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कुदरत का कहर: ‘400 बीघा फसल डूबी', उजड़ गए शादी के अरमान, SDM बोले- खाली जमीन पर है पानी, किसानों का छलका दर्द

Wed, 12 Aug 2026 11:03 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 12 Aug 2026 11:03 AM IST
सार

Auraiya News: बिधूना क्षेत्र में पांडु नदी का पानी उफान पर आने से तिरकों, गैली, ढिपरा और बर्रु समेत छह से अधिक गांवों की 400 बीघा से ज्यादा फसल जलमग्न हो गई है। किसानों का आरोप है कि नदी की सफाई न होने से यह स्थिति बनी है, जिससे कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों और शादी की तैयारी कर रहे परिवारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

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Auraiya 400 bighas of crops submerged as Pandu River overflows hopes for a daughters wedding dashed
पांडु नदी का पानी उफनाने से 400 बीघा फसल जलमग्न - फोटो : amar ujala

विस्तार

औरैया जिले में बिधूना क्षेत्र से निकली पांडु नदी का पानी उफान पर है। तिरकों, गैली, ढिपरा, बर्रु सहित अन्य छह से ज्यादा गांवों के 400 बीघा से ज्यादा खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हैं। किसान प्रशासन लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। एक किसान की बेटी के अगले माह हाथ पीले होने हैं।

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अब फसल डूबने से बिटिया की शादी के अरमानों पर पानी फिर गया। किसानों ने बताया कि बेला से लक्ष्मीरामपुरवा की तरफ जाने वाले पांडु नदी पुल उफनाई है। इसका पानी आसपास खेतों में बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि धान की फसल की थी जो पानी डूबी हुई है। कोई अधिकारी देखने तक नहीं आया।

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सफाई न होने की वजह से फसल डूब गईं
जब कभी हल्की सफाई हो जाती है। क्षेत्र में 400 बीघा फसल डूबी हुई है। किसानों ने बताया कि चंदा करके सफाई कराई है, लेकिन इससे नाममात्र ही राहत मिली है। उन्होंने बताया कि कर्ज लेकर फसल की थी, अच्छा मुनाफा मिलने की आस भी थी, लेकिन सफाई न होने की वजह से फसल डूब गईं। अब अगर पानी निकल भी जाता है, तो फसल सड़ने की पूरी संभावना है।

उनकी 45 बीघा जमीन पर धान की फसल खड़ी थी। एक अगस्त से डूबी हुई है, जिससे फसल नष्ट हो गई हैं। पांडु नदी की सफाई वर्ष 2024 में हुई थी। गंदगी की वजह से आसपास गांव की 400 बीघा फसल डूबी हुई है। हम लोगों ने जेसीबी लगवाकर पुल के पास स्वयं कुछ सफाई कराई है। जिससे कुछ पानी ही निकल सका है।  -गोविंद कुमार, किसान

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मेरी दो बीघा खेत है। करीब पांच दिन से पानी भरा हुआ है। पांडु नदी की सफाई न होने से यह समस्या आई है। सब कागजों में काम हो जाते हैं। अधिकारी समस्या को सुनने तक नहीं आते।  -राधाकृष्ण, किसान

20 बीघा जमीन पर 50 हजार की लागत से धान की फसल लगाई थी। जलभराव होने के कारण नष्ट हो गई है। अगले महीने बेटी की शादी है। इधर-उधर से कर्ज करके शादी कर लेते, इसके बाद फसल से रुपये मिलता। उससे कर्ज अदा कर देते। सभी योजना पर पानी फिर गया।  -राजेश कुमार, किसान

नौ बीघा जमीन पर धान की फसल खड़ी थी। 10 दिन से जलभराव होने के कारण फसल नष्ट हो गई है। कर्जा लेकर 20 हजार रुपये लगाकर रोपाई की थी। अब क्या करें समझ नहीं आ रहा है।  -पवन भदौरिया, किसान

इन किसानों की फसल हुई है जलमग्न
गांव बेला बस्ती निवासी प्रमोद कुमार बाथम की 35 बीघा, गोविंद दोहरे 45 बीघा, मनोज बाथम पांच बीघा, विनोद दुबे 10 बीघा, मुन्ना लाल सविता 10, मुन्नू बाथम तीन बीघा में बाजरा, बाबूराम तीन बीघा बाजरा। शीलू कुशवाहा तीन बीघा, राधाकृष्ण दो बीघा, राजू बाथम 15 बीघा, आदित्य ठाकुर 15 बीघा, कमल सिंह पांच बीघा, मुन्नू भदौरिया 10 बीघा, बलराम सिंह बाथम 20 बीघा, श्यामू वर्मा 10 बीघा, बंटू दुबे 8 बीघा।

कल वहां स्वयं गए थे, निरीक्षण करने। किसानों की खाली जमीन पर पानी भरा है। फसल नहीं डूबी हैं। -कमल कुमार, एसडीएम

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