंत्री भी हैं। सबसे चौंकाने वाले आंकड़े छिबरामऊ सीट के हैं। यहां अर्चना पांडेय महज 1,111 वोटों से जीती थीं। पुनरीक्षण में यहां रिकॉर्ड 98,962 वोट कम हुए हैं। यह आंकड़ा उनकी जीत के अंतर से 90 गुना अधिक है। वहीं, तिर्वा में कैलाश राजपूत ने 4,608 वोटों से जीत हासिल की थी जबकि अब विधानसभा क्षेत्र से 58,193 वोट काट दिए गए हैं। यह उनकी जीत के अंतर से 12 गुना अधिक है।
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फोटो :19: भाजपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया।
भाजपा का दावा फर्जी वोट हटने से बढ़ेगी पारदर्शिता
भाजपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया का कहना है कि मतदाता सूची से कम हुए वोट फर्जी थे। उनका तर्क है कि ये वोट अधिकांशतः समाजवादी पार्टी के पक्ष में थे। इन्हें रणनीतिक तौर पर सूची में शामिल कराया गया था। भाजपा के इन अवैध वोटों के हटने से चुनाव में पारदर्शिता आएगी और इसका असर पार्टी की जीत पर नहीं पड़ेगा। बल्कि असली जनादेश और स्पष्ट होकर सामने आएगा। मुस्लिम बहुल इलाकों में डबल वोट बने थे, जिनके कटने से फर्जी वोटिंग भी नहीं हो सकेगी।
फोटो :20: सपा प्रवक्ता विजय द्विवेदी।
सपा का दावा, एसआईआर से होगा फायदा
समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल इन आंकड़ों को बारीकी से देख रहे हैं। विपक्षी खेमे में यह चर्चा है कि इतनी बड़ी संख्या में वोटों का कटना कहीं वास्तविक मतदाताओं के विलोपन का परिणाम तो नहीं। छिबरामऊ जैसी सीट पर, जहां हार-जीत का फैसला मात्र एक हजार वोटों से हुआ था, वहां एक लाख वोटों का कम होना किसी भी दल का खेल बना या बिगाड़ सकता है। सपा के जिला प्रवक्ता विजय द्विवेदी का कहना है कि एसआईआर से भाजपा ने अपनी ही कब्र खोद ली है।
फोटो :21: डॉ. रामनारायण, राजनीतिक विश्लेषक
नए और शुद्ध डाटा पर लड़ी जाएगी जंग
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रामनारायण का कहना है कि एसआईआर अभियान के बाद साफ हुई इस तस्वीर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2027 की जंग अब नए और शुद्ध डाटा पर लड़ी जाएगी। यदि भाजपा का दावा सही है कि ये फर्जी वोट थे तो पार्टी के लिए राह आसान हो सकती है। यदि इन कटे हुए वोटों में सामान्य मतदाता भी शामिल हैं, तो वर्ष 2022 में बेहद कम अंतर से जीतने वाले विधायकों के लिए अगली डगर बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है। इत्रनगरी की जनता इस बदलाव को भावी चुनावी परिणामों के ट्रेलर के रूप में देख रही है।
एसआईआर के बाद जिले की स्थिति
विधानसभा क्षेत्र
2022 विजेता
2022 हारे जीत का अंतर घटे वोट
गुणा
कन्नौज सदर
असीम अरुण (भाजपा) अनिल दोहरे (सपा) 6,090
64,733
10 गुना
छिबरामऊ अर्चना पांडेय (भाजपा) अरविंद यादव (सपा) 1,111
98,962
89 गुना
तिर्वा कैलाश राजपूत (भाजपा) अनिल पाल (सपा) 4,608
58,193
12 गुना