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खनन घोटाला: मौरंग खनन की एनओसी देने का मामला, सीबीआई ने डीएफओ से पूछताछ कर खंगाले कागजात
Thu, 28 Nov 2019 07:41 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 28 Nov 2019 07:41 PM IST
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अवैध मौरंग खनन
- फोटो : अमर उजाला
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हमीरपुर में सीबीआई टीम वन विभाग पहुंची और मौरंग के पट्टों में जारी की एनओसी के अभिलेख खंगालकर डीएफओ से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। 16 एकड़ के क्षेत्र में मौरंग के पट्टे दिए जाने संबंधी अभिलेख भी कब्जे में लेकर सीबीआई ने जिले के तत्कालीन व कानपुर देहात के डीएफओ ललित गिरि को शुक्रवार (आज) को पूछताछ के लिए तलब किया है।
खनन घोटाले की परत खोलने के लिए चार दिनों से मुख्यालय के मौदहा बांध निरीक्षण भवन में सीबीआई की तीन सदस्यीय ठहरी है। अवैध खनन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने नामजद आरोपितों को तलब करना शुरू कर दिया है। गुरुवार को टीम अचानक वन विभाग पहुंची। जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
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खनन घोटाले की परत खोलने के लिए चार दिनों से मुख्यालय के मौदहा बांध निरीक्षण भवन में सीबीआई की तीन सदस्यीय ठहरी है। अवैध खनन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने नामजद आरोपितों को तलब करना शुरू कर दिया है। गुरुवार को टीम अचानक वन विभाग पहुंची। जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
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फतेहपुर में धड़ल्ले से नदी की धारा को मोड़ कर होता अवैध खनन
- फोटो : अमर उजाला
तीन सदस्यीय टीम ने डीएफओ से मौरंग खनन में पूर्व में दी गई एनओसी के बारे में जानकारी ली। बताते हैं कि 17 मई 2010 को सरीला क्षेत्र में बेतवा नदी के बेंदा दरिया में 12 एकड़ भूमि में मौरंग खनन के लिए तत्कालीन डीएफओ ललित गिरि ने एनओसी जारी की थी। मौरंग का पट्टा 16 एकड़ का था, लेकिन वन सीमा से 100 मीटर की दूरी पर एनओसी 12 एकड़ में खनन के लिए जारी की गई थी।
उस समय सरीला के रेंजर अशोक कुमार मिश्रा व वन विभाग के सर्वेयर परमलाल साहू थे। यह दोनों रिटायर्ड हो चुके हैं, जबकि डीएफओ ललित गिरि मौजूदा में कानपुर देहात में डीएफओ हैं। सीबीआई ने मौरंग के पट्टे में दी गई एनओसी को लेकर करीब दो घंटे तक अभिलेख खंगाले और मौरंग के पट्टों से संबंधित सभी जरूरी अभिलेख कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
कानपुर देहात के डीएफओ ललित गिरि को शुक्रवार को सीबीआई ने निरीक्षण भवन कैंप आफिस में बयान देने के लिए तलब किया हैं। बताते हैं कि वर्ष 2010 में मौरंग के पट्टों के लिए वन विभाग एनओसी जारी करता था, लेकिन उसके कुछ साल बाद अब इसके लिए एनओसी एनजीटी जारी करता है।
उस समय सरीला के रेंजर अशोक कुमार मिश्रा व वन विभाग के सर्वेयर परमलाल साहू थे। यह दोनों रिटायर्ड हो चुके हैं, जबकि डीएफओ ललित गिरि मौजूदा में कानपुर देहात में डीएफओ हैं। सीबीआई ने मौरंग के पट्टे में दी गई एनओसी को लेकर करीब दो घंटे तक अभिलेख खंगाले और मौरंग के पट्टों से संबंधित सभी जरूरी अभिलेख कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
कानपुर देहात के डीएफओ ललित गिरि को शुक्रवार को सीबीआई ने निरीक्षण भवन कैंप आफिस में बयान देने के लिए तलब किया हैं। बताते हैं कि वर्ष 2010 में मौरंग के पट्टों के लिए वन विभाग एनओसी जारी करता था, लेकिन उसके कुछ साल बाद अब इसके लिए एनओसी एनजीटी जारी करता है।