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Kanpur News: औरैया का एनजीओ चलाएगा धर्मपुर गोशाला, एक साल का करार

संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Mon, 04 May 2026 12:29 AM IST
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Auraiya NGO will run Dharampur cowshed, one year agreement
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कानपुर देहात। संदलपुर ब्लॉक में धर्मपुर वृहद गोशाला का संचालन अब औरैया का एनजीओ करेगा। पशुपालन विभाग ने एक साल का करार किया है। संरक्षित गोवंशों की देखभाल आदि ठीक से करने पर करार आगे बढ़ाया जाएगा। जिले की अन्य चार वृहद गोशालाओं के संचालन एनजीओ को दिए जाने की रूपरेखा बनी है। इसपर भी जल्द फैसला लिया जाएगा।
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संदलपुर ब्लॉक में धर्मपुर, राजपुर ब्लॉक में जैसलपुर महदेवा, मलासा ब्लॉक में जगदीशपुर व रसूलाबाद ब्लॉक में अन्ने प्रथम व अन्ने द्वितीय वृहद गोशाला हैं। प्रति गोशाला करीब 1.6 करोड़ रुपये खर्च किया गया है। एनजीओ के जरिए इन गोशालाओं के संचालन की रूपरेखा बनी। इसमें धर्मपुर गोशाला संचालन में औरैया के एनजीओ जय माता गृह उद्योग ने रुचि दिखाई। इसपर एक साल के करार पर बीते दस अप्रैल को उन्हें गोशाला दी गई है। यहां मौजूदा समय में 370 गोवंश संरक्षित हैं।
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इधर अन्य चार वृहद गोशालाओं को भी एनजीओ चलाएंगे। बनकर तैयार जैसलपुर महदेवा गोशाला में करीब 270 गोवंश हैं। जबकि जगदीशपुर गोशाला में करीब 300 गोवंश संरक्षित हैं। हालांकि अभी अन्ने प्रथम व अन्ने द्वितीय गोशाला में गोवंश संरक्षित नहीं है। बीते दिनों सीडीओ के निरीक्षण में कई कार्याें में खामियां मिली हैं। इन खामियों को दुरुस्त कराने को कहा गया है। इसके बाद ये गोशालाएं हैंडओवर होंगी तब संचालन के लिए इन्हें एनजीओ को दिया जाएगा।

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गोबर से दीयाली और अगरबत्ती बनाकर आमदनी करेंगे एनजीओ

कानपुर देहात। वृहद गोशालाओं से मिलने वाला गोबर एनजीओ की आमदनी का जरिया बनेगा। दरअसल जिले में ग्रामीण क्षेत्र की 76 गोशालाएं है। इनमें करीब आठ हजार गोवंश संरक्षित हैं। वहीं शहरी क्षेत्र की 13 गोशालाओं में करीब ढ़ाई हजार गोवंश संरक्षित हैं। इन गोशालाओं में गोबर से उपले, गोबर काष्ठ आदि बनाने पर फोकस नहीं किया गया है। इसकी वजह से गोशालाओं से आमदनी नहीं हो पा रही है। इधर एनजीओ गोशाला से मिलने वाले गोबर से दीयाली, जलाने के लिए गोबर से बने लट्ठे (गोबर काष्ठ) और अगरबत्ती आदि उत्पादन कर बेचेंगे और आमदनी करेंगे। वहीं गोबर गैस प्लाट से जरूरी ऊर्जा का उत्पादन करने का विकल्प भी है। (संवाद)

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जिले में धर्मपुर वृहद गोशाला संचालन के लिए औरैया के एनजीओ को दी गई है। प्रति पशु के अनुसार देय धनराशि एनजीओ को दी जाएगी। पशुपालन विभाग व्यवस्थाओं की निगरानी करेगा। ठीक से गोशाला संचालन की स्थिति नहीं मिलने पर करार बीच में रद्द करने या फिर आगे करार की अवधि नहीं बढ़ाने जैसे निर्णय लिए जाएंगे। - डॉ. सुबोध कुमार बर्नवाल, सीवीओ



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कंट्रोल रूम में सीसीटीवी से होगी निगरानी

वृहद गोशालाओं में गोवंश को चारा-दाना और अन्य सुविधाओं की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। पशुपालन विभाग के पास बजट की कमी आड़े आयी तो अब सीएसआर फंड से सीसीटीवी लगाने का निर्णय लिया गया है। सीसीटीवी कैमरे का कंट्रोल रूम सीवीओ कार्यालय में बनेगा। यहां से गोशालाओं की निगरानी की जाएगी।
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