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Kannauj News: बाग में छिपा मिला वसीक मुल्ला, परिवार ने किया किनारा
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कन्नौज। दर्जी की हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी वसीक मुल्ला शहर के पास ही एक बाग में छिप गया था। बुधवार की देर शाम पुलिस टीमों ने आसपास के बागों की तलाशी ली तो वह एक बाग में मिल गया। पुलिस ने सदर कोतवाली में ले जाकर उससे पूछताछ की है। वहीं, आरोपी के परिवार वालों ने किनारा कर लिया है। पत्नी ने पुलिस से मांग की है कि पति को सख्त सजा दी जाए।
शहर के मोहल्ला शेखाना निवासी वसीक मुल्ला ने 20 साल पहले अपने सगे बड़े भाई तौफीक को लाठी-डंडों से पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। चार साल तक सुनवाई के बाद उसे चार साल कैद की सजा सुनाई गई थी। एक साल बाद हाईकोर्ट में अपील कर वह जमानत पर घर आ गया था। इस बीच उसने परिवार से दूरी बना ली थी और मोहल्ले से दूर खेत में स्थित अमरूद की बगिया में रहने लगा।
आरोपी वसीक मुल्ला चार भाइयों में दूसरे नंबर का है। 30 साल पहले उसके बड़े भाई तौफीक पिता तौकीर हसन की हत्या में जेल चला गया था। भाई के जेल से छूट कर आने के बाद वसीक मुल्ला ने उससे बात करना बंद कर दिया था। भाई कलीम ने बताया कि पिता की मौत के बाद वसीक का दिमागी संतुलन बिगड़ गया था। 1999 में उसने बड़े भाई तौफीक (पिता के हत्यारोपी) को लाठी-डंडों से पीट कर मौत के घाट उतार दिया था, जब उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
वसीक की पत्नी रिजवाना ने बताया कि जेल से आने के बाद वह अजीब हरकतें करने लगा और परिवार के किसी सदस्य से कोई वास्ता नहीं रखता था। मनमाने तरीके से जमीन बेच कर खर्च चलाता था। पत्नी ने बताया कि आठ बीघा जमीन बेच चुका है। घर नहीं आता है और खेतों में अमरूद की बाग में रहता था। वह दिमागी रूप से बीमार है, इसलिए परिवार के लोग दूरी बनाकर रखते थे। पत्नी जरदोजी का काम कर परिवार का भरण पोषण कर रही है। पुलिस द्वारा गिरफ्तारी किए जाने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। कहा कि उसे पहले ही जेल या पागलखाने भेज देना चाहिए था। प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि हत्यारोपी वसीक मुल्ला को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है। घटना के पीछे किसी प्रकार की रंजिश की बात सामने नहीं आई है। मृतक और आरोपी एक-दूसरे से परिचित भी नहीं थे। गुरुवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।
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शहर के मोहल्ला शेखाना निवासी वसीक मुल्ला ने 20 साल पहले अपने सगे बड़े भाई तौफीक को लाठी-डंडों से पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। चार साल तक सुनवाई के बाद उसे चार साल कैद की सजा सुनाई गई थी। एक साल बाद हाईकोर्ट में अपील कर वह जमानत पर घर आ गया था। इस बीच उसने परिवार से दूरी बना ली थी और मोहल्ले से दूर खेत में स्थित अमरूद की बगिया में रहने लगा।
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आरोपी वसीक मुल्ला चार भाइयों में दूसरे नंबर का है। 30 साल पहले उसके बड़े भाई तौफीक पिता तौकीर हसन की हत्या में जेल चला गया था। भाई के जेल से छूट कर आने के बाद वसीक मुल्ला ने उससे बात करना बंद कर दिया था। भाई कलीम ने बताया कि पिता की मौत के बाद वसीक का दिमागी संतुलन बिगड़ गया था। 1999 में उसने बड़े भाई तौफीक (पिता के हत्यारोपी) को लाठी-डंडों से पीट कर मौत के घाट उतार दिया था, जब उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
वसीक की पत्नी रिजवाना ने बताया कि जेल से आने के बाद वह अजीब हरकतें करने लगा और परिवार के किसी सदस्य से कोई वास्ता नहीं रखता था। मनमाने तरीके से जमीन बेच कर खर्च चलाता था। पत्नी ने बताया कि आठ बीघा जमीन बेच चुका है। घर नहीं आता है और खेतों में अमरूद की बाग में रहता था। वह दिमागी रूप से बीमार है, इसलिए परिवार के लोग दूरी बनाकर रखते थे। पत्नी जरदोजी का काम कर परिवार का भरण पोषण कर रही है। पुलिस द्वारा गिरफ्तारी किए जाने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। कहा कि उसे पहले ही जेल या पागलखाने भेज देना चाहिए था। प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि हत्यारोपी वसीक मुल्ला को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है। घटना के पीछे किसी प्रकार की रंजिश की बात सामने नहीं आई है। मृतक और आरोपी एक-दूसरे से परिचित भी नहीं थे। गुरुवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।