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Kannauj News: इशारों में समझाई युवक की दरिंदगी, कोर्ट ने दी उम्रकैद

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 11:08 PM IST
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The young man explained his brutality through gestures, and the court sentenced him to life imprisonment.
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कन्नौज। मूकबधिर किशोरी से दुष्कर्म के मामले में युवक को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। उस पर 12 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। पीड़िता ने विशेष शिक्षक की मदद से कोर्ट में इशारों में गवाही दी, जिस पर दोषी को सजा सुनाई गई।
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सदर कोतवाली के एक गांव निवासी ने 28 सितंबर 2023 को दर्ज कराई प्राथमिकी में बताया था कि उसकी मूकबधिर बहन मां के साथ गांव में बनी काॅलोनी में रहती थी। एक भाई बाहर रहता है और एक गांव में उसके साथ रहता है। घटना से करीब डेढ़ माह पहले मां की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद दिन में बहन अकेली रहती थी, रात में वह स्वयं बहन के साथ रहता था। 23 सितंबर 2023 की शाम करीब साढ़े सात बजे जब वह बहन के लिए खाना लेकर गया, तो देखा कि वह रो रही थी। उसने गांव के ही एक युवक को घर से निकलते देखा था। बहन ने इशारों में दुष्कर्म की बात बताई तो वह आरोपी के घर गए और पूछताछ की। इस पर उसने जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद वह पीड़िता को लेकर कोतवाली पहुंचे और पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र अदालत में पेश किया। साक्ष्य व गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने उसे दोषी पाया। मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) एवं अपर सत्र न्यायाधीश हरेंद्रनाथ ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर 12 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अदालत के आदेश पर दोषी को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।
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गवाही के दौरान विशेष शिक्षिका ने की मदद



शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि पीड़िता न ही सुन पाती है और न ही बोल सकती है। ऐसी स्थिति में बीएसए को पत्र भेजकर विशेष शिक्षिका को कोर्ट बुलाया गया। उसने पीड़िता से इशारों में घटना के बारे में पूछा तो उसने पूरी घटना बता दी। इस मामले में चश्मदीद गवाह उसका भाई भी था, जिसने आरोपी को घर से निकलते हुए देखा था। शिक्षिका ने पीड़िता के बयानों को लिपिबद्ध किया, जिसे कोर्ट ने अहम माना और दोषी युवक को ताउम्र सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।



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मूक बधिर न होती तो मिलती दस साल की सजा



शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मूक बधिर किशोरी से दुष्कर्म की वारदात को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। वैसे भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के अंतर्गत दोषी को दस साल की कैद मिलती, लेकिन पीड़िता नाबालिग होने के साथ दिव्यांग यानि मूक बधिर है, इसलिए धारा 376 (2) के अंतर्गत ट्रायल किया गया। सबूत पक्के और ठोस गवाही के चलते दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यदि पीड़िता दिव्यांग न होती तो उसे दस साल की सजा होती। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए अभिशाप हैं, ऐसे अपराधी को स्वच्छंद नहीं रहना चाहिए।
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