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‘मौन चीखें’: मौत के ठंडे पानी में भी जिंदा था प्यार, माधूरी के पैरों पर टिके थे भाई-भांजे के हाथ, बांदा हादसा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 16 Jun 2026 05:27 AM IST
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सार

Banda Chandraval River Accident: जसपुरा में चंद्रावल नदी में डूबने से तीन बच्चों की मौत हो गई। गोताखोरों को शव मिले तो भाई और भांजे ने बहन के पैर पकड़ रखे थे, जो उनके आखिरी संघर्ष की कहानी बयां कर रहा है।

Banda Siblings and nephew drown in Chandrawal River both grabbed  legs in attempt to save themselves
बांदा में तीन मासूमों की डूबकर मौत - फोटो : amar ujala
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विस्तार

बांदा जिले में जसपुरा थाना क्षेत्र के गौरीकला गांव निवासी उमाशंकर विश्वकर्मा ने बताया कि अभी हाल ही में मौदहा बांध का पानी नहरों के लिए छोड़ा गया है। नहरों से होकर बांध का पानी चंद्रावल नदी में आने से नदी का बहाव तेज था। इसी दौरान सोमवती अमावस्या में स्नान करने गए भाई-बहन समेत तीन बच्चे नदी में डूबकर बह गए थे।


ताऊ उमाशंकर ने बताया कि जब तीनों के शव पानी से बाहर निकाले गए, तो भाई और भांजा अपनी बहन के पैर पकड़े हुए थे, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। इससे पता चलता है कि तीनों ने जान बचाने के लिए कितना संघर्ष किया होगा। गौरीकला गांव निवासी उमाशंकर के मुताबिक, माधुरी कक्षा नौ में गांव के ही विद्यालय में पढ़ती है। उसका भाई अंश कक्षा छह में था।

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तीनों की मौत होने से मचा कोहराम
जबकि प्रतीक कक्षा पांच तक परास गांव में पढ़ा है। प्रतीक माधुरी की चचेरी बहन स्नेहा का पुत्र है। माधुरी और अंश के पिता रमाशंकर विश्वकर्मा मजदूरी करते हैं। घर में मां सुनैना हैं। माधुरी और अंश तीन भाई-बहन हैं। सबसे बड़ा ऋषभ (15) है। जबकि प्रतीक दो भाई एक बहन में सबसे बड़ा था। एक साथ तीनों बच्चों के नदी में डूबकर मौत होने से कोहराम मचा है।

बच्चों समेत पत्नी को घर से दिया था निकाल
जसपुरा थाना क्षेत्र के गौरीकला गांव निवासी उमाशंकर विश्वकर्मा ने बताया कि वह तीन भाई हैं। बड़े भाई शिव कुमार की बेटी स्नेहा की शादी कानपुर नगर के घाटमपुर थाना क्षेत्र के परास गांव में हुई थी। स्नेहा का पति पंकज विश्वकर्मा उसे सही तरह से नहीं रखता था और मारपीट करता था।

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गुस्से में घर में आग भी लगा दी थी
उसने स्नेहा को बच्चों समेत होली के त्योहार में घर से मारपीट कर निकाल दिया था। तब से स्नेहा अपने बेटे प्रतीक समेत तीनों बच्चों के साथ अपने मायके गौरीकला में रह रही है। प्रतीक के पिता पंकज ने 12 अप्रैल को गौरीकला गांव आकर गुस्से में घर में आग भी लगा दी थी, जिससे पूरा परिवार समय रहते आग से जलने से बच गया था।

10 से 12 गोताखोर लगे, तब तीन घंटे में तलाश पाए तीनों को
चंद्रावल नदी में घटनास्थल में इतना तेज बहाव था कि तीनों बच्चाें को तलाश करने में गांव के 10 से 12 गोताखोरों को तीन घंटे से ज्यादा का समय लग गया था। बाद में तीनों को नदी से बरामद किया गया। दो एंबुलेंस से तीनों को जसपुरा सीएचसी ले जाया गया। यहां तीनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया था।

चीखें सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठा
गौरी कलां गांव में तीन मासूम बच्चों की मौत से गहरा मातम पसरा है। अस्पताल परिसर में ऐसा कोहराम मचा कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। मां सुनैना अपने बेटे और बेटी के शवों से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। उनकी दर्द भरी चीखें सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठा।

तीन अर्थियां एक साथ निकलीं
पिता रमाशंकर की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मृतक प्रतीक की मां स्नेहा भी अपने बेटे का चेहरा देखकर बिलख उठीं। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बेटे की अर्थी को कंधा देना पड़ेगा। गांव के बुजुर्गों ने इसे अपने जीवन का हृदय विदारक दृश्य बताया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद गांव से तीन अर्थियां एक साथ निकलीं, तो हर आंख नम थी।

ये था पूरा मामला
बांदा जिले में सोमवती अमावस्या के अवसर पर चंद्रावल नदी में स्नान के दौरान तीन बच्चों की डूबकर मौत हो गई। मृतकों में भाई-बहन और उनका भांजा शामिल हैं। जसपुरा थाना क्षेत्र के गौरीकलां गांव निवासी उमाशंकर विश्वकर्मा ने बताया कि उनकी भतीजी माधुरी (13), भाई अंश कुमार (10) और भांजे प्रतीक (10) अपनी बड़ी मां हीरामणि के साथ सिद्धबाबा मंदिर में पूजन-दर्शन और नदी में स्नान के लिए गए थे।

नदी के तेज बहाव में समा गए तीनों
नदी में नहाते समय अंश का पैर गीली मिट्टी में फिसल गया और वह गहराई में जाने लगा। उसे डूबता देख प्रतीक ने बचाने के लिए छलांग लगा दी। दोनों को डूबता देख माधुरी भी उन्हें बचाने के लिए नदी में कूद गई। देखते ही देखते तीनों बच्चे नदी के तेज बहाव में समा गए। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके।

200 मीटर दूर से निकाले
करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों ने तीनों के शव घटनास्थल से 200 मीटर दूर से निकाले। जसपुरा इंस्पेक्टर ऋषिदेव सिंह भी मौके पर पहुंचे। तीनों बच्चों को नदी से निकालकर जसपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बच्चों के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।

तीनों बच्चों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। अपील की है कि वे बच्चों को नदी और नालों के आसपास न जाने दें, क्योंकि इस वक्त बहाव बहुत तेज है।  -सौरभ सिंह, सीओ सदर

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