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UP: ट्रेडिंग से डिजिटल सर्विस तक... कानपुर में कंपनियों से ज्यादा बन रहीं एलएलपी
Tue, 28 Jul 2026 05:38 PM IST
Shikha Pandey
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 28 Jul 2026 05:38 PM IST
सार
जनवरी से जून तक 10,619 एलएलपी और 2,792 नई कंपनियों का पंजीकरण हुआ। ट्रेडिंग और आयात-निर्यात क्षेत्र में सबसे ज्यादा 25-30 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
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वैभव अग्निहोत्री व वृंदा अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर के उद्यमी अब कारोबार बढ़ाने के लिए पारंपरिक कंपनी ढांचे के बजाय लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) को तेजी से अपना रहे हैं। आसान पंजीकरण, कम अनुपालन और साझेदारी की सुविधा के कारण उद्यमियों में इसका आकर्षण बढ़ा है। इसका असर कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। जनवरी से जून तक कानपुर में 10,619 एलएलपी पंजीकृत हुए हैं।
व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से पहचाने जाने वाले कानपुर में एलएलपी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल ट्रेडिंग, होलसेल और आयात-निर्यात से जुड़े कारोबारियों ने किया है। प्रोफेशनल सर्विस, रियल एस्टेट, डिजिटल सर्विस और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के उद्यमियों ने भी इस ढांचे को अपनाया है। एमसीए के आंकड़ों के अनुसार मार्च में सबसे अधिक 2,087 एलएलपी पंजीकृत हुए। जनवरी में 2,016, मई में 1,843, फरवरी में 1,760 और अप्रैल में 1,562 एलएलपी दर्ज किए गए। जून में संख्या घटकर 1,351 रही जो छह माह की अवधि में सबसे कम थी। वहीं मई में कंपनियों के पंजीकरण में सर्वाधिक उछाल देखा गया। इस माह 580 कंपनियों का पंजीकरण हुआ। जनवरी में 485, मार्च में 470, अप्रैल में 442 और फरवरी में 419 कंपनियों का पंजीकरण हुआ। जून में यह संख्या घटकर 396 रह गई जो छह महीनों में सबसे कम थी।
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दरअसल कारोबारियों के बीच एलएलपी की लोकप्रियता का बड़ा कारण इसका सरल अनुपालन है। इसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर पंजीकरण करा सकते हैं। साल में केवल दो रिटर्न दाखिल करने होते हैं और आम सभा जैसी औपचारिकताओं की जरूरत नहीं होती। कंपनी मंत्रालय को भी अपेक्षाकृत कम जानकारियां देनी होती हैं। वहीं कंपनी का पंजीकरण कराने के बाद चार-पांच से अधिक अनिवार्य रिटर्न दाखिल करने होते हैं। आम सभा करना जरूरी होता है और निदेशक, कंपनी की गतिविधियों समेत कई जानकारियां समय-समय पर एमसीए को देनी पड़ती हैं। अब कंपनी के कार्यालय स्थल का फोटो भी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।
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व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से पहचाने जाने वाले कानपुर में एलएलपी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल ट्रेडिंग, होलसेल और आयात-निर्यात से जुड़े कारोबारियों ने किया है। प्रोफेशनल सर्विस, रियल एस्टेट, डिजिटल सर्विस और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के उद्यमियों ने भी इस ढांचे को अपनाया है। एमसीए के आंकड़ों के अनुसार मार्च में सबसे अधिक 2,087 एलएलपी पंजीकृत हुए। जनवरी में 2,016, मई में 1,843, फरवरी में 1,760 और अप्रैल में 1,562 एलएलपी दर्ज किए गए। जून में संख्या घटकर 1,351 रही जो छह माह की अवधि में सबसे कम थी। वहीं मई में कंपनियों के पंजीकरण में सर्वाधिक उछाल देखा गया। इस माह 580 कंपनियों का पंजीकरण हुआ। जनवरी में 485, मार्च में 470, अप्रैल में 442 और फरवरी में 419 कंपनियों का पंजीकरण हुआ। जून में यह संख्या घटकर 396 रह गई जो छह महीनों में सबसे कम थी।
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दरअसल कारोबारियों के बीच एलएलपी की लोकप्रियता का बड़ा कारण इसका सरल अनुपालन है। इसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर पंजीकरण करा सकते हैं। साल में केवल दो रिटर्न दाखिल करने होते हैं और आम सभा जैसी औपचारिकताओं की जरूरत नहीं होती। कंपनी मंत्रालय को भी अपेक्षाकृत कम जानकारियां देनी होती हैं। वहीं कंपनी का पंजीकरण कराने के बाद चार-पांच से अधिक अनिवार्य रिटर्न दाखिल करने होते हैं। आम सभा करना जरूरी होता है और निदेशक, कंपनी की गतिविधियों समेत कई जानकारियां समय-समय पर एमसीए को देनी पड़ती हैं। अब कंपनी के कार्यालय स्थल का फोटो भी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।
प्रदेश में 14,422 नई कंपनियां और एलएलपी पंजीकृत, देश में तीसरा स्थान
जनवरी से जून के बीच उत्तर प्रदेश में कुल 14,422 नई कंपनियां और एलएलपी पंजीकृत हुईं। एलएलपी पंजीकरण के मामले में दिल्ली और मुंबई के बाद उत्तर प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर रहा। इस अवधि में देशभर में 1,32,701 नई कंपनियां और 56,941 एलएलपी पंजीकृत हुए।
जनवरी से जून के बीच उत्तर प्रदेश में कुल 14,422 नई कंपनियां और एलएलपी पंजीकृत हुईं। एलएलपी पंजीकरण के मामले में दिल्ली और मुंबई के बाद उत्तर प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर रहा। इस अवधि में देशभर में 1,32,701 नई कंपनियां और 56,941 एलएलपी पंजीकृत हुए।
एलएलपी पंजीकरण में इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी
ट्रेडिंग, होलसेल और आयात-निर्यात : 25-30 प्रतिशत
प्रोफेशनल और बिजनेस सर्विस : 20-25 प्रतिशत
रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर : 15-20 प्रतिशत
डिजिटल सर्विस : 10-15 प्रतिशत
लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन : 8-12 प्रतिशत
एलएलपी पंजीकरण बेहद आसान और इसका अनुपालन काफी सरल है। इससे कानपुर समेत पूरे प्रदेश में पंजीकरण की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। कंपनियों के पंजीकरण के बजाय लोग एलएलपी को प्राथमिकता दे रहे हैं। - सीएस वैभव अग्निहोत्री, पूर्व अध्यक्ष, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान कानपुर चैप्टर
ये आंकड़े कानपुर और उत्तर प्रदेश की मजबूत आर्थिक नींव और उज्ज्वल व्यावसायिक भविष्य को दर्शाते हैं। छोटे और मझोले उद्यमी अब कारोबार को औपचारिक ढांचे में स्थापित करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। एमसीए की डिजिटल फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाने और छोटी कंपनियों की परिभाषा में बदलाव का इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा है। - सीएस वृंदा अग्रवाल, कॉर्पोरेट मामलों की जानकार
ट्रेडिंग, होलसेल और आयात-निर्यात : 25-30 प्रतिशत
प्रोफेशनल और बिजनेस सर्विस : 20-25 प्रतिशत
रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर : 15-20 प्रतिशत
डिजिटल सर्विस : 10-15 प्रतिशत
लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन : 8-12 प्रतिशत
एलएलपी पंजीकरण बेहद आसान और इसका अनुपालन काफी सरल है। इससे कानपुर समेत पूरे प्रदेश में पंजीकरण की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। कंपनियों के पंजीकरण के बजाय लोग एलएलपी को प्राथमिकता दे रहे हैं। - सीएस वैभव अग्निहोत्री, पूर्व अध्यक्ष, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान कानपुर चैप्टर
ये आंकड़े कानपुर और उत्तर प्रदेश की मजबूत आर्थिक नींव और उज्ज्वल व्यावसायिक भविष्य को दर्शाते हैं। छोटे और मझोले उद्यमी अब कारोबार को औपचारिक ढांचे में स्थापित करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। एमसीए की डिजिटल फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाने और छोटी कंपनियों की परिभाषा में बदलाव का इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा है। - सीएस वृंदा अग्रवाल, कॉर्पोरेट मामलों की जानकार
केस-1: खाद्य उत्पाद कंपनी को एलएलपी में बदलकर आसान हुआ काम
श्यामनगर निवासी दीपक तिवारी ने बताया कि वह खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनी का संचालन करते हैं। इसी साल जनवरी में अपनी कंपनी को एलएलपी में बदल दिया। इससे अनुपालन का बोझ काफी कम हो गया है। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में हर साल आम सभा करनी होती थी। इसके अलावा बोर्ड संचालन से जुड़े कई दस्तावेजों में समय लगता था। एलएलपी में काम करना ज्यादा आसान और व्यावहारिक है।
केस-2: ट्रेडिंग कारोबार के लिए एलएलपी बना बेहतर विकल्प
किदवईनगर निवासी सुमित ओमर ने बताया कि वह अलग-अलग उत्पादों की ट्रेडिंग करते हैं। कारोबार के लिए ऐसा ढांचा चाहिए था जो लचीला हो और बार-बार सरकारी दस्तावेजों की प्रक्रिया में समय न लगे। एलएलपी में पंजीकरण आसान है इसे चलाने में खर्च भी कम आता है और पार्टनरशिप जैसी सुविधा मिलती है। इसी वजह से उन्होंने अपनी ट्रेडिंग कंपनी को एलएलपी में बदल दिया।
केस-3: छोटे कारोबारियों के लिए सुरक्षित ढांचा बन रहा एलएलपी
जाजमऊ निवासी शफीक ने बताया कि उनका चमड़े का कारोबार है। विदेशों में जिस तरह लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी (एलएलसी) का विचार चलता है उसी तरह अब कानपुर समेत प्रदेश में एलएलपी तेजी से बढ़ रहा है। खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो रहा है। इसमें वार्षिक अनुपालन सीमित है टर्नओवर तय सीमा से पहले ऑडिट की जरूरत नहीं पड़ती।
श्यामनगर निवासी दीपक तिवारी ने बताया कि वह खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनी का संचालन करते हैं। इसी साल जनवरी में अपनी कंपनी को एलएलपी में बदल दिया। इससे अनुपालन का बोझ काफी कम हो गया है। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में हर साल आम सभा करनी होती थी। इसके अलावा बोर्ड संचालन से जुड़े कई दस्तावेजों में समय लगता था। एलएलपी में काम करना ज्यादा आसान और व्यावहारिक है।
केस-2: ट्रेडिंग कारोबार के लिए एलएलपी बना बेहतर विकल्प
किदवईनगर निवासी सुमित ओमर ने बताया कि वह अलग-अलग उत्पादों की ट्रेडिंग करते हैं। कारोबार के लिए ऐसा ढांचा चाहिए था जो लचीला हो और बार-बार सरकारी दस्तावेजों की प्रक्रिया में समय न लगे। एलएलपी में पंजीकरण आसान है इसे चलाने में खर्च भी कम आता है और पार्टनरशिप जैसी सुविधा मिलती है। इसी वजह से उन्होंने अपनी ट्रेडिंग कंपनी को एलएलपी में बदल दिया।
केस-3: छोटे कारोबारियों के लिए सुरक्षित ढांचा बन रहा एलएलपी
जाजमऊ निवासी शफीक ने बताया कि उनका चमड़े का कारोबार है। विदेशों में जिस तरह लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी (एलएलसी) का विचार चलता है उसी तरह अब कानपुर समेत प्रदेश में एलएलपी तेजी से बढ़ रहा है। खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो रहा है। इसमें वार्षिक अनुपालन सीमित है टर्नओवर तय सीमा से पहले ऑडिट की जरूरत नहीं पड़ती।