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सलमान खान को सुपरहिट कराने में इनका अहम रोल, जानें मशहूर फिल्म राइटर के बारे में
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 26 Feb 2017 10:03 AM IST
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दिलीप शुक्ला
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बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान पुलिस की वर्दी पहनकर जिन डायलॉग्स से धमाल मचा देते हैं। दरअसल उन डायलॉग्स के पीछे की असलियत और भी चौंकाने वाली है। सनी देओल की फिल्म ‘घायल’ और ‘दामिनी’ से हिंदी फिल्मों के लेखन से जुड़े दिलीप शुक्ला ने इस बीच कई कामयाब और चर्चित फिल्में लिखी हैं। एक अर्से के बाद सलमान के लिए लिखी फिल्म ‘दबंग’ और ‘दबंग 2’ ने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया है। सलमान को सदाबहार बनाने में इन दो फिल्मों को बहुत बड़ा हाथ है। अपने संवादों और किरदारों के देसी टच के लिए मशहूर दिलीप शुक्ला इन दिनों सलमान के लिए एक और बड़ी फिल्म लिख रहे हैं।
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ये हैं दिलीप शुक्ला की मशहूर फिल्में
दिलीप शुक्ला
इसी साल 2017 में अयोध्या में लंका फिल्म का स्क्रीन प्ले और डायलॉग दिलीप शुक्ला ने ही लिखा है। इसके अलावा 2014 में आई फिल्म जय हो, दबंग-2 (2012), ये जो मोहब्बत है (12), अलाप (2012), गट्टू (2011), बिन बुलाये बाराती (2011), दबंग (2010), हेलो हम लल्न बोल रहे हैं (2010), किसान (2009), डेड लाइन सिर्फ 24 घंटे (2006), उत्थान (2006), एक से बढ़कर एक (2004), पुलिस फोर्स इनसाइड स्टोरी (2004), किस्मत (2004), सलाखें (1998), उड़ान (1997), इंसाफ (1997), जिद्दी (1997), अंदाज अपना-अपना (1994), जज्बात (1994), मोहरा (1994), अंत (1994), एलान (1994), बेदर्दी (1993), दामिनी (1993), दिव्यशक्ति (1993), घायल (1990) जैसी बॉलीवुड की हिट फिल्मों के डायलॉग लिखे हैं।
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कानपुर में ससुराल, लखनऊ में घर
दिलीप शुक्ला
मूलत: लखनऊ निवासी दिलीप शुक्ला का कुछ समय कानपुर में भी गुजरा है। कानपुर में उनका ससुराल है और बहन की शादी भी कानपुर में हुई है। शुरू से कानपुर आते-जाते रहने और वहां के लोगों को भली-भांति समझने से दिलीप शुक्ला को चुलबुल पांडे जैसे किरदारों को पर्दे पर जीवित करना मुश्किल नहीं रहा। ‘दबंग 2’ में उन्होंने चुलबुल पांडे को कानपुर के बजरिया थाने का प्रभारी बना दिया था।
‘पहले सोचता हूं बाद में लिखता हूं’
दिलीप शुक्ला
चुलबुल पांडे के बारे में पूछने पर दिलीप बताते हैं, ‘मैंने अनेक फिल्मों में पुलिस आफिसर के किरदार लिखे हैं। फिर लग रहा था कि अब पुलिस पर नया क्या लिखें? ईमानदार पुलिस अधिकारी और उसकी मुश्किलें या बेईमान पुलिस अधिकारी और उसका ईमानदार बनना ऐसी कहानियों पर ढेर सारी फिल्में बन चुकी हैं। मैं अपने लेखन में सबसे पहले विचार ले आता हूं। उसके बाद कहानी लिखना शुरू करता हूं। मुझे चुलबुल का विचार और किरदार अच्छा लगा। वह थोड़ा कानून मानता है और थोड़ा नहीं मानता है। वह थोड़ा अच्छा भी है और थोड़ा बुरा भी है। इस से एक नया कलर आ गया। बाकी उसमें कुछ अभिनव कश्यप ने भी जोड़ा। डायरेक्टर तो फिल्म को अपने हिसाब से आगे बढ़ा ही देता है।
‘दबंग’ की सफलता का श्रेय अरबाज को
दिलीप शुक्ला
दिलीप शुक्ला पहली ‘दबंग’ की सफलता का श्रेय सबसे पहले अरबाज खान को देना चाहते हैं। वे कहते हैं, ‘सबसे पहले अरबाज ने स्क्रिप्ट में विश्वास जताया। उसके बाद उसने अपने भाई सलमान को राजी किया। सलमान खान के आने के बाद फिल्म अपने आप बड़ी हो गई। सलमान के अदायगी ने ‘दबंग’ को सब की पसंद बना दिया। ‘दबंग 2’ के लिए फिर मुझे बुलाया गया तो मैं हंसी-खुशी राजी हो गया। चूंकि कहानी मेरी है तो मुझे मालूम था कि इसे आगे कैसे बढ़ा सकते हैं। मेरे लिए यह मुश्किल काम नहीं था।
कानपुर में खलीफागिरी है
दिलीप शुक्ला
कानपुर शहर के बारे में दिलीप कहते हैं कि यहां के लोगों में थोड़ी बहुत खलीफागिरी है। हर आदमी खुद को दूसरे का गुरू मानता है। आम कनपुरिया भी थोड़ा शातिर मिजाज और तंजिया होता है। वे हमेशा हवा में रहते हैं। हर कनपुरिया सामने वाले से खुद को ज्यादा अनुभवी और जानकार मानते हैं। दूसरे को वे घंटे पर रखते हैं। इस बार जिस कहानी की प्लॉट दिलीप तैयार कर रहे हैं उससे लगता है कि वह फिर कोई नया ‘बवाल’ दर्शकों के बीच मचाने वाले हैं।